5 एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट-रैपिड रेल, कुछ साल में नोएडा को पछाड़ कर बन जाएगा यूपी का नंबर-1 शहर

Which City of UP is growing fast: यूपी का सबसे बेस्ट शहर नोएडा को माना जाता है. एनसीआर का हिस्सा होने के साथ ही यह दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद सहित कई शहरों से जुड़ा है. इसकी बेहतरीन सड़के, इन्फ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो के बाद अब एयरपोर्ट की सुविधा भी यहां मिलने जा रही है. लेकिन नोएडा का ये ताज जल्द ही छिन सकता है. यूपी का एक और शहर इतनी तेजी से डेवलप हो रहा है कि जबर्दस्त सुविधाओं के चलते यह शहर कुछ सालों में नोएडा को पछाड़ देगा.
यह शहर है मेरठ.हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ की पहली इंटीग्रेटेड टाउनशिप का भूमि पूजन कर इस शहर को नई सौगात दी है. सस्टेनेबल अर्बन प्लानिंग के तहत आगे बढ़ रहा ये शहर पहले ही एनसीआर का मजबूत हिस्सा रहा है, लेकिन अब यहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर में हो रहे बड़े बदलाव इसे आधुनिक जीवनशैली के लिए बेहतरीन शहर बनाने जा रहे हैं. खास बात है कि इस शहर में कनेक्टिविटी की सुविधा इतनी बेहतरीन है, जैसी एनसीआर के किसी भी अन्य शहर में नहीं है.
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5 एक्सप्रेसवे, रैपिड रेल और मेट्रो
मेरठ एनसीआर का इकलौता ऐसा शहर है जो पांच प्रमुख एक्सप्रेसवे से जुड़ा है. ये हैं दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ग्रीनफील्ड, गंगा एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर और ईस्टर्न पेरिफेरल. इसके साथ ही मेरठ में नमो भारत रैपिड रेल चल रही हैं जो दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर चलती हैं. यह 82 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ को जोड़ता है. पूरी तरह चालू होने पर, मेरठ से दिल्ली पहुंचने में मात्र 55 मिनट लगेंगे. इतना समय तो दिल्ली में मयूर विहार से घिटोरनी पहुंचने में भी लगता है. वहीं मेरठ मेट्रो भी अगस्त 2025 से शुरू होने जा रही है.
जेवर एयरपोर्ट और हवाई पट्टी
जेवर एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी इस शहर को इंटरनेशनल सुविधा प्रदान कर रही है. मेरठ जिले के परतापुर क्षेत्र में स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर हवाई पट्टी गगोल गांव से करीब 9 किलोमीटर दूर तक फैली हुई है. 47 एकड़ में बनी ये यह हवाई पट्टी फिलहाल केवल चार्टर्ड (गैर-अनुसूचित) उड़ानों के लिए इस्तेमाल की जा रही है. फरवरी 2014 में उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के बीच इसके विकास को लेकर समझौता हुआ था.अब इसे डेवलप करने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं.
यह आवासीय योजना है खास मेरठ की यह इंटीग्रेटेड टाउनशिप पारतापुर क्षेत्र में RRTS लाइन के नजदीक बन रही है.इस परियोजना में रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और रिक्रिएशनल ज़ोन एक ही परिसर में होंगे. लोग जहां रहने के साथ ही काम भी करेंगे और वहीं जीवन की सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद होंगी. यह वॉक टू वर्क और ग्रीन लिविंग के कॉन्सेप्ट पर आधारित होगा. ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल पर आधारित यह परियोजना इसलिए भी खास होगी, क्योंकि यह देश के कुछ ही शहरों में है और इसमें सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाकर निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना, किफायती आवास और प्रदूषण मुक्त शहर बनाना है.
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15000 करोड़ के निवेश का अनुमान
इस परियोजना के बाद से शहर में 15000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया जा रहा है. इससे रोजगार के नए अवसरों के साथ ही किसानों और प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों को बड़े लाभ की संभावना है. इसके अलावा यहां जरूरी बेसिक सुविधाएं बढ़ने की पूरी उम्मीद है.
स्मार्ट सिटी बनने में ये होंगी चुनौतियां मेरठ में इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों की सहमति जरूरी है. इसके साथ ही तय समय पर योजना का पूरा होना, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बिजली, पानी, सीवरेज, सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार होना जरूरी है. इसके अलावा एनसीआर के बसाए गए शहरों में इन्फ्रास्ट्रक्चर में रह गई कमियों से यहां सीखकर और बेहतर डेवलपमेंट करने की चुनौती सामने है.



