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हैदराबाद के तीन पुलों की कहानी: 400 साल पुराना इतिहास, भीषण बाढ़ और शहर की प्रगति का संगम

Last Updated:October 25, 2025, 16:49 IST

Hyderabad News Hindi : हैदराबाद के मूसी नदी पर बने तीन पुल शहर के इतिहास और विकास के साक्षी हैं. पुराना पुल कुतुब शाही काल का प्रतीक, नया पुल निजाम के जमाने की प्रगति और नासिक पुल आधुनिक हैदराबाद की आधुनिकता को दर्शाते हैं. इन पुलों ने यातायात, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत में अहम योगदान दिया है.

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हैदराबाद : हैदराबाद के इतिहास और विकास में मूसी नदी पर बने इन पुलों का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है. ये पुल न केवल शहर में यातायात के लिए आवश्यक साधन हैं, बल्कि हैदराबाद की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत के जीवंत प्रतीक भी हैं. पुराना पुल कुतुब शाही काल का गौरवशाली उदाहरण है, जो उस समय की स्थापत्य कला, निर्माण तकनीक और जीवन शैली की झलक देता है. यह पुल शहर के पुराने हिस्सों को जोड़ता है और इतिहास की एक जीवंत यादगार के रूप में आज भी खड़ा है. नया पुल, जो निजाम के शासनकाल में बनाया गया, उस समय की तकनीकी प्रगति और प्रशासनिक दृष्टि का प्रतीक है.

यह पुल आधुनिक सुविधाओं के साथ शहर के बढ़ते शहरीकरण को दर्शाता है. वहीं नासिक पुल आधुनिक हैदराबाद के विकास और आधुनिक जीवनशैली का प्रतीक है. यह शहर के नए हिस्सों को जोड़ता है और यातायात की सुविधा के साथ-साथ शहर के तेजी से बदलते चेहरे की कहानी कहता है. इन तीनों पुलों ने हैदराबाद के विकास में अहम भूमिका निभाई है और आज भी शहर के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आधुनिक दृष्टिकोण को एक साथ दर्शाते हैं. इन पुलों के माध्यम से हैदराबाद की समृद्ध विरासत और आधुनिक प्रगति का अद्वितीय मिश्रण देखने को मिलता है.

1. पुराना पुल (देरानी पुल)यह हैदराबाद का सबसे पुराना और सबसे प्रसिद्ध पुल है. इसका निर्माण 1578 ईस्वी में इब्राहिम कुली कुतुब शाह के शासनकाल में हुआ था. यह पुल मूसी नदी पर बना पहला पत्थर का पुल था. इसने हैदराबाद (चारमीनार) को गोलकुंडा किले से जोड़ा जिससे शहर का विस्तार संभव हुआ. 1908 की भीषण बाढ़ में यह पुल पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी. बाढ़ के बाद इसे फिर से बनाया गया. यह पुल हैदराबाद के 400 साल से भी अधिक पुराने इतिहास का मूक गवाह हैं.

2. नया पुल (मुसी पुल)यह पुराने पुल के बाद बना दूसरा प्रमुख पुल है. इसका निर्माण वर्ष 1930 में हुआ था. हैदराबाद के बढ़ते यातायात को संभालने के लिए पुराने पुल के समानांतर इस नए पुल का निर्माण किया गया. इसके निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. यह पुल अफजल गंज और नारायणगुडा को जोड़ता है और आज भी हैदराबाद के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है. यह निजाम के जमाने की इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.

3. नासिक पुल (छत्रपति शिवाजी महाराज पुल)यह तीसरा प्रमुख पुल है जो अपने स्थापत्य के लिए जाना जाता है. इसका निर्माण वर्ष 1965 में हुआ था. हैदराबाद शहर के और विस्तार और यातायात की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इस पुल का निर्माण किया गया. इसका आधिकारिक नाम छत्रपति शिवाजी महाराज पुल है, लेकिन इसे नासिक पुल के नाम से ही जाना जाता है. यह पुल सिकंदराबाद (पुरानी हवाई अड्डा रोड) को मालकपेट और अन्य इलाकों से जोड़ता है. इसकी विशेष स्थापत्य शैली इसे दूसरे पुलों से अलग पहचान देती है.

1908 की भीषण बाढ़इन पुलों के इतिहास में एक काला अध्याय है. इन पुलों के इतिहास को समझने के लिए 1908 की बाढ़ को जानना जरूरी है. इन पुलों के इतिहास में एक काला अध्याय है 26 सितंबर 1908 को मूसी नदी में आई भीषण बाढ़ ने पुराने पुल को तबाह कर दिया और पूरे शहर में भारी तबाही मचाई. अनुमान है कि लगभग 15,000 लोगों की मौत हुई थी. इस तबाही के बाद तत्कालीन निजाम, मीर उस्मान अली खान ने शहर के पुनर्निर्माण की शुरुआत की. बाढ़ से सबक लेते हुए, शहर के नियोजन पर जोर दिया गया और नए बांध जैसे ओस्मान सागर और हिमायत सागर बनाए गए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न हो.

Rupesh Kumar Jaiswal

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन… और पढ़ें

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Hyderabad,Telangana

First Published :

October 25, 2025, 16:49 IST

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हैदराबाद के तीन पुलों की चौंकाने वाली कहानी: इतिहास, बाढ़ और शहर की प्रगति

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