Rajasthan

Barmer Millet Cookies Success Story

Last Updated:November 19, 2025, 09:41 IST

Millet Cookies Barmer: बाड़मेर की ‘जीजी बाई’ स्वयं सहायता समूह की दस महिलाओं ने बाजरा कुकीज़ बनाकर नया इतिहास रचा है. 140 किलो कुकीज़ बेचकर 3 लाख रुपये की आमदनी हुई. अब इनके उत्पादों की मांग अमेरिका, जापान और लंदन तक पहुँच चुकी है. बेकरी ट्रेनिंग और आधुनिक तकनीक से महिलाओं ने अपने सपनों को वैश्विक बाजार में उड़ान दी है.कभी चूल्हे से बाहर नहीं निकली महिलाएं, आज संभाल रही हैं इंटरनेशनल ऑर्डरथार की मिट्टी से विदेशों तक: बाड़मेर की महिलाओं की ‘बाजरा कुकीज़’ सफलता कहानी

बाड़मेर. थार की तपती रेत में जहाँ संघर्ष की कहानियाँ ही ज्यादा देखने को मिलती हैं, वहीं बाड़मेर की दस महिलाओं ने बाजरे से अपनी किस्मत बदलकर एक नई इबारत लिखी है. आदर्श ढूंढा गांव की ये महिलाएँ ‘जीजी बाई’ स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हैं, जिन्होंने बाजरे से तैयार किए गए उत्पादों से अपनी पहचान को गाँव के चौखट से उठाकर देश–विदेश तक पहुंचा दिया है.

जो बाजरा कभी सिर्फ घरों की रोटियों में सिमटा था, वही आज बाड़मेर की महिलाओं को दुनिया के नक्शे पर चमका रहा है. महिला उद्यमिता दिवस के मौके पर ‘लोकल18’ ने इन 10 महिलाओं की प्रेरक कहानी सामने रखी है. कभी चूल्हे-चौखट तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज लंदन, अमेरिका और जापान में अपने उत्पाद भेजने का सपना साकार कर रही हैं.

ग्लोबल डिमांड: अमेरिका, जापान और लंदन तक जाती है सप्लाईबाड़मेर की रेत में उगने वाला बाजरा पौष्टिकता और स्वाद के लिए हमेशा से जाना जाता रहा है. लेकिन स्थानीय महिलाओं ने इसे नया आयाम देते हुए जीरा, अजवाइन और ड्राई फ्रूट से भरपूर बाजरा कुकीज़ बनाना शुरू किया. केयर्न वेदांता की मदद से महिलाओं को बेकरी प्रशिक्षण, पैकिंग–ब्रांडिंग, फाइनेंशियल लिटरेसी, ओवन-मशीन जैसी सुविधाएँ मिलीं. आज ‘जीजी बाई’ ब्रांड की कुकीज़ देश के अलग-अलग राज्य और ग्लोबल मार्केट में पहचान बना रही हैं.

140 किलो कुकीज़ की बिक्री, 3 लाख रुपये की कमाईइन महिलाओं की मेहनत का परिणाम ऐसा आया कि 140 किलो से अधिक कुकीज़ बेचकर समूह ने 3 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल, जयगढ़ हेरिटेज फेस्टिवल, इंडिया एनर्जी वीक दिल्ली और वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन जैसे बड़े आयोजनों में इन महिलाओं की मिलेट कुकीज़ खूब पसंद की गईं.

महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा—अब खुद संभालती हैं प्रोडक्शन व मार्केटिंगसमूह की सदस्य हेमलता बताती हैं कि पहले वे केवल घर का काम करती थीं. साधन सीमित थे, आत्मविश्वास कम था. लेकिन आज वे प्रोडक्शन, पैकिंग, अकाउंट मैनेजमेंट और मार्केटिंग तक संभाल रही हैं. वे कहती हैं— “रेगिस्तान के बाजरे ने हमें विदेशों तक पहचान दिलाई है.”

यह कहानी सिर्फ कमाई की नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर होने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त होने की मिसाल है.

Location :

Barmer,Barmer,Rajasthan

First Published :

November 19, 2025, 09:41 IST

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कभी चूल्हे से बाहर नहीं निकली महिलाएं, आज संभाल रही हैं इंटरनेशनल ऑर्डर

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