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राष्ट्रपति भवन देगा पुतिन के लिए स्टेट डिनर, क्यों वो नहीं खाएंगे इसकी एक भी निवाला

भारत का राष्ट्रपति भवन देश में आने वाले विदेशी राष्ट्रप्रमुखों के सम्मान में शानदार स्टेट डिनर के लिए विख्यात रहा है. इसमें ना केवल भांति – भांति के व्यंजन बनते हैं बल्कि ये भी ख्याल रखा जाता है कि विदेशी अतिथि को कौन से खास व्यंजन खासतौर पर पसंद है. बराक ओबामा से लेकर शेख हसीना तक ने यहां खाने के खूब तारीफ की. इस बार भी जब रूस के प्रेसीडेंट व्लादिमीर पुतिन भारत आए हुए हैं, तब राष्ट्रपति भवन ने उनके लिए स्टेट डिनर दिया है. इसमें भी तमाम सुस्वादु डिश परोसी जाएंगी. पुतिन के सामने भी इन्हें रखा जाएगा लेकिन वो शायद एक भी निवाला नहीं खाएं.

पुतिन ऐसा क्यों करेंगे इसकी भी एक कहानी है. वह विदेश यात्राओं में अपने सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत बाहर के बने खाने को हाथ भी नहीं लगाते, बेशक वो मेजबान राष्ट्रपति की दावत में ही क्यों ना परोसा गया हो. उनका खाना साथ चलने वाली किचन टीम के रूसी शेफ ही तैयार करते हैं.

पुतिन के साथ हमेशा उनकी किचन टीम भी चलती है

पुतिन के साथ हमेशा ही एक समर्पित रूसी शेफ टीम, सहायक और मोबाइल फूड-टेस्टिंग लैब यात्रा करती है, वह अपने साथ खाद्य सामग्री, मसाले और पानी लेकर ही चलती है. वही पकाती है, जिसका निर्देश उन्हें सुरक्षा टीम के फूड एक्सपर्ट द्वारा दिया जाता है.

20 सालों से विदेश में वो बाहरी शेफ का खाना नहीं खाते

पुतिन की शेफ टीम सख्त स्वच्छता मानकों के साथ उनका खाना खुद पकाती है. ये काम कम से कम 20 सालों से तो किया ही जा रहा है. ताकि ना तो उनके खाने में कोई गड़बड़ी हो और ना ही कभी खाने के जरिए उनको जहर दिया जा सके. जब भी पुतिन बाहरी देशों की यात्रा करते हैं तो स्थानीय शेफों द्वारा बने भोजन से परहेज करते हैं.

पुतिन सरल, उच्च प्रोटीन वाले भोजन पसंद करते हैं, जैसे रूसी कॉटेज चीज ट्वोरोग, शहद वाली दलिया, कच्चे क्वेल अंडे, मछली की डिश स्मोक्ड स्टर्जन, भेड़ का मांस, टमाटर-खीरे के सलाद. वे मिठाइयों, तीखे या वसा युक्त व्यंजनों से बचते हैं. कभी-कभी पिस्ता आइसक्रीम लेते हैं.

पुतिन भारी या प्रोसेस्ड डिशेज़ के बजाय सिंपल, ट्रेडिशनल और हेल्दी खाना पसंद करते हैं. ड्रिंक्स के तौर पर: वह अक्सर ग्रीन टी पसंद करते हैं, और कहा जाता है कि केफिर जैसा फ़र्मेंटेड डेयरी ड्रिंक पीते हैं.

उनका खाना कहां से आएगा

तो 5 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस डिनर में भारतीय मेन्यू बेशक उनके सामने परोसा जाएगा लेकिन व्यक्तिगत भोजन उनके सुरक्षित स्रोत से आएगा. यह प्रोटोकॉल उनकी पिछली भारत यात्राओं में भी लागू रहा है.

पुतिन विदेश यात्राओं पर जाते समय अपने देश से एक पूरा फूड कन्वॉय ले जाते हैं, जिसमें रसोइए, सपोर्ट स्टाफ और एक पोर्टेबल फूड टेस्टिंग लैब शामिल होती है.

खाना उनकी टीम बनाती है

खाना चाहे साधारण हो या फॉर्मल स्टेट डिनर, उनकी अपनी टीम द्वारा ही बनाया जाता है, वो भी रूस से लाए हुए सामान या पूर्व जांच-पास सामग्री से. ये टीम उनके पहुंचते ही कुछ देर के अंदर अंदर किचन सेटअप कर लेती है.

इस व्यवस्था की शुरुआत 2000 के दशक में हुई. वर्ष 2006 से 2010 के बीच पुतिन के विदेश जाने के दौरान उनके फूड कन्वॉय यानि रसोई टीम और फूड टेस्टिंग टीम को नियमित किया गया.

इसलिए भले ही वे किसी देश के राष्ट्रपति भवन, डिनर या भोज में जाए तो वहां असली खाना वहीं नहीं परोसा जाता जो बाकी लोगों को मिलता है, बल्कि उनका खाना उन्हीं की किचन से अलग से आता है, जिसको वो खाते हैं.

क्या होती है पोर्टेबल फूड लैब

पुतिन की विदेश यात्रा पर जाते समय, उनके खाने से पहले एक पोर्टेबल लैब उनके खाना, पानी आदि को जांचती है कि कहीं इसमें कोई विष तो नहीं मिलाया गया है.

उनकी फूड टीम का हिस्सा कौन कौन होते हैं

इसमें रूसी शेफ, टेस्टर्स, लैब टेक्नीशियन होते हैं, जिन पर भोजन पकाने, परोसने और इसकी जांच का जिम्मा होता है. खाने में उपयोग की जाने वाली हर चीज चाहे गिलास हो, बर्तन हो या बर्तन धोने की सामग्री – सब पहले ही रूस से आता है. जैसे ही वो खाना खत्म करते हैं, खाने की प्लेट, गिलास या अन्य क्राकरी को उनकी टीम तुरंत वहां से उठाकर अपने कब्जे में रख लेती है.

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