नागौर का दक्षिण मुखी गजानंद मंदिर: स्थापत्य कला का अद्वितीय उदाहरण.

Last Updated:May 04, 2025, 19:26 IST
Nagaur Temple: नागौर के मुन्दियाड़ गांव में 60 खंभों पर बना दक्षिण मुखी गजानंद मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है. यह मंदिर छीतर पत्थर से बना है और इसमें राजपूताना शैली की सूक्ष्म कारीगरी है.X

Nagaur Mandir
हाइलाइट्स
नागौर के मुन्दियाड़ गांव में 60 खंभों पर बना मंदिर.मंदिर में सीमेंट और बजरी का उपयोग नहीं हुआ.मंदिर में राजपूताना शैली की बारीक कारीगरी है.
नागौर: वर्तमान समय में नागौर में विभिन्न प्रकार की स्थापत्य कला के मंदिर बनाए जा रहे हैं, जिनमें जैन शैली, द्रविड़ शैली और राजपूताना शैली शामिल हैं. नागौर के मुन्दियाड़ गांव में दक्षिण मुखी भव्य मंदिर बना है. यह मंदिर 60 खंभों पर बनाया गया है और इसमें छीतर का पत्थर लगा हुआ है, जो जोधपुर में निकलता है और बलुआ रंग का होता है.
इस मंदिर में जगह-जगह राजपूताना शैली की बारीक कारीगरी देखने को मिलती है. मंदिर को पत्थर जोड़कर बनाया गया है, जिसमें सीमेंट और बजरी का उपयोग नहीं किया गया है. पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे का प्रयोग किया गया है. इस मंदिर की पत्थरों पर बेहद बारीक चित्रकारी की गई है.
क्या है चित्रकारीमदन गिरी बताते हैं कि मंदिर में पत्थरों और खंभों पर कई तरह की डिजाइन बनी हुई हैं, जिनमें फूल, पत्ते, देवी-देवताओं के चित्र और विभिन्न प्रकार की त्रिकोणीय संरचनाएं शामिल हैं. यह मंदिर दक्षिणमुखी है. अमरसिंह राठौड़ के सेनापति गिरधर व्यास अपने कंधे पर मूर्ति लेकर आए और मुन्दियाड़ में रख दी, लेकिन मूर्ति वहां से उठाई नहीं जा सकी, इसलिए उसी स्थान पर मंदिर की स्थापना करनी पड़ी.
नागौर जिले का पहला मंदिरदक्षिण मुखी गजानंदजी मंदिर में उनके वाहन मूषक की भी प्रतिमा है. कहते हैं कि यहां जो भी सच्चे मन से मूषक के कान में अपनी मनोकामना कहता है, वह पूरी होती है. पुजारी प्रभु गिरि बताते हैं कि मंदिर में ऊं या स्वास्तिक का चिह्न बनाने से भी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. दक्षिण मुखी गजानंदजी मंदिर का जीर्णोद्धार होगा. यह नागौर जिले का पहला मंदिर है, जिसे 60 खंभों पर बनाया गया है और इसे राजस्थानी कलाकृति से सजाया गया है. मंदिर की दीवारों पर बेल फूल के साथ अन्य देवी-देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियां भी बनाई गई हैं.
Location :
Nagaur,Rajasthan
homerajasthan
Rajasthan News: ना लगी सीमेंट ना लगी बजरी, 60 खम्भों पर बना ये मंदिर



