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टुनटुन: हिंदी सिनेमा की पहली महिला कॉमेडियन का संघर्ष और सफलता

Last Updated:November 24, 2025, 04:01 IST

Death Anniversary: हिंदी सिनेमा में हंसी की दुनिया में एक नाम ऐसा है, जिसे याद करते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. उनका नाम है उमा देवी खत्री, यानी हमारी प्यारी टुनटुन. दर्द और संघर्ष से भरी जिंदगी जीने वाली टुनटुन ने अपनी कॉमेडी से करोड़ों लोगों को हंसाया और हिंदी फिल्मों में महिलाओं के लिए एक नया रास्ता खोल दिया.

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सिंगर से बनीं थीं एक्ट्रेस, दिलीप कुमार की फिल्म से किया डेब्यूएक्ट्रेस ने फैंस के दिलों पर खूब राज किया है.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में हंसी की बात हो और टुनटुन का नाम न आए, ऐसा होना मुश्किल है. असली नाम उमा देवी खत्री. लेकिन एक मजाक ने उन्हें हमेशा के लिए टुनटुन बना दिया. हुआ यूं कि फिल्म ‘बाबुल’ की शूटिंग के दौरान उमा देवी फिसलकर गिर पड़ीं. सेट पर मौजूद दिलीप कुमार ने मुस्कुराते हुए कहा. अरे कोई इस टुन-टुन को उठाओ. बस फिर क्या था. यही नाम उन्हें ऐसा जच गया कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री उन्हें टुनटुन के नाम से जानने लगी.

लेकिन टुनटुन बनने का सफर आसान नहीं था. उमा देवी का जन्म 11 जुलाई 1923 को यूपी के अमरोहा में हुआ. ढाई साल की थीं, जब जमीन के झगड़े में माता-पिता की हत्या हो गई. नौ साल की होते-होते भाई की भी हत्या कर दी गई. इस तरह छोटी उम्र में ही वह अनाथ हो गईं. रिश्तेदारों ने सहारा तो दिया, लेकिन नौकरानी जैसा बर्ताव किया. पढ़ाई का मौका नहीं मिला. दिल केवल संगीत में लगता था और रेडियो ही उनका साथी था.

सिंगर बनकर की थी शुरुआत

बहुत कम उम्र में अख्तर अब्बास काजी नाम के युवक ने उनकी गायकी सुनी और प्रभावित हुए. मगर बंटवारे के बाद वह पाकिस्तान चले गए. उधर, उमा देवी दिल्ली की तंग जिंदगी छोड़कर चुपचाप मुंबई चली आईं. यहां उनकी मुलाकात नौशाद से हुई. नौशाद उनकी आवाज और हिम्मत से इतने प्रभावित हुए कि फिल्म ‘दर्द’ में गाना दे दिया. 1947 में आया उनका गाना ‘अफसाना लिख रही हूं’ सुपरहिट हुआ और वह रातोंरात स्टार बन गईं. बाद में अख्तर अब्बास काजी मुंबई आकर उनसे शादी कर ली.

बढ़ा हुआ वजह ही बना था पहचान

शादी के बाद गायकी छूट गई और जब पैसे की दिक्कत आई, तो दोबारा काम की तलाश की. इस बार नौशाद ने उन्हें सलाह दी कि वह कॉमेडी करें. बढ़ा हुआ वजन और मजाकिया अंदाज उन्हें इस काम के लिए एकदम फिट बनाता था. उमा देवी ने शर्त रखी कि पहली फिल्म दिलीप कुमार के साथ ही करेंगी और ऐसा ही हुआ. 1992 में पति के निधन के बाद टुनटुन का मन फिल्मों से दूर होने लगा. और 24 नवंबर 2003 को वह दुनिया को अलविदा कह गईं. दर्द, संघर्ष और मुश्किलों से भरी जिंदगी के बावजूद उन्होंने करोड़ों लोगों को हंसाया और हिंदी सिनेमा में महिलाओं के लिए कॉमेडी का रास्ता खोल दिया.

कॉमेडी से रच दिया इतिहास

बता दें कि इसके बाद टुनटुन ने लगभग 200 फिल्मों में काम किया. ‘आर-पार’, ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’, ‘प्यासा’, ‘नमक हलाल’ जैसी फिल्मों में उनकी कॉमेडी टाइमिंग कमाल की रही. छोटी भूमिका हो या बड़ी, वह हर सीन में अपनी छाप छोड़ देती थीं. गुरु दत्त से लेकर महमूद तक, बड़े-बड़े कलाकार उनके साथ काम करना पसंद करते थे.

Munish Kumar

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ… और पढ़ें

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

November 24, 2025, 04:01 IST

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सिंगर से बनीं थीं एक्ट्रेस, दिलीप कुमार की फिल्म से किया डेब्यू

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