Rajasthan

कोटा में राष्ट्रीय एग्रोटेक मेला 2025

Last Updated:December 22, 2025, 08:15 IST

National Agrotech Fair in Kota for Farmers: नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कोटा में राष्ट्रीय एग्रोटेक मेला आयोजित करने पर सहमति बनी है. इस आयोजन के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, फूड प्रोसेसिंग और सिंचाई की नई योजनाओं से जोड़ा जाएगा ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके.News Local 18

कोटा–बून्दी संसदीय क्षेत्र सहित राजस्थान के किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कोटा में राष्ट्रीय स्तर का एग्रोटेक मेला आयोजित करने पर सहमति बनी है. नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की मौजूदगी में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कृषि विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई. बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने, कोटा में फूड प्रोसेसिंग सेंटर की स्थापना और सिंचाई व फसल सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने पर केंद्र सरकार ने सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया.

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कोटा में शीघ्र ही राष्ट्रीय स्तर का एग्रोटेक मेला आयोजित किया जाएगा, जो केंद्रीय कृषि मंत्रालय के माध्यम से संचालित होगा. इस मेले का उद्देश्य किसानों को नवीनतम कृषि तकनीक, आधुनिक यंत्र, स्मार्ट खेती के मॉडल और एग्री-स्टार्टअप्स से जोड़ना है. मेले में देशभर के कृषि वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ, कंपनियां और नवाचारकर्ता भाग लेंगे. इससे किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक सिंचाई प्रणाली, ड्रोन तकनीक और डिजिटल कृषि समाधानों की जानकारी मिलेगी. एग्रोटेक मेला कोटा–बून्दी क्षेत्र को कृषि नवाचार का केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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केंद्र सरकार के सहयोग से कोटा में फूड प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई. इस सेंटर के माध्यम से किसानों की उपज का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण किया जा सकेगा. इससे फसलों की बर्बादी रुकेगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा. गेहूं, दालें, तिलहन, सब्जियां और मोटे अनाज जैसे उत्पादों का मूल्य संवर्धन संभव होगा. इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे. फूड प्रोसेसिंग सेंटर से कोटा क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के अंतर्गत किसानों को अधिक लाभ पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों पर चर्चा हुई. योजना के ‘अन्य हस्तक्षेप’ घटक में कृषि विभाग की भागीदारी 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे फार्म पॉन्ड, डिग्गी और सूक्ष्म सिंचाई संरचनाओं को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही बढ़ी हुई बाजार कीमतों के अनुसार इकाई लागत में संशोधन, फार्म पॉन्ड की वास्तविक लागत के अनुरूप अनुदान और अनुसूचित जाति–जनजाति किसानों के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत सब्सिडी देने का सुझाव दिया गया.

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फसलों को जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के लिए तारबंदी कार्य को दोबारा योजनाओं में शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत गेहूं, मोटे और पोषक अनाज की फसलों के लिए तारबंदी पर अनुदान देने का प्रस्ताव रखा गया है. साथ ही वर्ष 2025 से लागू होने वाले मिशन–दलहन में भी कांटेदार तारबंदी को शामिल करने पर विचार हुआ. इससे किसानों को फसल नुकसान से राहत मिलेगी और उत्पादन में स्थिरता आएगी.

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केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया गया. इसमें उर्वरक आपूर्ति, विशेषकर रबी सीजन के लिए यूरिया की उपलब्धता, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव हेतु ड्रोन की व्यवस्था, कस्टम हायरिंग सेंटर की सब्सिडी संरचना में बदलाव और कृषि प्रशिक्षण परियोजनाओं जैसे विषय शामिल रहे. केंद्रीय कृषि मंत्री ने इन सभी मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए शीघ्र आवश्यक कदम उठाने और किसानों के हित में निर्णय लेने का भरोसा दिलाया.

First Published :

December 22, 2025, 08:15 IST

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किसानों के लिए बड़ी सौगात, कोटा में लगेगा राष्ट्रीय स्तर का एग्रोटेक मेला…

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