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Last Updated:November 09, 2025, 19:40 IST
Sikar SK Hospital: सीकर के एसके अस्पताल में अब मरीजों को लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा. अस्पताल प्रशासन ने नया क्यू मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया है. इससे मरीजों को टोकन के जरिए क्रमवार सेवा मिलेगी और डॉक्टरों की उपलब्धता की जानकारी पहले ही मिल जाएगी. यह सिस्टम स्वास्थ्य सेवाओं को और सुचारू बनाएगा.
सीकर. शेखावाटी क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी एसके अस्पताल में मरीजों के लिए नई सुविधा शुरू होने वाली है. इस नई सुविधा के बाद यहां आने वाले मरीजों और परिजनों को ईलाज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. नई सुविधा के तहत एसके अस्पताल में क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने वाला है. यह अस्पताल में यह सुविधा दिसंबर से शुरू होगी. इस नई सुवधा के शुरू होने के बाद मरीजों को डॉक्टर से परामर्श के लिए कतार में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा. वे बस क्यूआर कोड स्कैन करके पर्ची निकाल सकेंगे और स्क्रीन पर अपने वेटिंग नंबर को देख पाएंगे.

क्यू मैनेजमेंट सिस्टम में जिस डॉक्टर का आउटडोर होगा, उसका नाम भी डिस्प्ले स्क्रीन पर नजर आएगा. अस्पताल प्रशासन मरीजों की सुविधा के लिए ओपीडी के बाहर कुर्सियां भी लगाएगा, ताकि मरीज आराम से अपनी बारी का इंतजार कर सकें. अस्पताल के अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि जयपुर के कांवटिया अस्पताल में इस क्यू मैनेजमेंट सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है. वहां इसकी सफलता को देखते हुए अब इसे एसके और जनाना अस्पताल में भी लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

उन्होंने बताया कि इस नए सिस्टम के तहत सरकार का उद्देश्य अस्पतालों में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को कम करना है. इस नई प्रणाली के तहत मरीजों की पंजीकरण प्रक्रिया डिजिटल रूप में होगी और उन्हें टोकन आधारित नंबर दिया जाएगा. इससे डॉक्टरों को भी समय पर मरीज देखने में आसानी होगी और स्वास्थ्य सेवाओं का वे बिना परेशानी के लाभ उठा सकेंगे. क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद मरीजों को रजिस्ट्रेशन, जांच केंद्र और निशुल्क दवा काउंटर का टोकन नंबर ऑनलाइन मिल जाएगा.

यह टोकन नंबर एलईडी स्क्रीन पर दिखाई जाएगी, जिससे मरीजों को यह पता चलता रहेगा कि उनकी बारी कब आने वाली है. जिस डॉक्टर के पास उन्हें परामर्श लेना है, उसका नाम और ओपीडी कक्ष की जानकारी भी डिस्प्ले पर देखी जा सकेगी. इस नई व्यवस्था से अस्पताल में लंबी कतारों की समस्या समाप्त हो जाएगी. मरीज अब अपनी बारी का इंतजार आराम से बैठकर कर सकेंगे और उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी. कांवटिया अस्पताल के पायलट प्रोजेक्ट के बाद डॉक्टरों और मरीजों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं.

इनमें सबसे प्रमुख सुझाव यह है कि मरीजों के पंजीकरण पर्चे में मल्टीपल डिपार्टमेंट का विकल्प जोड़ा जाए. उदाहरण के तौर पर, कोई मरीज अगर शुगर, हार्ट और न्यूरो से संबंधित बीमारियों से एक साथ पीड़ित है, तो उसे अलग-अलग विभागों की तीन पर्चियां बनवानी पड़ती हैं. इस कारण मरीजों का समय और धन दोनों व्यर्थ होते हैं. अगर एक ही पर्ची में तीनों विभागों का विकल्प उपलब्ध हो जाए, तो इससे मरीजों को बहुत सुविधा मिलेगी और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी और बेहतर हो जाएगी.

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि क्यूआर कोड लगाने का काम पूरा हो चुका है और अब सिस्टम से संबंधित बाकी आवश्यक उपकरणों के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है. जैसे ही उपकरण मिल जाएंगे, नई व्यवस्था को पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा. ओपीडी के बाहर बड़े आकार की एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी, जिन पर मरीजों के टोकन नंबर क्रमवार प्रदर्शित होंगे. इस व्यवस्था से अस्पताल में होने वाली भीड़ नियंत्रित रहेगी और स्टाफ को भी मरीजों को बार-बार दिशा बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत आभा एप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी दी जाएगी. मरीज अपनी आभा आईडी या जन आधार नंबर डालकर बुकिंग कर सकेंगे. इसके बाद उन्हें टोकन नंबर मिलेगा जो ओपीडी, डायग्नोसिस केंद्र और निशुल्क दवा काउंटर की एलईडी स्क्रीन पर भी प्रदर्शित होगा. यह प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होगी जिससे किसी तरह की गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी. यह कदम अस्पतालों को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित होगा.
First Published :
November 09, 2025, 19:40 IST
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सीकर SK हॉस्पिटल में टेक्नोलॉजी का कमाल, अब जानकारी मिलेगी पहले स्क्रीन पर



