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कहानी राजस्थान के गैंगस्टर्स की, शेखावाटी में तैयार हो रही बदमाशों की नई पलटन, गली-गली ढूंढ रही पुलिस

Last Updated:December 17, 2025, 13:29 IST

Jhunjhunu News : राजस्थान का शेखावाटी इलाका गैंगवार को लेकर बरसों से बदनाम रहा है. शेखावाटी के गांवों और ढाणियों से निकले ये अपराधी अपनी-अपनी गैंग बनाकर पूरे सूबे की पुलिस की नाक में दम कर चुके हैं. बीच में पुलिस ने इन गैंग्स पर मोटे तौर पर काबू पा लिया था. लेकिन अब एक बार फिर से यहां गैंगस्टर की नई पलटन तैयार होने लग गई है. कुख्यात गैंगस्टर राजू ठेहट सीकर का ही था. वहीं अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह माना जाने वाला गैंगस्टर आनंदपाल भी सीकर से सटे नागौर जिले का रहने वाला था. राजू ठेहट को गैंगवार में उसके घर पर ही गोलियों से भून दिया गया था. जबकि आनंदपाल को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था. इन दोनों नामों के अलावा और भी कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने शेखावाटी समेत पूरे राजस्थान में खौफ का माहौल बनाकर रखा. जानें अब कौनसी नई गैंग्स यहां पनप रही है. कहानी राजस्थान के गैंगस्टर्स की, शेखावाटी में तैयार हो रही बदमाशों की नई पलटनशेखावाटी मेें खड़े हो रहे नए गैंगस्टर क्रमश: रविन्द्र कटेवा, श्रवण भादवासी, मंदीप उर्फ मदिया, दीपक मालसरिया। सबसे अंत में गैंगवार में मारा गया डेनिस बावरिया (सिर पर तौलिया रखे हुए).

झुंझुनूं. राजस्थान की शेखावाटी को वीरों की भूमि माना जाता है. इस इलाके के सीकर, चूरू और झुंझुनूं तीनों जिलों से बड़ी संख्या में युवा सेना में अपने सेवाएं दे रहे हैं. यहां के युवाओं के लिए सेना में भर्ती होना सबसे बड़ा सपना होता है. लेकिन इसके विपरीत इसी सरजमीं पर कुछ ऐसे युवा भी हैं जो अपराध के दलदल में धंसे हुए हैं. छोटे-मोटे अपराधों से जुर्म की दुनिया में कदम रखने वाले इन युवाओं में से कई गैंगस्टर बन गए और अपनी-अपनी गैंग चलाने लगे. जमीनों पर कब्जा और कारोबारियों से रंगदारी वसूली इनका पेशा बन गया. पूरे इलाके में वर्चस्व की जंग में कई आपस में ही एक दूसरे की गोलियों के शिकार हो गए और कइयों को पुलिस ने मुठभेड़ में निपटा दिया. इनमें आनंदपाल और राजू ठेहट दो बड़े नाम रहे हैं. इनके अलावा दर्जनों ऐसे नाम हैं जो पुलिस की फाइलों को लगातार मोटा करते जा रहे हैं.

आज से करीब पांच सात साल पहले पुलिस ने काफी हद तक शेखावाटी में होने वाली गैंगवार पर काबू पा लिया था. पुलिस को लगा कि उसने गैंगस्टर्स का सफाया कर दिया लेकिन यह उसकी गलतफहमी थी. शेखावाटी के ये गैंगस्टर देश के कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और अन्य गैंगों के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर बड़े-बड़े अपराध करते रहे हैं. हत्या करना इनके बायें हाथ का खेल हो गया था. समय के साथ-साथ शेखावाटी में एक बार फिर से गैंगस्टर की नई पलटन तैयार हो रही है और गैंगवार की घटनाएं बढ़ती जा रही है. हाल ही में झुंझुनू्ं में हुई गैंगवार ने फिर से पुलिस के माथे पर बल डाल दिए हैं. वे पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं. इनमें झुंझुनूं की रविन्द्र कटेवा गैंग, श्रवण भादवासी गैंग, डेनिस बावरिया गैंग, मंदीप उर्फ मदिया गैंग और दीपक मालसरिया गैंग प्रमुख हैं. इनमें श्रवण भादवासी सीकर का रहने वाला है बाकी सभी झुंझुनूं जिले के हैं.

