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Last Updated:December 20, 2025, 15:16 IST
RJS Result 2025: राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा 2025 में चिड़ावा की लक्ष्मी ने 16वीं रैंक हासिल कर एक प्रेरणादायक इतिहास रचा है. मां बनने के बाद भी उन्होंने अपने जज बनने के सपने को नहीं छोड़ा और कठिन परिस्थितियों में निरंतर मेहनत जारी रखी. उनकी यह सफलता साबित करती है कि मजबूत इरादे, सही समय प्रबंधन और परिवार के सहयोग से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. लक्ष्मी की उपलब्धि नारी सशक्तिकरण और युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई है.
RJS Result 2025: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो जिम्मेदारियां कभी बाधा नहीं बनतीं, बल्कि इंसान के हौसले को और मजबूत करती हैं. इस कहावत को झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे की लक्ष्मी ने पूरी तरह सच कर दिखाया है. मां बनने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य पर डटी रहीं. कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर लक्ष्मी ने राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा 2025 में प्रदेश स्तर पर 16वीं रैंक हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है.

लक्ष्मी की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनका सफर आसान नहीं था. वर्ष 2018 में विवाह के बाद भी उन्होंने अपने सपनों को पीछे नहीं छोड़ा और पढ़ाई जारी रखी. शादी के बाद नई जिम्मेदारियां, सामाजिक अपेक्षाएं और पारिवारिक दायित्व उनके सामने थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. पढ़ाई के प्रति उनकी लगन और लक्ष्य के प्रति स्पष्टता ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. मां बनने के बाद लक्ष्मी की जिम्मेदारियां और अधिक बढ़ गईं.

बच्चे की देखभाल, घर-परिवार की जिम्मेदारियां और सामाजिक दायित्वों के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था. लक्ष्मी ने बताया कि कई बार रास्ता कठिन लगा और थकान भी महसूस हुई, लेकिन अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने दिया. सीमित समय का सही उपयोग और निरंतर अभ्यास ने उन्हें इस कठिन दौर से बाहर निकाला. लक्ष्मी बताती हैं कि इस पूरे सफर में परिवार का सहयोग उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना.
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पति, माता-पिता और ससुराल पक्ष का सहयोग उन्हें मानसिक संबल देता रहा. उन्होंने कहा कि जब भी मन डगमगाया, परिवार और गुरुजनों की सलाह ने उन्हें फिर से रास्ते पर ला खड़ा किया. ईश्वर में आस्था और खुद पर भरोसे ने हर मुश्किल को आसान बना दिया. लक्ष्मी का मानना है कि मां बनना किसी भी महिला की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है.

मातृत्व ने उन्हें और अधिक धैर्यवान, जिम्मेदार और मानसिक रूप से मजबूत बनाया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक महिला अपने परिवार और सपनों दोनों को एक साथ संभाल सकती है, बस जरूरत है सही सोच, समर्थन और निरंतर प्रयास की. अपनी सफलता पर लक्ष्मी ने कहा कि यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं की जीत है जो जिम्मेदारियों के बावजूद आगे बढ़ने का सपना देखती हैं.

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पति कुणाल कुल्हार, पिता जितेंद्र सिंह जो व्याख्याता हैं, मां सुदेश, ससुर हरीश कुल्हार, परिवारजनों और मार्गदर्शकों को दिया. लक्ष्मी ने युवाओं और खासकर लड़कियों को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है.
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December 20, 2025, 15:16 IST
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जज बनने का जज्बा!मां बनने के बाद भी RJS में टॉप,चिड़ावा की लक्ष्मी बनी प्रेरणा



