राधा-कृष्ण ठाकुरद्वारा: 750 साल पुराना न्याय केंद्र

Last Updated:November 23, 2025, 11:50 IST
Jalore: 750 साल पुराना जालोर का राधा-कृष्ण ठाकुरद्वारा आज भी माली समाज के बड़े फैसलों का केंद्र है. पंच प्रतिमा को साक्षी मानकर निर्णय सुनाते हैं और समाज उन फैसलों को पूर्ण रूप से स्वीकार करता है. 2018 में यहां मृत्युभोज और फिजूलखर्ची पर ऐतिहासिक निर्णय लिए गए, जो सामाजिक सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हुए.
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750 साल पुराना ठाकुरद्वारा: राधा-कृष्ण मंदिर जहां आज भी चलते हैं समाज के फैसले
Jalore Thakurdwara: जालोर की बड़ी पोल स्थित राधा-कृष्ण मंदिर, जिसे स्थानीय लोग प्रेम से ‘ठाकुरद्वारा’ कहते हैं, माली समाज के लिए केवल पूजा का स्थान नहीं है. यह वह जगह है जहां पिछले 750 वर्षों से सामाजिक फैसले लिए जाते रहे हैं. 15वीं शताब्दी से चली आ रही यह परंपरा आज भी समाज के भीतर विश्वास और अनुशासन की मजबूत कड़ी बनी हुई है.
ऐतिहासिक रूप से ठाकुरद्वारा में माली समाज के 48 गांवों के आपसी मतभेद सुलझाए जाते थे. पंच भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा को साक्षी मानकर निर्णय सुनाते थे. समाज के लोग बिना किसी आपत्ति के इन फैसलों को मानते थे. यह व्यवस्था न्याय, विश्वास और सामाजिक एकता का अनोखा उदाहरण रही है. यह दिखाता है कि कैसे धार्मिक स्थल ने सामाजिक प्रशासन का रूप ले लिया था.
परंपरा आज भी जीवित हैहालांकि समाज के हर गांव में अब अलग-अलग मंदिर बन गए हैं, लेकिन बड़े और अहम फैसले अभी भी इसी प्राचीन ठाकुरद्वारा से लिए जाते हैं. यह मंदिर माली समाज की एकता, अनुशासन और परंपराओं का केंद्र बना हुआ है. इस प्रथा से समाज में बाहरी हस्तक्षेप के बिना शांति और व्यवस्था बनी रहती है.
2018 की ऐतिहासिक पंचायत: बड़े सामाजिक सुधार लागूमाली समाज ठाकुरद्वारा सेवा संस्थान, पांच पट्टी के अध्यक्ष भोमाराम ने बताया कि इस स्थल का समाज से गहरा जुड़ाव है. उन्होंने बताया कि 2018 में इसी मंदिर में एक बड़ी पंचायत आयोजित हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण और प्रगतिशील निर्णय लिए गए:
मृत्युभोज की परंपरा पर पूरी तरह रोक.
विवाह समारोहों में होने वाले स्टेज प्रोग्राम और डीजे पर प्रतिबंध.
शादियों में फिजूलखर्ची कम करने के सख्त निर्देश.
इन फैसलों ने समाज में सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा दिया और अन्य समाजों के लिए भी एक मिसाल पेश की.
न्याय और भाईचारे का प्रतीकराधा-कृष्ण मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतिबिंब नहीं है, बल्कि यह सामुदायिक एकजुटता और न्याय की ऐसी परंपरा का प्रतीक है, जिसने समय के साथ कई पीढ़ियों को रास्ता दिखाया है. ठाकुरद्वारा आज भी माली समाज की पहचान और गौरव का केंद्र बना हुआ है.
Location :
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
November 23, 2025, 11:50 IST
यह मंदिर क्यों है इतना खास? 750 साल से चलता आ रहा अनोखा न्याय सिस्टम!



