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जोधपुर की बेटी की सक्सेस स्टोरी: पापा जी की चाय कैफे

Last Updated:December 21, 2025, 12:35 IST

Success Story: जोधपुर की एक बेटी ने अपने ऑटो चालक पिता को नई पहचान देने के लिए एक पुरानी कबाड़ कार को राजस्थानी लुक वाले मोबाइल कैफे ‘पापा जी की चाय’ में बदल दिया. आज यह कैफे न केवल स्थानीय लोगों बल्कि विदेशी पर्यटकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय है और पिता-पुत्री के सम्मान की एक नई मिसाल पेश कर रहा है.

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जोधपुर. जोधपुर की सड़कों पर इन दिनों एक अनोखी कार ने लोगों का ध्यान खींच रखा है. चलते-फिरते इस छोटे कैफे का नाम है “पापा जी की चाय”. यह कोई ब्रांडेड सेटअप नहीं, बल्कि एक बेटी के प्यार और मेहनत से बना ऐसा आइडिया है, जिसने शहर के लोगों के दिलों को छू लिया है. दरअसल, इस कार के पीछे कहानी है पिता-पुत्री के गहरे रिश्ते की. पिता ओमप्रकाश पहले ऑटो चलाकर अपने परिवार का गुजारा करते थे. उनकी बेटी हर बार दोस्तों के बीच अपने पापा के काम का जिक्र करने में झिझक महसूस करती थी. मगर एक दिन उसे एहसास हुआ कि पापा की मेहनत और ईमानदारी किसी शर्म की बात नहीं, बल्कि गर्व का कारण होनी चाहिए.

कबाड़ कार से कैफे वैन तक का सफरउसी दिन बेटी ने ठान लिया कि पापा की इमेज बदलनी है और उन्हें एक नई पहचान दिलानी है. इसके बाद बेटी ने एक पुरानी कबाड़ कार खरीदी और उसे अपने इनोवेटिव आइडिया के मुताबिक एक शानदार कैफे वैन में तब्दील कर दिया. इसे नाम दिया गया— ‘पापा जी की चाय’. बेटी ने इस कार को और भी आकर्षक बनाने के लिए राजस्थानी अनोखी डिज़ाइनों का इस्तेमाल किया. उसने पेशेवर पेंटर बुलाकर कार पर रंग-बिरंगे पारंपरिक पैटर्न और लोक कला उकेरवाई. अब यह मोबाइल कैफे सिर्फ चाय का ठिकाना नहीं, बल्कि जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान का एक जीवंत हिस्सा बन गया है.

जोधपुर की सड़कों पर मुस्कान और ताज़गीअब इसी कार में ओमप्रकाश बड़ी मुस्कान के साथ चाय, कॉफी और स्नैक्स बेचते नजर आते हैं. यह मोबाइल कैफे न सिर्फ लोगों को ताज़गी भरे स्वाद दे रहा है, बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गया है. ओमप्रकाश बताते हैं, “पहले मैं ऑटो चलाता था. बेटी ने कहा, ‘पापा, अब आपको लोग चाय से पहचानेंगे.’ उसने अकेले ही डिजाइन तैयार की, कार खरीदी और उसे एक नया लुक दे दिया. आज लोग फोटो खिंचवाते हैं, वीडियो बनाते हैं और कहते हैं कि यह तो जोधपुर की स्पेशल चाय कार है.”

विदेशी पर्यटकों के बीच भी बढ़ा क्रेजजोधपुर शहर के भीतरी क्षेत्र में होने के कारण, “पापा जी की चाय” अब केवल स्थानीय लोगों तक ही सीमित नहीं रह गई है. यहाँ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी आते हैं और इस अनोखी कैफे कार में चाय और कॉफी का आनंद लेते हैं. कई पर्यटक इस मोबाइल कैफे की तस्वीरें खींचते और सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जिससे जोधपुर की गलियों में इस छोटे लेकिन खास आइडिया की चर्चा वैश्विक स्तर पर बढ़ती जा रही है. यह कहानी बयां करती है कि अगर हौसला सच्चा हो, तो कबाड़ भी किसी के लिए काबिलियत का कैनवस बन सकता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan

First Published :

December 21, 2025, 12:24 IST

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कबाड़ से कमाल: बेटी का सपना, पिता की पहचान, जोधपुर में ‘पापा जी की चाय’ बनी…

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