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राकेश टिकैत का खुला समर्थन! बोले- सभी किसान एक हैं, कोई बाहरी नहीं, एथेनॉल फैक्ट्री कहीं और लगाएं

हनुमानगढ़. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में टिब्बी क्षेत्र के राठीखेड़ा गांव में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. इस मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने खुलकर किसानों का साथ दिया है. टिकैत ने उन आरोपों का कड़ा पलटवार किया, जिसमें आंदोलन को पंजाब और हरियाणा के बाहरी किसानों द्वारा भड़काने और हिंसा फैलाने का दावा किया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश में कहीं भी किसानों का मुद्दा हो, वे हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे.

राकेश टिकैत ने कहा कि देश के सभी किसान एक हैं, कोई बाहरी नहीं होता. चाहे किसी भी राज्य का मुद्दा हो, किसानों की लड़ाई सबकी साझा लड़ाई है. हनुमानगढ़ में आयोजित किसान महापंचायत में भी शामिल हैं, जहां पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से भी किसान नेता पहुंचे हैं. किसान और प्रशासन के बीच वार्ता चल रही है. इसके बाद महापंचायत में फैक्ट्री के खिलाफ आगे की रणनीति तय की जाएगी. प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर जिले में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और भारी पुलिस बल तैनात किया है.  महापंचायत में अलग-अलग राज्यों से हजारों किसान जुटे हुए हैं, जबकि 1400 पुलिस जवान भी तैनात हैं.

एथेनॉल फैक्ट्री लगानी ही है तो कहीं और लगाएं

आंदोलन के दौरान राकेश टिकैत ने तोड़फोड़ और आगजनी को आंदोलन की सामान्य घटना बताया. उन्होंने कहा कि किसी की मौत नहीं हुई, इतना तो आंदोलन में होता ही है. किसान अपनी जमीन, पानी और पर्यावरण बचाने के लिए लड़ रहे हैं. टिकैत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर एथेनॉल फैक्ट्री लगानी ही है तो कहीं और लगाएं, यहां नहीं लगने देंगे. उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार की बात करती है, लेकिन स्थानीय लोगों को प्रदूषण का खतरा है तो यह रोजगार कहीं और दें. फैक्ट्री से भूजल स्तर गिरेगा, खेती प्रभावित होगी और इलाका प्रदूषित हो जाएगा. किसान संगठनों का आरोप है कि चंडीगढ़ की ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा लगाई जा रही यह 450 करोड़ की 40 मेगावाट क्षमता वाली फैक्ट्री जल, जंगल और जमीन को नुकसान पहुंचाएगी.

प्रशासन को दिया 20 दिन का अल्टीमेटम

राकेश टिकैत का यह बयान आंदोलन को नई ताकत दे रहा है. उन्होंने किसानों से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि यह लड़ाई सिर्फ हनुमानगढ़ या राजस्थान की नहीं, पूरे देश के किसानों की है. महापंचायत में गुरनाम सिंह चढूनी और जोगेंद्र सिंह उग्राहांन, प्रेम सिंह गेहलावत जैसे किसान नेता भी शामिल हैं. प्रशासन अलर्ट है, लेकिन किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें मनवाने पर जोर दे रहे हैं. यह आंदोलन पिछले 15 महीनों से चल रहा है. किसान फैक्ट्री हटाने, MoU रद्द करने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग कर रहे हैं. हालांकि वार्ता भी समाप्त हो गई है और किसानों ने प्रशासन को 20 दिन का सयम दिया है. मांगे पूरी नहीं हुई तो 7 जनवरी को सांगरिया में महापंचायत करने की चेतावनी दी है.

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