Pushkar Fair : परंपरा, आस्था और संस्कृति का संगम! भव्यता के साथ संपन्न हुआ अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेला 2025

Last Updated:November 06, 2025, 18:07 IST
राजस्थान की संस्कृति, आस्था और लोक परंपराओं का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय श्री पुष्कर मेला 2025 बुधवार को भव्य समापन के साथ सम्पन्न हुआ. ऊंट परेड, लोक नृत्य और आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. मेले में हजारों पशुओं की भागीदारी और करोड़ों का लेन-देन हुआ, जिसने राजस्थान की पहचान को नई ऊंचाई दी.
राजस्थान की धार्मिक, सांस्कृतिक और लोक परंपराओं का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय श्री पुष्कर मेला-2025 बुधवार को भव्यता के साथ संपन्न हुआ. समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी और राजस्थान सरकार के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत उपस्थित रहे. दोनों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया.

केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि मेले हमारी सांस्कृतिक पहचान है. ये हमारी संस्कृतिक के प्रतीक है. भारत विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है. सनातन काल से भरने वाला पुष्कर मेला इसका प्रमाण है. मेले इस संस्कृति को अक्षुण रखने में मेले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है. मेलों से राष्ट्रीयता, अपनत्व एवं भ्रातत्व में वृद्धि होती है. मेले संस्कृति के अविरल प्रवाह को बनाए रखते हैं. उन्होंने आगे कहा कि पुष्कर के इस धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पर्यटक महोत्सव के दौरान सुंदर आयोजन किए गए. इन आयोजनों में कई प्रतियोगिताएं भी हुई. इन प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को निरन्तर आगे बढ़ने के प्रेरणा लेनी चाहिए.

वहीं जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि तीर्थराज पुष्कर जगतपिता ब्रह्मा की नगरी है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में पुष्कर के विकास के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है.

समापन समारोह में जिला कलक्टर लोक बंधु ने औपचारिक रूप से मेले के समापन की घोषणा की. इस अवसर पर 150 से अधिक छात्राओं ने आकर्षक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया. ऊंट परेड, कला जत्था यात्रा, मशक वादन और लोक नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. राजस्थान की लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए कच्छी घोड़ी नृत्य, कालबेलिया, गैर नृत्य, हरियाणवी लोक नृत्य और नगाड़ा वादन जैसे कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहे.

वंदे मातरम रचना के आगामी 7 नवम्बर को 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वंदे मातरम मार्च पास्ट किया गया. वंदे मातरम की धुन पर अश्व चैल्सी, जैनी, टारजन, लाल मिन्टो, गणेश, अनामिका, भीम, शंहशाह, गजराज, सिन्योर, केसर ने सुंदर नृत्य किया. इसी प्रकार समारोह में सामूहिक स्वरों के साथ मेले में आए श्रद्धालुओं एवं प्रतिभागियों ने गणमान्य व्यक्तियों के साथ वंदे मातरम का गायन किया.

मेले में इस वर्ष 4957 अश्व , 1576 ऊंट , 1113 गौ व 67 भैस वंश सहित कुल 6715 पशु मेले में आए. पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील घीया ने बताया कि इस वर्ष अभी तक कुल 804 पशुओं का क्रय-विक्रय किया गया. इनमें लगभग चार करोड नौ लाख छिहत्तर हजार पांच सौ रूपये का लेनदेन हुआ. इससे विभाग को रवन्ना से 6894 रूपये की आय हुई. विभाग द्वारा मेले में विकास प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इसमें स्वयं सेवी संस्थाओं एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा कुल 76 स्टॉलें लगाई गई. इससे विभाग को 6 लाख 69 हजार 40 रूपए की राजस्व आय हुई.

इस बार सर्वश्रेष्ठ मेला पशु का खिताब दीपक पुत्र मनराज अहीर (अजमेर) को मिला, जिन्हें 21,000 रुपये और शील्ड देकर सम्मानित किया गया. सर्वश्रेष्ठ गीर गाय के लिए मानमल जोशी (अजमेर) और सर्वश्रेष्ठ दुधारू पशु के लिए अमजद खानपुरा (अजमेर) को समान पुरस्कार मिला.अमजद की गाय ने 24 घंटे में 39 किलो 673 ग्राम दूध देकर रिकॉर्ड बनाया.अश्व, ऊंट और दुग्ध प्रतियोगिताओं में राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के पशुपालकों ने शानदार प्रदर्शन किया.

अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेला 2025 इस बार सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि राजस्थान की परंपरा, नवाचार और विकास का प्रतीक बनकर उभरा जिसने एक बार फिर पुष्कर को विश्व पटल पर चमका दिया.
First Published :
November 06, 2025, 18:07 IST
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परंपरा और आस्था का संगम! भव्यता के साथ संपन्न हुआ पुष्कर मेला 2025



