गाय के प्रति ऐसा प्रेम कि रह जाएंगे हैरान! 15 साल सेवा के बाद ढोल-थाली के साथ निकाली अंतिम यात्रा, प्रसादी भी बांटी

पाली. राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसा शोक संदेश सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया. यह शोक संदेश किसी इंसान का नहीं, बल्कि एक गौ माता का था. एक बिजनेसमैन ने इसे अपने परिवार के सदस्य की तरह 15 साल तक सेवा की और फार्म पर मृत्यु के बाद शोक सभा तथा प्रसादी का आयोजन भी किया. यह अनोखा शोक संदेश पत्रिका से लेकर पूरे राजस्थान ही नहीं, देश भर में चर्चा का केंद्र बन चुका है. हम बात कर रहे हैं पाली के बिजनेसमैन और गोसेवक जगदीश रावल की, जिन्होंने 15 साल तक एक गाय की सेवा की.
16 दिसंबर को उनकी सबसे प्रिय गाय ‘काजल’ की मौत हो गई. इसके लिए उन्होंने शोक संदेश की पत्रिका छपवाई. इतना ही नहीं, 26 दिसंबर को अपने फार्म हाउस पर शोक सभा और प्रसादी का आयोजन भी रखा, जिसके लिए गांव के लोगों को निमंत्रण भेजा गया. खास बात यह है कि उन्होंने अपनी बाकी गायों के नाम पत्नी, बेटी, बहू और भाइयों की पत्नियों के नाम पर रखे हैं.
इस तरह परिवार का सदस्य बनी थी यह गाय
जगदीश कुमार का गुजरात के सिलवासा में इलेक्ट्रिक सामान का बिजनेस है. जगदीश ने बताया कि 15 साल पहले आहोर में रहने वाले उनके भांजे राकेश रावल ने गोतस्करी के लिए ले जाए जा रही गायों में से एक गाय पकड़ी थी. इसमें से एक गाय उन्हें गिफ्ट की गई, जिसका नाम उन्होंने काजल रखा. जगदीश रावल ने बताया कि काजल के आने के बाद उनके मन में गोसेवा का भाव जागृत हुआ. तखतगढ़ गांव के पास बलाना में उनका 7 बीघा का फार्म हाउस है. इसी फार्म हाउस में उन्होंने काजल को रखा और उसकी सेवा शुरू की.
ढोल-थाली के साथ निकाली अंतिम यात्रा
जगदीश के अनुसार, उनके पास 12 गायें हैं. इनमें से काजल सबसे प्रिय थी. जब भी वे फार्म हाउस पर जाते, काजल कमरे में चली आती थी. वह बूढ़ी हो गई थी और उसकी उम्र 18 साल थी. उसकी मौत पर वे काफी रोए. खेत में गड्ढा खुदवाकर उसे चूनड़ी ओढ़ाई और रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया. अंतिम यात्रा ढोल-थाली के साथ निकाली गई. चूनड़ी ओढ़ाकर काजल को अंतिम विदाई दी गई. इसके बाद गऊ गोपाला फार्म हाउस में 26 दिसंबर को शोक सभा आयोजित की गई. शोक संदेश के कार्ड प्रिंट करवाकर परिचितों और गांव वालों को भेजे गए. इस दिन गायों के लिए लापसी और शोक सभा में आने वालों के लिए दाल-बाटी प्रसादी के रूप में बनवाई गई.
7 बीघा जमीन पर केवल गायों की सेवा करते हैं
जगदीश रावल के पास 7 बीघा जमीन है, जहां वे केवल 12 बेसहारा गोवंश की सेवा करते हैं. ये गायें या तो बीमार थीं या सड़क पर भटक रही थीं. पूरा फार्म हाउस उन्होंने गायों के लिए ही रखा है. यहां तीन अलग-अलग टीन शेड बनाए हैं. गायों के लिए चारा-अनाज उगाया जाता है. पीने के लिए अलग तालाब है. गर्मी से बचाव के लिए पंखे और सर्दी में कंबल की व्यवस्था है. अपना एक कमरा बनाया है और देखभाल के लिए एक व्यक्ति रखा है.
बेटी-पत्नी और पोतियों के नाम पर गायें
रावल कहते हैं कि गायों की सेवा उन्हें अच्छी लगती है, इसलिए बेसहारा गायों को फार्म हाउस पर लाया. सभी गायें उनकी मां समान हैं, इसलिए उन्होंने गायों के नाम अपने परिवार के सदस्यों पर रखे. पत्नी संतोष, बेटी मंगला, पोतियां राशि और दायर इन्हें इसी नाम से पुकारते हैं.



