Public Opinion : 1 अप्रैल से नई ड्रेस पॉलिसी लागू… लेकिन जनता पूछ रही- क्या कपड़े बदलने से बदलेगी शिक्षा व्यवस्था?

Last Updated:October 29, 2025, 16:17 IST
Jodhpur News: मदन दिलावर ने राजस्थान के सभी स्कूलों में एक जैसी यूनिफॉर्म और टाई हटाने का आदेश दिया, जिससे समानता, अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
जोधपुर. राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक नया फरमान जारी किया है, जिसने स्कूलों में नई चर्चा छेड़ दी है. इस आदेश के तहत अब प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म एक जैसी होगी और उसमें टाई शामिल नहीं होगी. मंत्री के अनुसार, यह निर्णय छात्रों में समानता और अनुशासन की भावना को मजबूत करेगा. नया ड्रेस कोड आगामी शैक्षणिक सत्र यानी 1 अप्रैल से लागू किया जाएगा.
इसके साथ ही शिक्षकों के लिए पहचान पत्र और विद्यार्थियों के लिए परिचय पत्र अनिवार्य किया गया है. शिक्षा मंत्री का कहना है कि इससे स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता आएगी. इस फरमान को लेकर राज्यभर में चर्चा तेज हो गई है. कहीं इसे समानता का प्रतीक कहा जा रहा है, तो कहीं इसे निजी स्कूलों की स्वतंत्रता पर हस्तक्षेप माना जा रहा है.
नई ड्रेस पर छात्रों और अभिभावकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाकई बच्चों ने इस नए ड्रेस कोड का स्वागत करते हुए कहा कि अब उन्हें भी एक जैसी पहचान मिलेगी और समाज में बराबरी का अहसास होगा. वहीं अभिभावकों ने कहा कि यह कदम आर्थिक रूप से भी राहत देगा, क्योंकि अब हर स्कूल के लिए अलग-अलग और महंगी यूनिफॉर्म नहीं खरीदनी पड़ेगी. कुछ माता-पिता ने उम्मीद जताई कि अगर यह नीति सही तरीके से लागू हुई तो यह बच्चों में एकता, सादगी और आत्मविश्वास को बढ़ावा देगी. नरेंद्र कुमार ने बताया कि मुझे लगता है कि एक जैसी यूनिफॉर्म होने से हमें भी प्राइवेट स्कूल के बच्चों जैसा महसूस होगा. सब बराबर लगेंगे, सब एक जैसे कपड़े पहनेंगे तो दोस्ती भी ज्यादा बढ़ेगी. कृष्ण कुमार छात्रा ने बताया कि राष्ट्रगान हमारे देश की पहचान और गर्व का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि हर सुबह जब पूरा स्कूल एक साथ खड़ा होकर राष्ट्रगान गाता है, तो एक अलग ही ऊर्जा और एकता का अनुभव होता है. आस्था का मानना है कि यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि हर छात्र में देशभक्ति और अनुशासन की भावना जगाने का तरीका है.
शिक्षा में भी हो ऑडिट, तभी आएगा असली सुधारनिरूपा पटवा ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस फैसले को सराहनीय बताया. उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों में एक जैसी यूनिफॉर्म लागू करना समानता और सरलता की दिशा में अच्छा कदम है, जिससे बच्चों में भेदभाव की भावना खत्म होगी. लेकिन उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केवल ड्रेस कोड बदलने से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी. जिस तरह बैंकों में नियमित ऑडिट होती है, उसी तरह शिक्षा क्षेत्र में भी पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट प्रणाली लागू की जानी चाहिए. इससे सरकारी और निजी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और सुधार के अवसर बढ़ेंगे.
Anand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल… और पढ़ें
Location :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
October 29, 2025, 16:17 IST
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1 अप्रैल से नई ड्रेस पॉलिसी… जनता पूछ रही- क्या कपड़े बदलने से बदलेगी शिक्षा



