जयपुर के अमरापुर आश्रम की अनोखी मिसाल! जहां रोज हजारों को मिलता है भोजन, कोई भूखा नहीं लौटता

Last Updated:December 04, 2025, 13:36 IST
Jaipur News Hindi : जयपुर के MI रोड स्थित अमरापुर आश्रम को हाल ही में खासा कोठी फ्लाईओवर के नए नाम ‘श्री अमरापुर सेतु’ के रूप में पहचान मिली है. स्वामी टेऊंराम महाराज से जुड़ा यह ऐतिहासिक मंदिर भोजन प्रसादी की अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां रोज हजारों जरूरतमंदों को बिना भेदभाव भोजन कराया जाता है और कोई भी भूखा नहीं लौटता.
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जयपुर के MI रोड़ पर स्थित अमरापुर आश्रम।
जयपुर : जयपुर रेलवे स्टेशन से सिंधी कैंप बस स्टैंड को जोड़ने वाले फ्लाईओवर खासा कोठी पुलिया का हालही में श्री अमरापुर सेतु के नाम से नया नामकरण किया गया, जो जयपुर के MI रोड़ पर स्थित सिंध प्रांत के पवित्र तीर्थ स्वामी टेऊंराम महाराज का अमरापुर आश्रम मंदिर के नाम किया गया, इसी फ्लाईओवर के नाम के साथ ही जयपुर का अमरापुर आश्रम धार्मिक स्थल और मंदिर जो अपनी भोजन प्रसादी कि खास पहचान के लिए प्रसिद्ध हैं, आपको बता देंअमरपुरा आश्रम में संतों के अलावा सिंधी समाज के विष्णु स्वरूप झूले लाल एवं मंडल के आराध्य इस्ट देव भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा होती है.
अमरपुरा में स्वामी सर्वानंद के बाद स्वामी शांति प्रकाश एवं हरिदास महाराज ने गद्दी संभाली, वर्तमान समय में अमरापुर आश्रम के इस मंदिर में पीठाधीश्वर स्वामी भगत प्रकाश महाराज है, जो भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद स्वामी सर्वानंद के साथ भारत आए थे. MI रोड़ पर बना अमरापुर आश्रम भव्य मंदिर हैं जहां सैकड़ों की संख्या में सिंधी समाज के लोग हर दिन यहां आते हैं.
इस मंदिर से आज तक कोई भूखा नहीं लोटा अमरापुर आश्रम मंदिर विशेष रूप में जयपुर में ऐसा अनोखा धार्मिक स्थल है जो खासतौर पर भोजन प्रसादी के रूप में विख्यात है. अमरपुरा आश्रम के बाहर सुबह से शाम तक गरीब और बेसहारा लोगों को भोजन परोसने की अनोखी परम्परा है जो वर्षों से चली आ रही है. बरसों से चल रहे गुरु के लंगर में हर दिन करीब तीन क्विंटल चावल की खपत होती है. हर समय मंदिर के बाहर लोग यहां गरमा गरम भोजन प्रसादी का आंनद लेते हैं. मंदिर प्रशासन के अनुसार यहां हर दिन करीब आठ दस हजार लोग भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं. मंदिर में सुबह की पहली किरण के साथ ही भोजन प्रसादी का वितरण शुरू होता हैं जो देर रात तक चलता हैं. भोजन प्रसादी के अलावा ख़ासतौर पर मंदिर में हर महीनें पांच सौ से ज्यादा विधवा महिलाओं व गरीबों लोगों को आटा, दाल, चालव और अन्य खाद्य सामग्री का विवरण भी किया जाता हैं इसलिए इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां से कोई व्यक्ति भूखा प्यासा नहीं जाता.
पाकिस्तान से जुड़ा है अमरापुर आश्रम स्थल का इतिहास सिंध प्रांत के पवित्र तीर्थ स्वामी टेऊंराम महाराज का अमरापुर आश्रम मंदिर का इतिहास भी वर्षो पुराना और ऐतिहासिक है, मंदिर के बारे में कहा जाता है कि भारत पाक विभाजन के पहले सिंध के महान संत स्वामी टेउंराम महाराज अपने शिष्य सर्वानंद के साथ धार्मिक यात्रा करते हुए जयपुर आए थे. बाद में स्वामी सर्वानंद ने एम आई रोड पर अमरापुर आश्रम की स्थापना की, स्वामी टेऊं राम का नाम वर्षों से मानव सेवा से जुड़ा है सतनाम साक्षी का प्रणाम मंत्र देने वाले स्वामी टेऊं राम का जन्म सन् 1885 में सिंध के खंडू गांव में हुआ था, जयपुर के अलावा बाबा टेऊराम का अजमेर, खेरथल, हरिद्वार सहित देश में 100 से ज्यादा आश्रम जन सेवा के केन्द्र बने हुए हैं. स्वामी टेऊं राम के बाद स्वामी सर्वानंद ने मानव सेवा की इस परम्परा को बरकरार रखा और उन्होंने हरिद्वार व हिमालय में साधना की एवं अपने गुरु टेऊंराम महाराज के पदों की रचना की, इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए उनके खानदान में अवधूत टेकचंद, संत बसरराम, तीर्थ दास एवं बिशन दास जैसे प्रसिद्ध संत हुए.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
December 04, 2025, 13:36 IST
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जयपुर का अनोखा है यह अमरापुर आश्रम जहां हजारों लोग करते हैं हर दिन प्रसादी ग्रहण



