Success Story: ब्रिटेन की नौकरी ठुकराकर गांव लौटे अमित, डेयरी फार्मिंग से ऐसे हर महीने कमा रहे 5 लाख रुपए

Last Updated:January 08, 2026, 15:44 IST
Success Story : रसीदपुरा के अमित ने ब्रिटेन से पढ़ाई कर 2015 में हाइटेक डेयरी प्रोजेक्ट शुरू किया, 150 गोवंश से रोज 1200 लीटर दूध, 12 युवाओं को रोजगार और हर माह 5 लाख की कमाई कर रहे हैं. शुरुआत में जब उन्हें पैसों की कमी आई तो बैंक से लोन लिया. इस पूरे हाइटेक डेयरी प्रोजेक्ट में उन्हें 2 करोड़ रुपए का खर्च आया.
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Success Story: सीकर जिले के रसीदपुरा गांव के अमित फेनिन डेयरी फार्मिंग कर लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं. जिस काम को लोग साधारण समझते हैं इसे हाइटेक तरीके से करके कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. आज हाइटेक डेयरी फार्मिंग में अपना सिक्का जमा लिया है. अमित ने 10 साल पहले ब्रिटेन से डेयरी फार्मिंग की पढ़ाई की थी, इसके बाद एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी का अच्छा ऑफर भी मिला. इस दौरान उन्होंने खुद का सेटअप शुरू करने की ठानी.
ब्रिटेन से पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हीं उन्होंने अपने गांव रसीदपुरा आकर यहीं पर 2015 में हाइटेक डेयरी प्रोजेक्ट लगाया और दूध व्यवसाय की शुरुआत की. शुरुआत में जब उन्हें पैसों की कमी आई तो बैंक से लोन लिया. इस पूरे हाइटेक डेयरी प्रोजेक्ट में उन्हें 2 करोड़ रुपए का खर्च आया. अमित ने बताया की शुरुआत के समय उन्हें थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन जैसे-जैसे समय बिता गया तो मुनाफा भी बढ़ने लगा.
रोजाना 1200 लीटर दूध का उत्पादन कर रहेअमित ने बताया कि वे 150 से ज्यादा गोवंश का पालन कर रहे हैं. इनसे उन्हें रोजाना 1200 लीटर दूध का उत्पादन होता है. इसके अलावा इससे गांव के 12 से ज्यादा युवाओं को स्वरोजगार भी मिल रहा है. सभी खर्च निकालने के बाद अमित अभी हर माह 5 लाख रुपए कमा रहे हैं. वे अब डेयरी में पशु नस्ल सुधार के लिए भी विशेष प्रयास कर रहे हैं. अमित ने बताया कि यहां विदेशी नस्ल की गायों की नस्ल तैयार की जाती है. वे 30 से 55 लीटर तक दूध देती हैं.
पशुओं के सेंसरयुक्त डिवाइस लगायाअमित ने बताया कि वे पशुओं के लिए चारा बाहर से खरीदने के बजाय अपने खेत में ही तैयार करते हैं. खेत में उगाया गया हरा और सूखा चारा ही वे अपनी गायों को खिलाते हैं, जिससे लागत कम होती है और गुणवत्ता बनी रहती है. उनकी डेयरी की खास बात आधुनिक तकनीक का उपयोग है. प्रत्येक गाय के गले में सेंसरयुक्त डिवाइस लगाया गया है, जिससे पशुओं की गतिविधि, स्वास्थ्य और दूध उत्पादन की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है. दूध निकालने के लिए ऑटोमैटिक मिल्किंग प्वाइंट बनाए गए हैं, जहां एक साथ 12 गायों का दूध आसानी और स्वच्छ तरीके से निकाला जाता है.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Sikar,Rajasthan
First Published :
January 08, 2026, 15:44 IST
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ब्रिटेन की नौकरी ठुकराकर गांव लौटे अमित, डेयरी फार्मिंग से ऐसे कमा रहे लाखों



