ओम बिरला ने वन्यजीव संरक्षण व ईको-टूरिज़्म परियोजनाओं की समीक्षा

कोटा. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा स्थित अपने कैंप कार्यालय में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की. बैठक में वन्यजीव संरक्षण, ईको-टूरिज़्म के विकास और जिले में संचालित विभिन्न वन एवं पर्यटन परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की. इस दौरान अंतरराज्यीय ट्रांसलोकेशन, टाइगर रिज़र्व प्रबंधन, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और संरक्षण से जुड़े कई अहम विषयों पर गहन चर्चा हुई.
बैठक में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरुण प्रसाद ने पेंच टाइगर रिज़र्व से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व तक बाघिन के सफल अंतरराज्यीय ट्रांसलोकेशन की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह ट्रांसलोकेशन पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया और निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया है, जिससे रामगढ़ विषधारी क्षेत्र में बाघों की संख्या और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी. लोकसभा अध्यक्ष ने इस प्रयास को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए वन विभाग की टीम की सराहना की.
बैठक में अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के विस्तार और वहां आगंतुक सुविधाओं के विकास को लेकर भी चर्चा की. अधिकारियों ने बताया कि पार्क में नई गतिविधियां जोड़ने, बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ाने की योजना है. ओम बिरला ने निर्देश दिए कि पार्क को इस प्रकार विकसित किया जाए कि वह न केवल पर्यटन का केंद्र बने, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का भी प्रमुख माध्यम बने. उन्होंने कहा कि आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं मिलने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित होगी.
टाइगर रिज़र्व क्षेत्रों में नए सफारी रूट विकसित करने के निर्देश
लोकसभा अध्यक्ष ने टाइगर रिज़र्व क्षेत्रों में नए सफारी रूट विकसित करने और लंबित वन स्वीकृतियों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश भी दिए. उन्होंने कहा कि संरक्षण और पर्यटन, दोनों से जुड़े कार्य समयबद्ध रूप से आगे बढ़ने चाहिए, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिले. उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी परियोजनाएं पर्यावरणीय मानकों और नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए संचालित हो.
मुकुंदरा-रामगढ़ में ईको-टूरिज़्म को बढ़ावा
बैठक में मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी क्षेत्रों में ईको-टूरिज़्म की संभावनाओं पर विशेष चर्चा की. बिरला ने कहा कि पर्यटन गतिविधियाँ संरक्षण के अनुरूप होनी चाहिए और उनका सीधा लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने निर्देश दिए कि ईको-टूरिज़्म मॉडल ऐसा हो, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका के अवसर मिलें और वे संरक्षण प्रयासों में सक्रिय भागीदार बनें. इससे पर्यावरण संतुलन और क्षेत्रीय विकास, दोनों एक साथ आगे बढ़ सकेंगे.
लोकसभा अध्यक्ष ने मुकुंदरा क्षेत्र की चंबल घाटी में स्थित देश की सबसे बड़ी गिद्ध नेस्टिंग कॉलोनी के संरक्षण को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और उनकी संख्या में गिरावट पर्यावरण के लिए गंभीर संकेत है. इस दिशा में वैज्ञानिक मॉनिटरिंग, सुरक्षित आवास की व्यवस्था और व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए. उन्होंने यह भी कहा कि गिद्ध संरक्षण को ईको-टूरिज़्म से जोड़ा जा सकता है, जिससे संरक्षण के साथ-साथ शोध और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.
बैठक में वन विभाग के अधिकारियों ने मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व में चल रहे संरक्षण कार्यों, वन्यजीवों की निगरानी, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के प्रयासों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी. लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि कोटा और हाड़ोती क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज़्म की अपार संभावनाएं हैं. यदि योजनाबद्ध और संवेदनशील तरीके से कार्य किया जाए, तो यह क्षेत्र न केवल पर्यावरण संरक्षण का एक आदर्श मॉडल बन सकता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय विकास के नए अवसर भी सृजित कर सकता है.



