यूट्यूब पर वीडियो देख शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, नुकसान के बाद अपनाई यह खास तकनीक, अब लाखों में हो रही कमाई

Last Updated:December 30, 2025, 08:29 IST
Sikar Farmer Success Story: सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र के युवा किसान पंकज सैनी ने आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की. हैदराबाद और गुजरात से पौधे मंगाकर उन्होंने 150×85 फीट क्षेत्र में पहला उद्यान तैयार किया. लोहे के पिलर और ट्रेली सिस्टम के माध्यम से पौधों की बढ़वार और उत्पादन बेहतर हुआ. ड्रिप सिंचाई और जैविक दवाइयों से फसल सुरक्षित रही. अब पंकज सालाना लाखों रुपए कमा रहे हैं और क्षेत्र के अन्य किसान भी इस नई तकनीक की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र के छावनी के युवा किसान पंकज सैनी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं. ये क्षेत्र के पहले किसान हैं जिन्होंने ड्रैगन फ्रूट उद्यान तैयार किया है. पंकज ने कम पानी में अधिक मुनाफे की संभावना को देखते हुए इसकी खेती शुरू की थी. उनका यह प्रयोग अब पूरी तरह सफल साबित हो रहा है. ड्रैगन फ्रूट की खेती से उन्हें अच्छी आमदनी मिल रही है और क्षेत्र के अन्य किसान भी इस नई तकनीक की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

उन्नत किसान पंकज सैनी के पिता असर सिंह सैनी सेवानिवृत्त शिक्षक हैं. पंकज ने बताया कि उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती का विचार यूट्यूब से आया था. एक बार वे खेती के वीडियो देख रहे थे तभी अचानक ड्रैगन फ्रूट की खेती का वीडियो देखा और इसमें रुचि हो गई. इसके बाद उन्होंने घर वालों से चर्चा की तो सभी ने इसमें दिलचस्पी दिखाई. पंकज ने आधुनिक तकनीक का उपयोग कर यह खेती शुरू की और अब यह प्रयोग सफल साबित हो रहा है. उनके इस कदम से क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं.

पंकज ने हैदराबाद से 500 और गुजरात से 1300 पौधे मंगवाए. वर्ष 2022 में कुल 1700 से 1800 पौधे हवाई मार्ग से जयपुर लाए गए. एक पौधे की कीमत करीब 85 रुपए पड़ी. ड्रैगन फ्रूट उद्यान तैयार करने में पंकज को करीब 3 से साढ़े 3 लाख रुपए की शुरुआती लागत आई. उन्होंने पौधों के लिए लोहे के पिलर, ट्रेली सिस्टम और अन्य व्यवस्थाएं भी की. उन्होंने 150 गुणा 85 फीट क्षेत्र में पहली बार ड्रेगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की.
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पौधों को लोहे के पिलरों के सहारे ट्रेली सिस्टम पर विकसित किया गया, जिससे पौधों की बढ़वार और उत्पादन बेहतर हुआ. उन्होंने बताया कि इस फसल में सात दिन में एक बार ही सिंचाई की आवश्यकता होती है, जिससे पानी की खपत काफी कम रहती है. पंकज सैनी के अनुसार, एलोवेरा जैसे दिखने वाले कांटेदार ड्रैगन फ्रूट के पौधे से औसतन चार किलो फल का उत्पादन हो रहा है.फल खरीदने के लिए व्यापारी खुद खेत पर पहुंच जाते हैं.

उन्नत किसान पंकज ने बताया कि, अभी ड्रेगन फ्रूट के एक फल का औसत मूल्य करीब 130 रुपए मिल रहा है. बाजार में यही फल लगभग दोगुने दाम तक बिकता है. उन्होंने बताया कि वे खेती में फंगस से बचाव के लिए ट्राइकोडरमा, कल्चर और अन्य जैविक दवाइयों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उत्पादन सुरक्षित बना हुआ है. इसके अलावा सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग करते हैं.

शुरुआत में जानकारी के अभाव में 15 से 20 पौधे खराब हो गए थे और परिवार में भी शंका थी, लेकिन पंकज का हौसला नहीं टूटा. आज उनकी सफलता देखकर परिवार पूरा सहयोग कर रहा है. पंकज अब खुद पौधे तैयार कर रहे हैं और जिलेभर के किसान उनसे संपर्क कर रहे हैं. वे अब इसकी खेती कर सालाना लाखों रुपए की कमाई भी कर रहे हैं. उद्यान विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि ड्रैगन फ्रूट की खेती जिले के लिए एक अच्छा नवाचार है और बूंद-बूंद सिंचाई योजना के तहत किसान इसमें लाभ ले सकते है.
First Published :
December 30, 2025, 08:29 IST
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किसान ने यूट्यूब से सीखी ड्रैगन फ्रूट खेती, अपनाई यह तकनीक, अब लाखों में कमाई



