कड़े में बसता है राजस्थानी पुरूषों का स्वाभिमान, जानें क्यों मानते हैं परंपरा, ताकत और संस्कृति का प्रतीक

Last Updated:December 13, 2025, 06:46 IST
राजस्थान की पुरुष परंपराओं में कड़ा सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि शौर्य, सम्मान और विरासत का प्रतीक है. राजपूत, जाट और गुर्जर समुदायों में इसे ताकत और पुरुषत्व का चिन्ह माना जाता है. पहले यह आत्मरक्षा और सुरक्षा के लिए भी उपयोग होता था, जबकि आज यह परंपरा और पहचान का हिस्सा बना हुआ है. चांदी और सोने से बने कड़े आज भी विवाह, त्यौहार और धार्मिक अवसरों पर शुभ माने जाते हैं.
राजस्थान की संस्कृति अपने शौर्य, परंपराओं और अनूठे आभूषणों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां के राजपूत, जाट, गुर्जर और विभिन्न समुदायों के पुरुष न केवल पहनावे से, बल्कि अपने आभूषणों से भी अपनी पहचान और इतिहास को संजोए रखते हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख आभूषण है कड़ा, जो केवल हाथ में पहनने वाला एक गहना नहीं, बल्कि गौरव, सामर्थ्य और विरासत का प्रतीक है.

कड़ा आमतौर पर चांदी या सोने का बना होता है और इसका आकार मोटा, मजबूत और भारी होता है. यह मजबूती राजस्थान के पुरुषों की बहादुरी और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाती है. पहले के समय में कड़ा सिर्फ सजावट के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और आत्मरक्षा के रूप में भी इस्तेमाल होता था. कई समुदायों में कड़ा पहनना पुरुषों की वयस्कता और जिम्मेदारी का संकेत माना जाता था.

राजस्थानी पुरुषों के लिए कड़ा केवल एक ज़ेवर नहीं बल्कि उनकी पहचान का अभिन्न हिस्सा है. ऐसा कहा जाता है कि यह पराक्रम और शौर्य का प्रतीक माना जाता है. विवाह, त्यौहार और धार्मिक अवसरों पर कड़ा पहनना शुभ माना जाता है. गांवों में आज भी बुजुर्ग पुरुष इसे अपने पारंपरिक पहनावे के साथ हर समय पहने रहते हैं. राजपूत समुदाय में कड़ा सम्मान का प्रतीक है, जबकि जाट और गुर्जर समुदाय में यह पुरुषों की मजबूती और मेहनतकश जीवनशैली को दर्शाता है.
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राजस्थानी कड़े का डिज़ाइन सरल होते हुए भी बहुत भव्य दिखाई देता है. यह मोटा, गोलाकार और ठोस होता है. स्थानीय कारीगर बताते हैं कि कुछ कड़े साधारण होते हैं, जबकि कुछ पर हल्की नक्काशी या जातीय प्रतीकों की डिजाइन भी उकेरी जाती है. चांदी के कड़े गांवों में लोकप्रिय हैं, क्योंकि वे मजबूत होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी माने जाते हैं. खास मौकों पर सोने का कड़ा पहनना प्रतिष्ठा और समृद्धि दर्शाता है.

पहले कड़े का उपयोग दैनिक जीवन का हिस्सा था, आज यह परंपरा और फैशन दोनों में अपनी जगह बनाए हुए है. शादी-विवाह में दूल्हे को कड़ा पहनाया जाना अब भी शुभ माना जाता है. राजस्थान का पारंपरिक साफा, अंगरखा और धोती पहनकर जब पुरुष कड़ा धारण करते हैं, तो उनमें पूरी राजस्थानी संस्कृति की झलक देती है.

युवा पीढ़ी भी अब चांदी और स्टील के मॉडर्न डिज़ाइन वाले कड़े पहनने लगी है, जो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम है. यह पुरुषों की ताकत, सम्मान और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाता है. समय बदल गया, डिज़ाइन बदले, पर कड़े की पहचान और महत्व आज भी उतना ही मजबूत है जितना पहले था. और यही इसे राजस्थान की विरासत का अनमोल हिस्सा बनाता है.
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December 13, 2025, 06:46 IST
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कड़े में बसता है राजस्थानी पुरूषों का स्वाभिमान, पहचान आज भी है कायम



