सालावास की 100 साल मजबूत दरी | Salawas Rugs Handloom Art

Last Updated:December 11, 2025, 13:14 IST
Salawas Rugs Handloom Art: जोधपुर-पाली रोड पर स्थित सालावास की दरियाँ अपनी 100 साल तक न फटने वाली मजबूती और हाथों की कारीगरी के लिए प्रसिद्ध हैं. भोबारिया परिवार की 7 पीढ़ियाँ इस 700 साल पुरानी हस्तशिल्प विरासत को संभाल रही हैं. हाथों से बुनी गई इन दरियों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग है और इन्हें बनाने में महीनों लग सकते हैं.
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पाली. दरी का जब भी नाम आता है तो सबसे पहले याद आता है जोधपुर और पाली रोड के बीच वह सालावास, जिसकी दरियाँ केवल देश में नहीं बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान रखती हैं. इन दरियों की खास बात यह है कि ये 100 सालों तक खराब या फटती नहीं हैं, यही वजह है कि विदेश से आने वाले सैलानी भी इसे खूब पसंद करते हैं. जोधपुर और पाली रोड पर ABI क्राफ्ट सालावास दरी उद्योग स्थित है.
इस दरी उद्योग को देश-विदेश में एक विशेष पहचान देने का काम दिनेश भोबारिया के पुर्वजों ने किया, जिसको आज वह आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं. 7 पीढ़ियों से इस काम को संभाल रहे सुरेन्द्र भोबारिया बताते हैं कि यह दरी इतनी टिकाऊ है कि इसको आप पीढ़ी दर पीढ़ी भी इस्तेमाल करते रहेंगे तब भी यह फटेगा या कटेगा नहीं.
हाथों की बारीकी और समय की कसौटीयह दरी पूरी तरह से हाथों से तैयार की जाती है. इसमें कम से कम डिजाइन हो तो भी घंटों का समय लगता है और अगर कोई खास डिजाइन हो तो इसे बनाने में महीनों का समय भी लग जाता है. दरी बनाने वाले सुरेन्द्र कहते हैं कि यह हमारा पुश्तैनी काम है, इसलिए इसको छोड़कर हम विदेशों में नौकरियाँ करने नहीं गए.
पुश्तैनी सीख: उन्होंने बताया कि दादा के पास बैठकर वे इस हुनर को सीखते थे और एक-एक चीज को बारिकी से करने की सीख उन्होंने दी.
मशीनों को चुनौती: कारीगरों का कहना है कि हाथों की यह कला आज भी मशीनों को चुनौती देती है, क्योंकि इसमें ऐसी क्वॉलिटी है कि दोनों तरफ से एक जैसी डिजाइन को देखा जा सकता है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानसालावास की दरियों की खासियत उनके प्राकृतिक धागों (कपास, ऊन, जूट), हथकरघे पर हाथों से बुनाई, मजबूती, पलटने योग्य डिज़ाइन और 700 साल पुरानी विरासत में है, जो उन्हें टिकाऊ, सुंदर और अद्वितीय बनाती है. यही कारण है कि यह हस्तकला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है और राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है.
Location :
Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
December 11, 2025, 13:13 IST
हाथों की मेहनत और पीढ़ियों की विरासत: 100 साल चलती है सालावास की दरी!



