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Sheetala Ashtami: जानिए क्यों मनाया जाता है शीतला अष्टमी का त्योहार, यहां जानें वजह मिट्टी के बर्तन में रबड़ी का भोग

Last Updated:March 20, 2025, 10:58 IST

Sheetala Ashtami: राजधानी जयपुर से 40 किलोमीटर दूर चाकसू कस्बे में शीतला माता का 500 साल पुराना मंदिर मौजूद है. इस मंदिर की बनावट प्राचीन समय की है. शीतला माता को जयपुर की कुलदेवी कहा जाता है. इस देवी को पूरी स…और पढ़ेंX
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माता चिकन पॉक्स जैसी बीमारियों को करती है ठीक

राजस्थान में शीतला अष्टमी के दिन माता की पूजा के दौरान बासी खाने का भोग लगाया जाता है. शीतला माता को बासी खाने का भोग लगाने के कारण इस दिन को बास्योड़ा भी कहा जाता है. खास बात ये है कि पूजा खत्म होने के पहले माता की मूर्ति या प्रतिमा पर ठंडी रबड़ी गिराई जाती है. लेकिन क्या आपको पता है कि ऐसा क्यों होता है. आखिर इस देवी को ठंडे पकवानों का ही क्यों भोग लगता है, यह परंपरा एक किंवदंती सी जुड़ी हुई है.

लोकमान्यताओं के अनुसार पार्वती देवी पृथ्वी का भ्रमण कर रही थी. इस दौरान जब वे चाकसू कस्बे में पहुंची तो एक व्यक्ति ने भूलवस उन पर चावल का मांड गिरा दिया. इससे देवी पार्वती का शरीर जलने लगा. तभी एक कुम्हार जाति की महिला उन्हें अपने घर लेकर गई. उनके शरीर को जलन से राहत देने के लिए ठंडी रबड़ी उनके शरीर पर लगाई, कुछ देर में ही देवी पार्वती के शरीर की जलन खत्म हो गई.

त्योहार के पीछे की यह कहानी  इसके बाद जब माता पार्वती ने उसे महिला से कुछ खाने के लिए मंगाया तो उस महिला के पास उस दिन का बनाया कुछ नहीं था. उन्होंने एक दिन पुराना खाना देवी पार्वती को खिलाया. देवी पार्वती ने उस महिला के हाथ से बनाया बासी खाना खाकर बहुत प्रसन्न हुई तब उन्होंने कहा कि आज से यह दिन शीतला अष्टमी के रूप में पूजा जाएगा. इस दिन कुम्हार जाति के मटके से बनाई गई ठंडी रबड़ी का जो भी मुझे भोग लगाएगा उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होगी और उसके घर में कोई बीमारियां नहीं आएंगी.

चिकन पॉक्स जैसी बीमारियों को माता करती है ठीकलोगों की आस्था के अनुसार शीतला माता अपनी भक्तों की बीमारियों से रक्षा करती है. जो भक्त इस माता की पूजा आराधना करता है उसे चेचक, खसरा, बड़ी माता और छोटी माता (चिकन पॉक्स) जैसी बीमारियां नहीं होती और अगर हो भी जाए तो माता के मंदिर में फेरी लगाने के बाद जल्दी ही छुटकारा मिलता है. इसलिए शारीरिक बीमारियों से बचने के लिए साल में एक बार शीतला अष्टमी पर शीतला माता की पूजा की जाती है. इस समय इस देवी को एक दिन पुराने ठंडे पकवानों का भोग लगाया जाता है.

चाकसू में मौजूद है प्रसिद्ध मंदिर राजधानी जयपुर से 40 किलोमीटर दूर चाकसू कस्बे में शीतला माता का 500 साल पुराना मंदिर मौजूद है. इस मंदिर की बनावट प्राचीन समय की है. शीतला माता को जयपुर की कुलदेवी कहा जाता है. इस देवी को पूरी साल ठंडे पकवानों का ही भोग लगता है. बास्योड़ा के त्यौहार पर इसी देवी की पूजा की जाती है. इस दिन यहां पर विशाल मेले का भी आयोजन होता है. स्थानीय लोगों के अनुसार चाकसू के राजा के बेटे को जब शीतला माता ने चेचक रोग से राहत दी तब उसने यह मंदिर बनवाया था, अब अब पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है.

Location :

Jaipur,Rajasthan

First Published :

March 20, 2025, 10:58 IST

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जानिए क्यों मनाया जाता है शीतला अष्टमी का त्योहार, यहां जानें भोगा के बारे में

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