Agriculture Tips: गेंदा के लिए खतरनाक है पत्ती धब्बा और झुलसा रोग, जानें समय पर बचाव के कारगर तरीके

Last Updated:October 24, 2025, 05:47 IST
Marigold Flower Disease Prevention Measures: रबी सीजन में खिल रही गेंदे की फसल इस समय कई रोगों की चपेट में है. पत्ती धब्बा, झुलसा और सड़न रोग के कारण फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं. इन रोगों से पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और फूल झड़ने लगते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फफूंदनाशी दवाओं का छिड़काव, जल निकासी की उचित व्यवस्था और खेत की नियमित निगरानी से इन रोगों पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
गेंदे का फूल न केवल सजावट और धार्मिक कार्यों में उपयोग होता है बल्कि किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है. रबी सीजन में गेंदे की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. गेंदे की फूलों की खेती इन दिनों खेतों में लहरा रही है, लेकिन कई ऐसे रोग हैं जो खेती को नुकसान पहुंचा कर उत्पादन कम कर देते हैं. सबसे आम रोगों में पत्ती धब्बा रोग, झुलसा रोग और सड़न रोग शामिल हैं, जो फलों और फूलों की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं. इन रोगों के कारण पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और फूल झड़ने लगते हैं. <span style=”color: currentcolor;”>इन दिनों गेंदे की फसल पर कई तरह के रोग हमला कर रहे हैं, जिनसे उत्पादन पर बुरा असर पड़ रहा है. ये रोग न केवल पौधों की वृद्धि को रोकते हैं बल्कि फूलों की गुणवत्ता और रंगत को भी खराब कर देते हैं. इससे किसानों को नुकसान पहुंचता है. फफूंदनाशी दवाओं का छिड़काव, संतुलित सिंचाई और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था से इन रोगों पर नियंत्रण पाया जा सकता है. किसान समय-समय पर खेतों की निगरानी करें तो नुकसान कम किया जा सकता है. </span>

गेंदा फूल के पौधे में लगने वाले रोगों की पहचान समय पर करना बहुत जरूरी है. पत्ती धब्बा रोग में पत्तियों पर छोटे-छोटे भूरे या काले धब्बे बनने लगते हैं. झुलसा रोग के असर से पौधे की पत्तियां सूखकर मुड़ जाती है, जबकि सड़न रोग में जड़ों और तनों में गलन दिखाई देती है. इन लक्षणों के दिखते ही किसान को तुरंत उपाय शुरू कर देना चाहिए. जैसे ही किसानों को यह लक्षण दिखाई दे तो किस तुरंत कृषि विभाग को सूचना करें.

इन रोगों पर नियंत्रण पाने के लिए फफूंदनाशी दवाओं का छिड़काव सबसे प्रभावी तरीका माना गया है. इसके लिए कार्बेन्डाजिम, मैन्कोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड जैसे फफूंदनाशी दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है. छिड़काव सुबह या शाम के समय करें ताकि दवा का असर अधिक समय तक बना रहे.

गेंदे की खेती में संतुलित सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. अत्यधिक पानी या जलजमाव की स्थिति में फफूंद तेजी से फैलती है. इसलिए खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था करना बहुत जरूरी है. साथ ही खेत की नियमित गुड़ाई करने से हवा का संचार बना रहता है और पौधे स्वस्थ रहते हैं.

जैविक खेती करने वाले किसान नीम का अर्क, ट्राइकोडर्मा या छाछ के घोल जैसे प्राकृतिक उपचारों का उपयोग कर सकते हैं. ये उपाय पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखते हैं. खेत में रोगग्रस्त पौधों को तुरंत निकालकर नष्ट करना भी रोग फैलाव रोकने का प्रभावी तरीका है. किसान अगर फसल की नियमित निगरानी करे तो इन रोगों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
First Published :
October 24, 2025, 05:47 IST
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गेंदे के पौधों का दुश्मन है ये रोग, जानें पहचान और रोकथाम करने के उपाय



