सीकर के कमलेश शर्मा की सक्सेस स्टोरी: 2 करोड़ का टर्नओवर

Last Updated:January 08, 2026, 14:43 IST
Kamlesh Sharma Sikar Startup Success Story: सीकर के 12वीं पास कमलेश शर्मा ने 2 करोड़ टर्नओवर का वाद्ययंत्र स्टार्टअप खड़ा किया है. उनके बनाए बैंजो 18 देशों में बिकते हैं और ए.आर. रहमान जैसे दिग्गज संगीतकार भी इनके ग्राहक हैं.
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Success Story: असाधारण इच्छाशक्ति से मिली बड़ी सफलता कहते हैं कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों और वह निरंतर मेहनत करने का जज्बा रखता हो, तो दुनिया की कोई भी बाधा उसे असाधारण सफलता पाने से नहीं रोक सकती. इस प्रेरक कहावत को राजस्थान के सीकर जिले के एक छोटे से गांव पुरां बड़ी के रहने वाले कमलेश शर्मा ने धरातल पर सच कर दिखाया है. महज 12वीं तक शिक्षा प्राप्त करने वाले कमलेश ने अपनी कम उम्र और सीमित संसाधनों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. आज 25 साल की उम्र में उन्होंने वाद्ययंत्र निर्माण के क्षेत्र में एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी वैल्युएशन आज करीब 5 करोड़ रुपये आंकी जा रही है.
कमलेश शर्मा के इस स्टार्टअप की कहानी साल 2021 में शुरू हुई थी. उन्होंने अपने भाई कृष्णा शर्मा और पिता लालचंद शर्मा के साथ मिलकर ‘द कमलेश’ (The Kamlesh) ब्रांड की नींव रखी. शुरुआत में उनके पास बहुत बड़ी पूंजी नहीं थी, उन्होंने केवल 5 से 7 लाख रुपये के सीमित निवेश से भारतीय पारंपरिक वाद्ययंत्र ‘इंडियन बैंजो’ की मैन्युफैक्चरिंग इकाई स्थापित की. कोरोना काल के कठिन समय के बाद जब कमलेश अपने गांव लौटे, तो उन्होंने तय किया कि वे स्थानीय स्तर पर ही उत्पादन करेंगे. उन्होंने वाद्ययंत्रों की गुणवत्ता और उनकी ध्वनि की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है. चालू वित्त वर्ष में उनके ब्रांड का टर्नओवर 2 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को छूने वाला है.
18 देशों में पहुंच और ए.आर. रहमान का साथ
सीकर की मिट्टी से बने ये वाद्ययंत्र आज केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं. कमलेश ने बताया कि उनके द्वारा निर्मित इंडियन बैंजो आज अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित दुनिया के 18 से अधिक देशों में एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं. सीकर का यह परिवार करीब 19 साल तक सूरत में रहा था, जहाँ से कमलेश ने संगीत की शुरुआती बारीकियां सीखीं. उनके बैंजो की कीमत 8 हजार रुपये से शुरू होकर 35 हजार रुपये तक जाती है. कमलेश के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि तब रही जब ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने उनके बनाए वाद्ययंत्रों का उपयोग किया. यह किसी भी भारतीय निर्माता के लिए गौरव का क्षण है.
डिजिटल क्रांति और भविष्य के सपने
कमलेश की सफलता के पीछे उनके यूट्यूब चैनल का भी बड़ा हाथ है. साल 2016 से वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वाद्ययंत्र बजाना सिखा रहे हैं और आज उनके 7 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं. इसी पहचान ने उन्हें एक ग्लोबल ब्रांड बनाने में मदद की. हाल ही में उन्होंने ‘हंसमाला’ नाम से एक नया ब्रांड भी शुरू किया है और भविष्य में वे हारमोनियम, ढोलक और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों का निर्माण भी बड़े स्तर पर करने की योजना बना रहे हैं. कमलेश शर्मा की यह कहानी आज के युवाओं को यह संदेश देती है कि गांव की गलियों से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का ब्रांड खड़ा किया जा सकता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
Location :
Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
January 08, 2026, 14:43 IST
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सीकर के छोरे का कमाल: 12वीं पास कमलेश ने खड़ा किया 2 करोड़ का ब्रांड…..