रविन्द्र कटेवा गैंग तेजी से बढ़ाई अपनी ताकतपुलिस के मुताबिक झुंझुनूं के नवलगढ़ इलाके के खिरोड़ गांव निवासी रविन्द्र कटेवा ने साल 2023 में अपनी गैंग बनाई और उसका नाम रखा आरके ग्रुप 0056. इलाके के युवाओं को लालच देकर अपने साथ जोड़ा और गैंग की ताकत बढ़ा ली. कटेवा गैंग मुख्य रूप से जमीनों पर कब्जे और इससे जुड़े अन्य विवादों में टांग फंसाकर नोट छापने लगी. इसके लिए चलते उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई. उसके खिलाफ करीब 20 केस दर्ज हैं. वह झुंझुनूं में हाल ही में हुई गैंगवार में शामिल था. इस गैंगवार के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. वह फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है. कटेवा पहले ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क से भी जुड़ा रहा है.

श्रवण भादवासी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनने लग गया हैकटेवा की खास दुश्मनी सीकर जिले के भादवासी निवासी श्रवण फगेड़िया उर्फ श्रवण भादवासी से है. श्रवण हार्डकोर अपराधी है. वह 1657 के नाम से अपनी गैंग चलाता है. हालांकि उसकी अभी तक हिस्ट्रीशीट नहीं खुली है लेकिन उसके खिलाफ भी क्रिमिनल केसेज की फेहरिस्त काफी लंबी है. वह भी इलाके में अपनी धाक जमाना चाहता है. लेकिन प्रतिद्वंदी गैंग ऐसा होने नहीं देना चाहती है. लिहाजा दोनों में आए दिन टकराव होता रहता है. झुंझुनूं के खिरोड़ में हाल ही में हुई गैंगवार श्रवण भादवासी और रविन्द्र कटेवा गैंग के बीच ही हुई थी. इसमें दोनों गैंग के एक-एक बदमाशों की मौत हो गई थी. पुलिस इस गैंगवार के बाद इनसे जुड़े बदमाशों की धरपकड़ में जुटी है. श्रवण भी अपराध की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है. वह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनने लग गया है. वह फिलहाल फरार है.

डेनिस को किडनैप कर उतार दिया था मौत के घाटझुंझुनूं में बीते दिनों छोटी दीवाली पर एक और बड़ी गैंगवार हुई थी. यह गैंगवार गैंगस्टर डेनिस बावरिया और मदिया गैंग में हुई थी. इस गैंगवार में मदिया गैंग ने डेनिस का अपहरण कर उसे मौत के घाट उतार दिया था. इसमें झुंझुनू जिले की एक और दीपक मालसरिया गैंग का नाम भी सामने आया था. डेनिस की भी हिस्ट्रीशीट खुली हुई थी. डेनिस के खिलाफ हत्या, मारपीट, धमकी और लूटपाट जैसे करीब 20 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे. डेनिस ने पहले इसी साल मार्च में चूरू रोड पर मदिया गैंग को पीटा था. उसके बाद मदिया गैंग ने छोटी दीवाली पर इसका बदला लिया और डेनिस को उठा ले गई. डेनिस का अपहरण करके भाग रहे बदमाशों की गाड़ी का रास्ते में एक्सीडेंट हो गया था. उसमें दो बदमाशों की मौत हो गई थी. लेकिन डेनिस उस गाड़ी में नहीं था. मदिया गैंग उसे मारपीट कर रास्ते में फेंक गई. बाद में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज के दौरान डेनिस की मौत हो गई.

पुलिस अब फिर से बना रही है मेगा प्लानझुंझुनूं पुलिस के लिए गले की फांस बने गैंगस्टर मंदीप उर्फ मदिया और दीपक मालसरिया अभी फरार है. मदिया झुंझुनूं के बिसाऊ थाने का हिस्ट्रीशीटर है. उसके खिलाफ करीब डेढ़ दर्जन केस दर्ज हैं. वहीं दीपक मालसरिया भी हार्डकोर क्रिमिनल है. वह झुंझुनूं के सदर थाना इलाके के मालसर गांव का रहने वाला है. उसके खिलाफ भी कई मामले दर्ज हैं. पुलिस इन दोनों गैंगस्टर्स की तलाश में जुटी है. इनके साथ ही श्रवण भादवासी की भी तलाश जारी है. पुलिस इनकी तलाश में गली-गली, कूंचे-कूंचे फिर रही है. ये सभी गैंगस्टर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं. अब पुलिस गैंगस्टर की इस नई पलटन की कमर तोड़ने के लिए मेगा प्लानिंग में जुटी हुई है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर…और पढ़ें

Location :

Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan

First Published :

December 17, 2025, 13:29 IST

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