थाना या अपराधियों का अड्डा? साइबर ठगों की खातिरदारी, दाल-बाटी पार्टी का वीडियो वायरल

दीपक पुरी/भरतपुर. मेवात जिले का जुरहरा थाना इन दिनों गंभीर आरोपों और सवालों के चलते सुर्खियों में आ गया है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने न केवल स्थानीय पुलिस व्यवस्था पर बल्कि पूरी राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है. आरोप है कि जुरहरा थाना साइबर ठगों के लिए संरक्षण का केंद्र बनता जा रहा है, जहां अपराधियों को कानून के दायरे में लाने के बजाय उन्हें मेहमानों की तरह सम्मान और सुविधाएं दी जा रही हैं. वायरल वीडियो ने आम जनता के बीच आक्रोश और अविश्वास की भावना पैदा कर दी है.
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस थाना परिसर को अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था का प्रतीक होना चाहिए, वहीं साइबर ठगों की दावत का आयोजन होता दिखाई दे रहा है. वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि हिस्ट्रीशीटर साइबर ठग थाने में आराम से बैठे हैं और पुलिसकर्मी उन्हें दाल, बाटी और चूरमा परोसते नजर आ रहे हैं. यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर थाना है या फिर अपराधियों की ऐशगाह.
जुरहरा थाना और साइबर ठगों की दावत का वायरल वीडियोवायरल वीडियो के अनुसार, जुरहरा थाना परिसर में साइबर ठगों को बाकायदा मेहमानों की तरह बैठाकर उनकी खातिरदारी की जा रही है. बताया जा रहा है कि ये वही साइबर ठग हैं, जिन पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और जो लंबे समय से पुलिस के रडार पर होने चाहिए थे. वीडियो में पुलिसकर्मी अपराधियों के लिए खाना परोसते दिख रहे हैं, जिससे यह आभास होता है कि पुलिस और साइबर ठगों के बीच सांठगांठ किसी से छिपी नहीं है.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस दावत का वीडियो खुद साइबर ठगों ने ही बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया. साइबर ठगों ने अपनी फेसबुक आईडी पर इस वीडियो को स्टेटस के रूप में लगाया, मानो यह दिखाना चाह रहे हों कि उन्हें पुलिस का संरक्षण प्राप्त है और वे कानून से ऊपर हैं. वीडियो के साथ लगाए गए कैप्शन और टिप्पणियों ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है.
‘एक फोन पर हो जावे सारे काम’ वाला स्टेटस और पुलिस पर सवालवायरल वीडियो और स्टेटस में एक पंक्ति खासतौर पर चर्चा में है- ‘एक फोन पर हो जावे सारे काम, डीएसपी तोडी माने है.’ इस पंक्ति ने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है. लोगों का कहना है कि अगर अपराधी खुलेआम यह दावा कर रहे हैं कि एक फोन कॉल पर सारे काम हो जाते हैं और डीएसपी भी उनकी नहीं मानते, तो यह पुलिस प्रशासन की साख पर सीधा हमला है.
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर राजस्थान पुलिस की कार्यशैली को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या जुरहरा थाना वास्तव में साइबर ठगों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है. क्या पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों को भूलकर अपराधियों की सेवा में लगे हुए हैं. यह मामला केवल एक थाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है.
उच्च अधिकारियों की भूमिका और कार्रवाई पर टिकी नजरेंवीडियो वायरल होने के बाद राजस्थान पुलिस के उच्च अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेंगे और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे. जनता यह जानना चाहती है कि क्या जांच होगी, क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित या बर्खास्त किया जाएगा, या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा.
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कानून का रखवाला खुद कानून तोड़ने वालों के साथ खड़ा दिखे तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा. जुरहरा थाना और वायरल वीडियो ने राजस्थान पुलिस की छवि को गहरा आघात पहुंचाया है, और अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटता है.



