जब Netflix ने चुपचाप बनाई ऐसी वेबसाइट, जिससे इंटरनेट कंपनियों की खुल गई पोल- netflix vs internet providers isp fast com story

नई दिल्ली. जब भी वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर कोई फिल्म या वेब सीरीज देखते समय वीडियो अटकता था, तो ज्यादातर लोग एक ही बात कहते थे- नेटफ्लिक्स स्लो है. शुरुआती 2010 के दशक में यह शिकायत इतनी आम हो गई थी किनेटफ्लिक्स की साख पर ही सवाल उठने लगे. लेकिन हकीकत कुछ और थी. समस्या नेटफ्लिक्स की नहीं, बल्कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP) की थी, जो चुपचाप नेटफ्लिक्स की स्पीड कम कर रही थीं. इसी सच्चाई को सामने लाने के लिए Netflix ने एक ऐसी वेबसाइट (Fast.com) बनाई, जिसने इंटरनेट कंपनियों की पोल खोल दी.
Netflix क्यों फंसा था मुसीबत मेंउस दौर में स्ट्रीमिंग तेजी से बढ़ रही थी. अमेरिका में इंटरनेट ट्रैफिक का 30% से ज्यादा हिस्सा अकेले नेटफ्लिक्स से आ रहा था. इतने भारी ट्रैफिक से आईएसपी पर दबाव बढ़ने लगा. कई इंटरनेट कंपनियों का कहना था कि नेटफ्लिक्स उनकी नेटवर्क क्षमता पर बोझ डाल रहा है और इसके लिए उसे ज्यादा पैसे देने चाहिए. नेटफ्लिक्स ने इसका विरोध किया. कंपनी का साफ कहना था कि यूजर्स पहले से इंटरनेट के लिए भुगतान कर रहे हैं, फिर कंटेंट कंपनी से अतिरिक्त फीस लेना गलत है. यहीं से टकराव शुरू हुआ.
गलती किसी और की, नुकसान Netflix कोजब वीडियो बार-बार बफर होता, तो ग्राहक इंटरनेट कंपनी को नहीं, नेटफ्लिक्स को दोष देते. उन्हें लगता कि नेटफ्लिक्स के सर्वर खराब हैं या कंपनी तकनीकी रूप से कमजोर है. नतीजा यह हुआ कि शिकायतें बढ़ीं, सोशल मीडिया पर आलोचना हुई और कई यूजर्स ने सब्सक्रिप्शन तक कैंसिल कर दिया. Netflix की ब्रांड इमेज को सीधा नुकसान हो रहा था.
कैसे हुआ Fast.com का जन्मकंपनी के सामने दो रास्ते थे- या तो लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी जाए या फिर सच्चाई को सीधे यूजर्स तक पहुंचाया जाए. कंपनी ने दूसरा रास्ता चुना और यहीं से Fast.com का जन्म हुआ. यह एक बेहद साधारण वेबसाइट है. न कोई भारी ग्राफिक्स, न कोई लंबा फॉर्म. जैसे ही आप वेबसाइट खोलते हैं, आपकी इंटरनेट स्पीड सामने आ जाती है. बस इतना ही. लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह खासतौर पर नेटफ्लिक्स के सर्वर से आपकी स्पीड मापती थी. अगर Fast.com पर स्पीड कम दिखती, तो यूजर तुरंत समझ जाता कि दिक्कत नेटफ्लिक्स में नहीं, बल्कि उसके इंटरनेट कनेक्शन में है.
बिना विज्ञापन का अरबों डॉलर का दांवनेटफ्लिक्स ने Fast.com के लिए एक भी विज्ञापन नहीं चलाया. फिर भी यह वेबसाइट जंगल की आग की तरह फैल गई. लोग एक-दूसरे को लिंक भेजने लगे. टेक जर्नलिस्ट्स ने इसके बारे में लिखा. यहां तक कि रेगुलेटर्स और पॉलिसी मेकर्स भी Fast.com के डेटा का हवाला देने लगे. यह एक तरह से नेटफ्लिक्स का पीआर मास्टरस्ट्रोक था. बिना शोर किए बिना किसी आरोप के सिर्फ डेटा के जरिए कंपनी ने साबित कर दिया कि कौन सच में इंटरनेट को स्लो कर रहा है.
इंटरनेट कंपनियों पर दबावFast.com की लोकप्रियता ने इंटरनेट कंपनियों को कटघरे में खड़ा कर दिया. जब लाखों यूजर्स एक ही बात कहने लगे कि नेटफ्लिक्स पर स्पीड स्लो है लेकिन बाकी वेबसाइट्स ठीक चल रही हैं, तो सवाल उठना तय था. सार्वजनिक दबाव बढ़ा और कई इंटरनेट प्रोवाइडर्स को अपनी थ्रॉटलिंग पॉलिसी बदलनी पड़ी. यह नेट न्यूट्रैलिटी की बहस में भी एक बड़ा मोड़ था.
आज भी उतनी ही ताकतवरआज Fast.com दुनिया की 40 से ज्यादा भाषाओं में उपलब्ध है और रोजाना करोड़ों स्पीड टेस्ट किए जाते हैं. यह नेटफ्लिक्स की सबसे पावरफुल क्रिएशन में से एक है, जो सीधे पैसा नहीं कमाती, लेकिन कंपनी की ब्रांड वैल्यू और भरोसे को मजबूत करती है.
सबक क्या है?अक्सर कंपनियां अपनी छवि बचाने के लिए बड़े-बड़े विज्ञापन अभियान चलाती हैं. नेटफ्लिक्स ने इसके उलट रास्ता अपनाया. उसने कुछ बेचने के बजाय सच्चाई दिखाने वाला टूल बनाया. Fast.com इस बात का उदाहरण है कि कभी-कभी सबसे बड़ा हथियार शोर नहीं, बल्कि पारदर्शिता होती है.



