यह खबर जानकर हिल जाएगा चीन! बाड़मेर में रेयर अर्थ मिनरल्स का भंडार, भारत बनेगा वैश्विक सुपरपावर

बाड़मेर. पश्चिम राजस्थान के सिवाना की पहाड़ियों में दुर्लभ खनिजों की ऐसी खोज हुई है जो देश और दुनिया के हाई-टेक उद्योग की दिशा बदल सकती है. जिन मिनरल्स पर अब तक चीन का दबदबा था और जिनकी वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और अन्य हाई-एंड तकनीकें उसकी पकड़ में रहती थीं, वैसा ही खजाना अब भारत में सामने आया है. सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में पाए जाने वाले खनिज इलेक्ट्रिक कारों, मिसाइल तकनीक, रोबोटिक्स, सुपरकंडक्टर, बैटरी और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स में नई नींव बनाने में काम आ सकते हैं.
राजस्थान का सिवाना केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति में अहम भूमिका निभा सकता है. यह चीन की वैश्विक प्रभुत्व को कम करने में मदद कर सकता है और अन्य देशों को भी इन खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) और एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट (एएमडी) के सर्वेक्षण में बालोतरा की सिवाना तहसील के भाटीखेड़ा में बड़े भंडार पाए गए हैं. सर्वे के पूरा होने के साथ ही खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
भाटीखेड़ा ब्लॉक में खनिज भंडारखनन विभाग, बाड़मेर के वरिष्ठ भूवैज्ञानिक डॉ. चंद्रप्रकाश दाधीच के मुताबिक भाटीखेड़ा ब्लॉक में हार्ड रॉक ग्रेनाइट में रेयर एलिमेंट्स पाए गए हैं. हार्ड रॉक में रेयर एलिमेंट्स कम मात्रा में पाए जाते हैं और यह देश का पहला ब्लॉक होगा जहां ऐसे बड़े भंडार प्रमाणित हैं. यहां जी 2 लेवल का सर्वे हो चुका है और अब नीलामी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
रेयर अर्थ की वैश्विक मांग
रेयर अर्थ तत्वों की जरूरत इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, रक्षा प्रणाली, हाई पावर मैगनेट, एयरोस्पेस और अन्य उन्नत उपकरणों में रहती है. विश्व बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. चीन लंबे समय तक वैश्विक सप्लायर रहा है, जिससे दुनिया की हाई-टेक इंडस्ट्री उस पर निर्भर रही. अब सिवाना के थापन, भाटीखेडा, कमठाई, राखी और थापन इलाकों में बड़े भंडार मिलने से भारत के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है.
सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स और भविष्यसिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में खनिजों की मौजूदगी से भारत न केवल अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी प्रभावी भूमिका निभा सकेगा. जिस जिले को पहले केवल रेत, सूखा और सीमा की पहचान थी, वह अब खनिज आधारित इंडस्ट्री का नया केंद्र बन सकता है.



