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Last Updated:December 08, 2025, 10:29 IST
Sikar Hanuman Mandir: सीकर का चमत्कारी हनुमान मंदिर अपनी अद्भुत आस्था, अनोखे चमत्कारों और नाम के पीछे छिपी रहस्यमयी कहानी के लिए प्रसिद्ध है. यहां आने वाले भक्त बताते हैं कि मंदिर की शक्ति मन की हर समस्या का समाधान देती है. इतिहास, लोककथाओं और श्रद्धा का अनोखा संगम इसे राजस्थान का अत्यंत पावन स्थल बनाता है.
Hanuman Mandir in Sikar: भगवान हनुमान को संकट मोचक देवता के रूप में पूजा जाता है. हनुमान मंदिर की हमारी खास सीरीज में आज हम आपको सीकर शहर के प्रमुख पांच मंदिरों के बारे में बताएंगे. ये सभी हनुमान मंदिर भक्तों के लिए खास है. रोचक बात तो ये है कि भक्तों ने अपने भाव के अनुसार मंदिर के नाम रखे है. आइए जानते हैं सीकर शहर के प्रमुख पांच हनुमान मंदिर के बारे में….

1. देवीपुरा बालाजी: भगवान हनुमान का यह मंदिर सीकर शहर के बजरंग कांटे के पास मौजूद है. पहले यह जगह देवीपुरा गांव हुआ करती थी, ऐसे में लोगों ने गांव के नाम से ही बालाजी का नाम रख दिया. मंगलवार और शनिवार को यहां पर काफी श्रद्धालु आते हैं. यह मंदिर 450 साल से भी अधिक पुराना है. साल 2023 में इस मंदिर में बालाजी को 2700 किलो रोट का भोग लगाया गया था, जो अब तक सबसे बड़ा महाभोग था. इस महाभोग को बनाने के लिए जेसीबी और क्रेन की मदद ली गई थी. इसको लेकर गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी इस मंदिर का नाम दर्ज है.

2. बोलता बालाजी: सीकर शहर के बड़ा तालाब के पास बालाजी के मंदिर को बोलता बालाजी कहा जाता है. मान्यता है कि इस मूर्ति से आवाज आती थी, इसलिए इसका नाम बोलता बालाजी पड़ा, तब से यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि पहले मंदिर में जो भी कुछ मांगा जाता, तुरंत उसका असर होता था. हाथोंहाथ मांगी हुई मन्नत पूरी होती थी. इसलिए प्राकृतिक वातावरण के बीच बोलता बालाजी की काफी मान्यता है. भगवान हनुमान की यह मूर्ति करीब 95 साल पुरानी बताई जाती है, जो अकाल राहत के कार्य के दौरान माधव सागर तालाब की खुदाई करते समय निकली थी.
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3. पॉवर वाले बालाजी: यह मंदिर सीकर के पॉवर हाउस के पास स्थित है. बिजली डिपार्टमेंट के दफ्तर में बने इस बालाजी का नाम ही पॉवर यानि बिजली वाले बालाजी पड़ गया. यहां तैनात कुछ कर्मचारियों का मानना है कि जितने भी हादसे हुए हैं अभी तक बालाजी का आशीर्वाद से किसी को जान वाला नुकसान नहीं हुआ. इसलिए लोग बालाजी को काफी मानते है. इस मंदिर में बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूजा अर्चना करते हैं. वहीं, मंगलवार और शनिवार को आम लोग भी बालाजी की पूजा करने और मन्नत मांगने आते हैं.

4. फतेह बालाजी: यह मंदिर सीकर शहर की पुराना दूजोद गेट पर बना है. प्राचीन मंदिर के इतिहास को लेकर बालाजी का नाम पड़ा. ऐसा कहा जाता है कि जब भी किसी से लड़ने के लिए राजा गए तो उन्होंने जीत हासिल करने के लिए दरवाजे पर बने बालाजी के मंदिर की पूजा की थी. जिसके चलते कभी नहीं हारे. हमेशा जीत हासिल हुई. इसलिए बालाजी का नाम फतेह बालाजी रख दिया गया. भक्तों की मान्यता है जो भी भक्त इस मंदिर में आकरअरदास करता है वह पूरी हो जाती है. इस मंदिर में भर्ती परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी अधिक आते हैं.<br />.

5. झंडे वाले बालाजी: यहां बालाजी के झंडों की कोई कमी नहीं है. इसलिए कवरपुरा रोड वाले बालाजी को झंडे वाले बालाजी के नाम से श्रद्धालु पुकारते है. लोगों का कहना है कि यही वो ऐसे नामों के चलते ही बालाजी के मंदिर की अलग-अलग पहचान है. मान्यता है कि भक्तों की मनोकामना पूरी होने पर भक्त इस मंदिर में भगवान हनुमान का झंडा और नारियल मंदिर में भेट करते हैं.
First Published :
December 08, 2025, 10:29 IST
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सीकर का चमत्कारी हनुमान मंदिर: वो रहस्य जिसे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान!



