यहां इस खास पत्थर को तराशकर बनाई जाती हैं सुंदर मूर्तियां, विदेशों तक है डिमांड, कीमत लाखों तक

अंकित राजपूत /जयपुर: पत्थर को कई दिनों तक तराशकर उसे एक मूरत की आकृति देकर उसे पूज्यनीय बनाने का काम हमारे समाज में कई वर्षों से चलता आ रहा हैं. भगवान की मूर्ति मंदिर में और महापुरुषों की मूर्ति चौराहा और स्मारकों पर प्रेरणा और उनके अतुल्यनीय योगदान के लिए लगाई जाती हैं. मूर्ति व्यापार पत्थर और शिल्पकार पर सबसे ज्यादा निर्भर होता है. जयपुर के दिल्ली रोड़ पर स्थित आमेर क्षेत्र में 20 सालों से भी अधिक समय से यहां शिल्पकार पत्थर की मूर्तियों ताराश रहे हैं. यहां मूर्ति व्यापार का बड़ा उद्योग का संचालन होता है. पूरी दुनिया में यहां की मूर्तियों की डिमांड रहती है.
यहां के शिल्पकारों के हाथों में पत्थर को तराशने का जादू
दिल्ली रोड़ स्थित मूर्ति उद्योग में सबसे बड़ी भूमिका शिल्पकारों की होती है. ये शिल्पकार मार्बल के 5 प्रकार के पत्थर कैरारा, स्टैच्यूरी, कैलाकट्टा, एम्परडोर और क्रेमा मार्फिल से पत्थर को सुंदर मूर्तियों में बदल देते हैं. यह मार्बल अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों से मकराना, अलवर, राजसमंद आदि स्थानों से प्राप्त होता हैं यहां के चमकीले पत्थर से मूर्तिकार पत्थर को तराश कर मूर्तियां का रूप देते हैं. एक बड़ी मूर्ति को बनाने में महिने भर का समय लगता हैं. साथ ही उसकी फिनिशिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है जिससे मूर्ति अद्भुत सुंदर बनती है.
यहां की मूर्तियों कि डिमांड विदेशों में भी
जयपुर की ज्वैलरी और मूर्तियां पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखती हैं. दिल्ली रोड़ पर स्थित मूर्ति उद्योग की मूर्तियों की डिमांड पुरी दुनिया में रहती हैं. यहां मूर्तियों की किमत 150 से लेकर लाखों रूपए तक हैं. स्पेशल ऑडर देकर यहां विदेशों में खूब मूर्तियां मंगवाईं जाती हैं. यहां मूर्तियां बनवाने के लिए महीनों पहले ऑडर दिया जाता हैं तब मूर्तियां यहां मिलती हैं.
भगवान से लेकर महापुरुषों की मूर्तियां यहां है फेमस
यहां सभी भगवान की मूर्तियों के साथ महापुरुषों की मूर्तियां भी बनाई जाती है. जिनमें प्रमुख रूप से महात्मा गांधी, भगतसिंह, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे महान पुरूषों और क्रांतिकारी योद्धाओं की मूर्तियां विशेष रूप से बनाई जाती हैं.
यहां के शिल्पकारों की दुकानभर में अलग पहचान
एक मूर्ति को बनाने में शिल्पकार अपना पूरा समय लगता है. वह दिन-रात की चिंता किए बिना मूर्तियों को तरासने में लगा रहता है. यहां के कई शिल्पकार हैं जिनका जीवन मूर्तियां बनाने में गुजर गया. मूर्ति उद्योग से ही शिल्पकार लाखों रूपए कमाते हैं. साथ ही इनके हाथ के इस हुनर की पहचान दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां के मूर्तिकार कभी खाली नहीं रहते इनके पास आगे से आगे मूर्तियों के ऑर्डर की लाइन लगी रहती हैं पूरे साल भर यहां मूर्तियां बनाने का काम चलता हैं.
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FIRST PUBLISHED : September 10, 2023, 18:24 IST