निजी क्लिनिक बंद करने के आदेश पर बवाल, एसएमएस से जुड़े 12 अस्पतालों के अधीक्षक ने त्यागपत्र दिए

Last Updated:November 18, 2025, 08:29 IST
Jaipur News: जयपुर में सोमवार को तब हड़कंप मच गया जब एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े 12 बड़े सरकारी अस्पतालों के अधीक्षकों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया. सरकार के नए नियमों के तहत प्रिंसिपल और अधीक्षक अब निजी क्लिनिक नहीं चला सकेंगे और 75% समय केवल प्रशासनिक काम में देना होगा. अधीक्षकों का तर्क है कि इससे मरीजों को देखने और विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए समय ही नहीं बचेगा. स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बातचीत कर मनाने की कोशिश की, लेकिन निर्णय नहीं बदल पाया.
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एसएमएस मेडिकल कॉलेज के 12 अधीक्षकों ने एक साथ इस्तीफा दिया
जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को हड़कंप मच गया जब एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े 12 बड़े सरकारी अस्पतालों के अधीक्षक एक साथ अपने पद से इस्तीफा देकर बाहर आ गए. वजह थी सरकार का नया फरमान. अब प्रिंसिपल और अधीक्षक निजी क्लिनिक नहीं चला सकेंगे. साथ ही उनका 75 प्रतिशत समय तो सिर्फ फाइलें खोलने-बंद करने और मीटिंग करने में ही बीतेगा.
इनका तर्क है कि मरीज देखने और छात्रों को पढ़ाने के लिए सिर्फ 25 प्रतिशत वक्त बचेगा. बता दें कि ये नियम 11 नवंबर को ही नोटिफाई हुए थे. जैसे ही अधीक्षकों को इसकी पूरी जानकारी मिली, सबने एकजुट होकर त्यागपत्र तैयार कर लिए और कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. दीपक महेश्वरी के हाथों चिकित्सा शिक्षा सचिव को भिजवा दिए.
समझाने का प्रयास भी हुआ विफल
इस्तीफों की खबर लगते ही स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर हरकत में आ गए. एक घंटे के अंदर ही उन्होंने सभी अधीक्षकों को फोन कर बातचीत के लिए बुलाया. काफी देर मनाने-समझाने की कोशिश हुई, मगर कोई तैयार नहीं हुआ. आखिरकार मंत्री ने मंगलवार को जयपुर के एसएमएस कैंपस में ही दूसरी बड़ी बैठक बुला ली है, जिसमें इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिश होगी. सरकार का पक्ष है कि बड़े अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ और प्रशासनिक काम इतना बढ़ गया है कि वरिष्ठ डॉक्टरों का पूरा समय संस्थान को मिलना चाहिए.
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने एकतरफा फैसला बताया
सरकार का मानना है कि निजी प्रैक्टिस से ध्यान बंटता है, यह तर्क है. लेकिन डॉक्टरों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन देकर इन नियमों को “एकतरफा और अन्यायपूर्ण” करार दिया है. उनका कहना है कि बिना किसी से पूछे, रातोंरात ऐसे फैसले थोपना मरीजों की देखभाल और मेडिकल शिक्षा दोनों को चौपट कर देगा. निजी प्रैक्टिस की मामूली कमाई ही हमें सरकारी सैलरी के साथ गुजारा करने की ताकत देती है.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट… और पढ़ें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
November 18, 2025, 08:29 IST
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निजी क्लिनिक बंद करने के आदेश पर बवाल, 12 अस्पताल अधीक्षकों ने दिया इस्तीफा



