Jaipur SMS Medical College Body Donation | Ramswaroop Surolia Dehdaan | Rajasthan Inspirational Story

Last Updated:November 11, 2025, 14:03 IST
Jaipur SMS Medical College Body Donation: राजस्थान के पूर्व कृषि अधिकारी रामस्वरूप सुरोलिया ने जीवन के 13 वर्ष पूर्व देहदान का संकल्प लिया था. आज उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा पूरी की. जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में हुआ यह देहदान समाज को मानवता, सेवा और विज्ञान के प्रति समर्पण का अद्भुत संदेश देता है.
जयपुर: जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज ने आज एक ऐसी घटना का साक्ष्य दिया, जो न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए वरदान है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी. राजस्थान कृषि विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक रामस्वरूप सुरोलिया (90 वर्ष) का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया. उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप, परिजनों ने उनकी देह को मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया. यह देहदान 2012 में लिए गए संकल्प का साकार रूप है, जो मृत्यु से 13 वर्ष पूर्व लिया गया था. सुरोलिया जी का यह कदम ब्राह्मण कुल में जन्मे एक सनातनी व्यक्ति के रूप में धार्मिक बंधनों को तोड़ते हुए मानव कल्याण को प्राथमिकता देने का प्रतीक है.देहदान का संकल्प: दूरदर्शिता का प्रमाण
रामस्वरूप सुरोलिया ने 19 नवंबर 2012 को देहदान का संकल्प लिया था. उनकी दृष्टि स्पष्ट थी—मृत्यु के बाद उनकी देह मेडिकल छात्रों के लिए शरीर रचना (एनाटॉमी) की शिक्षा का माध्यम बने और नई-नई बीमारियों से लड़ने वाले शोधों में सहायक हो. 90 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी जिंदगी को विज्ञान की सेवा में समर्पित करने का फैसला किया. सुरोलिया जी को लग गया था कि उनकी उम्रदराज होने पर सामाजिक व धार्मिक रुकावटें आ सकती हैं. इसलिए, 6 वर्ष पूर्व (लगभग 2019 में) उन्होंने अपने सभी नजदीकी रिश्तेदारों को पत्र लिखकर अपनी इच्छा से अवगत कराया. इस दूरदर्शिता ने सुनिश्चित किया कि उनके निधन पर कोई विवाद न हो. एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग ने उनकी देह को ग्रहण कर लिया, जहां यह अब शोध व शिक्षा के लिए उपयोगी सिद्ध होगी.
संकल्प को अमर बनानासुरोलिया जी के परिवार ने उनके संकल्प का पूर्ण सम्मान किया. ब्राह्मण परंपरा के अनुसार, तमाम सनातन रीति-रिवाजों जैसे पिंडदान, मंत्रोच्चार और अन्य वैदिक कर्मकांड को पूरा किया गया. लेकिन अंतिम संस्कार के स्थान पर, उन्होंने देह को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया. परिवार के सदस्यों ने कहा, “पिताजी की इच्छा थी कि उनकी देह व्यर्थ न जाए. हमने उनके पत्रों को याद रखा और समाज को यह संदेश दिया कि देहदान मानवता का सबसे बड़ा दान है.” यह कदम न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक प्रतिबद्धता दर्शाता है, जो धार्मिक मान्यताओं को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ता है. एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी ने इसे सराहते हुए कहा, “ऐसे दान से हमारी पीढ़ी के डॉक्टर बेहतर प्रशिक्षित होंगे.”
सामाजिक महत्व: प्रेरणा का प्रकाशस्तंभदेहदान जैसी प्रथा भारत में धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है, लेकिन अभी भी अज्ञानता व अंधविश्वास बाधक हैं. सुरोलिया जी का उदाहरण उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सोचते हैं कि देहदान धार्मिक रूप से अनुचित है. वास्तव में, हिंदू शास्त्रों में भी ‘देह त्याग’ को मोक्ष का मार्ग माना गया है, और विज्ञान सेवा को पुण्य कार्य कहा गया है. राजस्थान में देहदान की संख्या बढ़ रही है. पिछले वर्ष एसएमएस में 150 से अधिक देहें दान हुईं, जो मेडिकल शिक्षा को मजबूत करती हैं. यह घटना जागरूकता अभियान का हिस्सा बन सकती है, जहां स्कूलों व समुदायों में देहदान के लाभ बताए जाएं. सरकार की ‘देहदान पंजीकरण’ योजना को भी बढ़ावा मिलेगा.
Jagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion, career, politica…और पढ़ें
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Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
November 11, 2025, 14:01 IST
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13 साल पहले लिया था देहदान का संकल्प, 6 साल बाद समाजबंधुओं को पत्र लिखकर दिया



