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Last Updated:December 05, 2025, 11:52 IST
Rajasthan Peepalpatra Jewellery: पीपलपत्रा आभूषण राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक कलात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं. पत्ते के आकार वाले इस आभूषण में बारीक नक्काशी और सुंदर डिजाइन महिलाओं के सौंदर्य को और बढ़ाते हैं. यह आभूषण शादी-ब्याह और त्योहारों में खास पहना जाता है और राजस्थानी विरासत की पहचान के रूप में नई पीढ़ी में भी लोकप्रिय हो रहा है.
राजस्थान की धरती सदियों से अपनी समृद्ध संस्कृति, लोककला और आभूषण-कला के लिए प्रसिद्ध है. यहां हर आभूषण केवल एक ज़ेवर नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और पहचान की कहानी कहता है. इन्हीं सुनहरी कहानियों में से एक है पीपलपत्रा, जिसे पहनते ही नारी-सौंदर्य में एक रॉयल, राजस्थानी चमक उभर आती है. यह आभूषण राजस्थान की महिलाओं के परिधान में इतना रच-बस गया है कि पीढ़ियां बदल गईं, फैशन बदल गया, पर पीपलपत्रा की मोहकता कभी कम नहीं हुई.

पीपलपत्रा कान के ऊपरी हिस्से में पहना जाने वाला एक गोलनुमा आभूषण है. इसका नाम ‘पीपलपत्रा’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसका आकार पीपल के पत्ते से मेल खाता है. कोमल, गोल, घुमावदार और प्रकृति से जुड़ा हुआ है. इसकी यही प्राकृतिक बनावट इसे और अनोखा बनाती है.

राजस्थान के सुनार सदियों से आभूषण-कला में प्रसिद्ध रहे हैं. पीपलपत्रा सोने या चांदी से तैयार किया जाता है. कारीगर उस पर उभारदार नक्काशी, बारीक डिज़ाइन और प्रकृति से प्रेरित पैटर्न बनाते हैं. कुछ पीपलपत्रा में छोटे मोती, कोरी और लोककला के चिह्न भी उकेरे जाते हैं. इसकी बनावट हल्की होने के बावजूद देखने में बेहद आकर्षक होती है.
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राजस्थान में पीपलपत्रा केवल एक गहना नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान का हिस्सा है. जब राजस्थान की महिलाएँ पारंपरिक पोशाक घाघरा, चोली और ओढ़नी पहनती हैं, तो उनके कानों में चमकता पीपलपत्रा पूरे लुक को रॉयल बनाता है. यह आभूषण विशेष अवसरों पर पहना जाता है. इसे तीज, गणगौर, विवाह, करवा चौथ, पारिवारिक और सामाजिक समारोह में पहना जाता है. राजस्थान में इसे स्त्री के सम्मान, सौंदर्य और पारंपरिक पहचान से जोड़ा जाता है. समय के साथ इसके कई रूप विकसित हुए, लेकिन इसकी सांस्कृतिक पहचान आज भी उतनी ही मजबूत है.

पीपल पत्र आभूषण का इतिहास राजपूत काल से चला आ रहा है. राजपूत काल में राजघरानों की रानियाँ और राजपुतानियाँ विशेष रूप से इस आभूषण को पहनती थीं. उनके पीपलपत्रा पर सोने की महीन नक्काशी होती थीकई बार उनमें रत्न, माणक और मोती जड़े होते थे. यह आभूषण शौर्य, सौंदर्य और शान का प्रतीक माना जाता था. समय बदला, शासन बदले, पर पीपलपत्रा का महत्व आज भी वैसा ही बना हुआ है.

भले ही समय आधुनिक हो गया हो, पर पारंपरिक आभूषणों का क्रेज आज और भी बढ़ गया है. फैशन डिजाइनर अब इन्हें नए अंदाज़ में पेश कर रहे है. शादी, फेस्टिव और फोटोशूट में पीपलपत्रा खूब ट्रेंड कर रहा है. युवा पीढ़ी भी इसे इंडो-वेस्टर्न आउटफिट के साथ मैच कर रही है. यानी पुरानी परंपरा आधुनिक फैशन से मिलकर एक नया सुंदर रूप ले चुकी है. आज राजस्थान ही नहीं, देशभर में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. सोशल मीडिया, रील्स और ब्राइडल फैशन ने इसे फिर से बहुत लोकप्रिय बना दिया है. अब यह सिर्फ गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फैशन में इसने एक अपनी अलग जगह बना ली है.

पीपलपत्रा पहनते समय एक महिला केवल एक आभूषण नहीं पहनती, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ाव, संस्कृति का सम्मान, और राजस्थान की अनोखी परंपरा को अपनाती है. यह आभूषण अपनी सरलता, सुंदरता और विरासत के कारण हर युग में खास रहा है, और आगे भी रहेगा. इसकी चमक सिर्फ धातु की नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और भावनाओं की चमक है. जब कोई महिला इसे पहनती है, तो उसके स्वरूप में न सिर्फ सौंदर्य बढ़ता है, बल्कि वह राजस्थान की सैकड़ों साल पुरानी संस्कृति को अपने साथ जीवित भी रखती है.
First Published :
December 05, 2025, 11:52 IST
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राजस्थान का चमकता रत्न! पीपलपत्रा आभूषण बना नारी-सौंदर्य और परंपरा की शान



