उदयपुर के पानी पर सवाल: कहां सुरक्षित है जल, कहां है अशुद्धता, विशेषज्ञ ने बताए शुद्धता जांच के जरूरी पैमाने!

उदयपुर. अपनी प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ जलस्रोतों के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाला उदयपुर, हाल ही में इंदौर में सामने आई पानी से जुड़ी घटना के बाद एक बार फिर चर्चा में है. इस घटना के बाद आमजन के मन में जल की शुद्धता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. क्या उदयपुर का पानी पीने लायक है? इसकी जांच कैसे होती है? किन इलाकों में पानी अधिक अशुद्ध है और कहां अपेक्षाकृत शुद्ध? इन्हीं सवालों को लेकर हमने उदयपुर शहर के कोर्ट सर्कल स्थित एनचेम रिसर्च लेबोरेट्रीज के वरिष्ठ जल विशेषज्ञ इकरार मोहम्मद शेख से खास बातचीत की.
करीब 40 वर्षों से जल गुणवत्ता परीक्षण के क्षेत्र में देश-विदेश में कार्य कर चुके इकरार मोहम्मद शेख बताते हैं कि उदयपुर शहर का पानी सामान्य रूप से हार्ड (कठोर) है, लेकिन यह खतरनाक नहीं है. हार्ड पानी का अर्थ यह नहीं होता कि वह असुरक्षित है, बल्कि इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की मात्रा अधिक होती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी की शुद्धता जांचने के लिए कुछ बेसिक पैरामीटर तय होते हैं, जिनमें किसी भी खनिज की मात्रा 200 mg/L से अधिक नहीं होनी चाहिए.
इकरार शेख के अनुसार, पानी की जांच में हर पैरामीटर का अपना महत्व होता है, आम लोगों में TDS (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) को लेकर काफी भ्रम है. उन्होंने बताया कि पीने योग्य पानी में TDS की सीमा 500 mg/L तक सुरक्षित मानी जाती है. इससे अधिक होने पर पानी का स्वाद, पाचन और लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इसके अलावा पीएच वैल्यू, हार्डनेस, क्लोराइड, सल्फेट और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच भी बेहद जरूरी होती है, ताकि पानी को पूरी तरह सुरक्षित माना जा सके.
औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े इलाकों में शिकायतें ज्यादा
अगर उदयपुर शहर के उन इलाकों की बात करें जहां पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता अधिक है, तो इकरार शेख के अनुसार यूनिवर्सिटी आहट, आदर्श नगर, खड़कुआ, कानपुर और मादड़ी जैसे क्षेत्रों में अशुद्ध पानी की शिकायतें ज्यादा सामने आती हैं. खासकर वे इलाके जो औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े हैं, वहां भूजल में रसायनों और अन्य अशुद्धियों की मात्रा अधिक पाई जाती है. ऐसे क्षेत्रों में नियमित जांच और उचित फिल्ट्रेशन सिस्टम की आवश्यकता होती है. वहीं दूसरी ओर, शुद्ध पानी की उपलब्धता पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि पीएचडी (Public Health Department) द्वारा सप्लाई किया जाने वाला पानी पूरी तरह ट्रीटेड होता है.
इस पानी में आवश्यक खनिज संतुलित मात्रा में होते हैं और इसे सख्त जांच व स्वच्छता प्रक्रिया के बाद ही आमजन तक पहुंचाया जाता है. यही वजह है कि सरकारी जलापूर्ति का पानी अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है. उदयपुर की झीलों के पानी को लेकर भी विशेषज्ञ ने अपनी राय साझा की, उनके अनुसार दूध तलाई, फतेहसागर और बड़ी झील जैसे जलस्रोतों का पानी फिलहाल काफी हद तक शुद्ध माना जाता है. हालांकि यह पानी सीधे पीने योग्य नहीं होता, लेकिन उचित ट्रीटमेंट के बाद इसका सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सकता है.
पानी में फिटकरी डालने से पानी होता है साफ
इकरार मोहम्मद शेख ने यह भी बताया कि यदि आम लोग पानी की बेसिक जांच या शुद्धिकरण करना चाहते हैं, तो कुछ घरेलू उपाय भी कारगर हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि एक फिटकरी को कपड़े में बांधकर पानी में घुमाने से, यदि पानी में कोई गंदगी या अशुद्धि होगी तो वह नीचे बैठ जाती है और पानी कुछ हद तक साफ हो जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि भले ही घरों में आरओ या अन्य फिल्ट्रेशन सिस्टम लगे हों, लेकिन अक्सर पानी की टंकियों की लंबे समय तक सफाई नहीं होती, जिससे दोबारा गंदगी का खतरा बना रहता है. ऐसे में समय-समय पर पानी की टंकी की सफाई बेहद जरूरी है.



