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Success Story| UPSC| IAS Ki Kahani: जिस लड़की पर हंसते थे लोग, वह 22 साल की उम्र में बन गई आईएएस, पहली बार में UPSC किया क्रैक

Last Updated:December 09, 2025, 14:46 IST

Success Story, IAS Story: यह कहानी राजस्‍थान के एक छोटे से गांव के लड़की की है. गांव से निकली इस लड़की ने वह कर दिखाया जो लाखों का सपना होता है.पहली बार में इस लड़की ने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली.आइए जानते हैं इनकी पूरी कहानी…जिस लड़की पर हंसते थे लोग, वह 22 साल की उम्र में बन गई IASIAS Sulochana Meena, IAS Officer, UPSC, upsc success story: सुलोचना मीणा के आईएएस बनने की कहानी.

Success Story, IAS Story: राजस्‍थान का एक जिला है सवाई माधोपुर.जिला मुख्‍यालय से दूर एक गांव अडालवाड़ा की एक लड़की ने गांव की सीमाओं से निकलकर बहुत बड़ा सपना देखा. बाद में वह लड़की सिर्फ 22 साल की उम्र में अपने गांव की पहली महिला IAS अधिकारी बनी. इस अधिकारी का नाम है सुलोचना मीणा.सुलोचना ने पहली कोशिश में ही 2021 के UPSC एग्जाम में ऑल इंडिया रैंक 415 वीं और ST कैटेगरी में 6वीं रैंक लाकर इतिहास रच दिया.

सुलोचना का जन्म राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के छोटे से गांव अडालवाड़ा में हुआ. गांव इतना पिछड़ा है कि वहां पहले लड़कियों को 10वीं-12वीं से आगे पढ़ाना भी बड़ा फैसला माना जाता था. उनके पापा-मम्मी चाहते थे कि बेटी डॉक्टर बने, लेकिन सुलोचना को बचपन से सुनाई देता था कि IAS मतलब जिले का बॉस होता है.बस यही बात दिल में बैठ गई.घर में मां-बाप खेती और छोटे-मोटे काम से परिवार चलाते थे. सुलोचना सबसे बड़ी हैं.उनके भाई-बहन भी हैं. गांव में कोई IAS नहीं बना था कभी, इसलिए जब वो कहती थीं कि IAS बनेंगी तो लोग हंसते थे, लेकिन सुलोचना ने ठान लिया था कि वो हंसने वालों को जवाब अपने रिजल्ट से देंगी.

IAS Sulochana Meena: स्कूल से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का सफर

सुलोचना की स्कूलिंग गांव और आसपास के स्कूलों में हुई.अच्छे नंबर आए तो घरवालों ने हिम्मत करके दिल्ली भेज दिया. दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस में बॉटनी में ग्रेजुएशन किया. यहीं पहली बार वो NSS यानी नेशनल सर्विस स्कीम से जुड़ीं. गांव-गांव में कैंप लगाने, लोगों की मदद करने से उनमें सर्विस का जज्बा और गहरा हो गया. यहीं उन्होंने फैसला कर लिया कि डॉक्टरी नहीं अब तो प्रशासनिक सेवा ही करनी है ताकि बड़े लेवल पर लोगों की मदद कर सकें. दिल्ली में रहते हुए उन्होंने देखा कि UPSC की तैयारी करने वाले कितने सारे लड़के-लड़कियां हैं और मन में ठान लिया कि वो भी कर दिखाएंगी.

UPSC Success Story: पहली बार में ही UPSC क्रैक: सिर्फ 21 साल की उम्र में IAS

ग्रेजुएशन पूरा होते ही सुलोचना ने UPSC की तैयारी शुरू कर दी. महंगी कोचिंग नहीं ली. घर से जो पैसे मिलते थे उसी में गुजारा करती थीं.तैयारी का फंडा बहुत साधारण था.रोज 8-9 घंटे पढ़ाई, सुबह सबसे पहले अखबार को 5-6 घंटे तक एनालाइज करना. करंट अफेयर्स उनका सबसे मजबूत सब्जेक्ट बन गया. NCERT की किताबों से बेसिक क्लियर किया फिर स्टैंडर्ड बुक्स पढ़ीं.यूट्यूब की फ्री क्लासेस, टॉपर्स के एनालिसिस वीडियो और फ्री आंसर राइटिंग सेशन बस इन्हीं से तैयारी की. मॉक टेस्ट और टेस्ट सीरीज पर बहुत जोर दिया. सुलोचना कहती हैं कि पेशेंस रखो.कंसिस्टेंसी रखो.महंगी कोचिंग की जरूरत नहीं.बस सही दिशा और मेहनत चाहिए.इसका नतीजा यह हुआ कि वर्ष 2021 में पहली ही कोशिश में उन्‍होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली.इस परीक्षा में AIR 415, ST कैटेगरी में 6वीं रैंक हासिल की.ट्रेनिंग के बाद सीधे झारखंड कैडर मिला और पलामू में SDO बनीं. सुलोचना अपनी तैनाती के समय पूरे जिले में सबसे कम उम्र की IAS थीं और अपने गांव की पहली महिला IAS.

गांव पर असर: बेटियों को कोचिंग भेजने की होड़

सुलोचना की सफलता की खबर जब गांव पहुंची तो जैसे बिजली कौंध गई. जिन घरों में लड़कियों को कोचिंग के नाम पर शहर नहीं भेजा जाता था वो अब खुद बेटियों को दिल्ली-जयपुर की कोचिंग भेजने लगे. अडालवाड़ा गांव में आज कई लड़कियां UPSC की तैयारी कर रही हैं. लोग कहते हैं कि हमारी सुलोचना कर सकती है तो हमारी बेटी क्यों नहीं? मां-बाप को अब नई उम्मीद है. सुलोचना कहती हैं कि मेरे मम्मी-पापा ने मेरे जरिए नया सपना देखा. आज पूरे गांव का नजरिया बदल गया है.

About the AuthorDhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. करीब 13 वर्ष से अधिक समय से मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व डिजिटल संस्करण के अलावा कई अन्य संस्थानों में कार्य…और पढ़ें

First Published :

December 09, 2025, 14:46 IST

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