राजस्थान के छोटे से गांव की दो बहनों ने संघर्ष और मेहनत से बनाया अपना मुकाम: एक प्रिंसिपल, दूसरी डॉक्टर!

दौसा. राजस्थान की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और मेहनत से पहचान बना रही हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेटियों की सफलता समाज के लिए प्रेरणा बन रही है. ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है सीकर जिले के खाटूश्यामजी क्षेत्र के छोटे से गांव गोवटी की दो बहनों की, जिन्होंने अभावों और कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई कर आज बड़ा मुकाम हासिल किया है. एक बहन प्रिंसिपल बनी है, तो दूसरी डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रही है. हम बात कर रहे हैं संगीता बगड़िया और उनकी बहन श्वेता बगड़िया की, संगीता बगड़िया वर्तमान में दौसा जिले के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, सिकराय में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी बहन श्वेता बगड़िया जयपुर में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं.
संगीता और श्वेता का बचपन सीकर जिले के खाटूश्यामजी के पास स्थित छोटे से गांव गोवटी में बीता. गांव में न तो बड़े स्कूल थे और न ही बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध थी. दोनों बहनें शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थी, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उन्हें गांव के ही सरकारी विद्यालय में पढ़ाई करनी पड़ी. दोनों बहनों ने 12वीं तक की शिक्षा अपने गांव के सरकारी स्कूल से ही पूरी की. गांव में पानी की समस्या हमेशा से गंभीर रही, घरों में नल की सुविधा नहीं होने के कारण पीने के पानी के लिए हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता था. संगीता और श्वेता को रोजाना घर के लिए पानी लाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती थी. स्कूल जाने से पहले दोनों बहनें कई बार हैंडपंप तक जाती, सिर पर मटकी रखकर पानी लाती और फिर घर का काम निपटाकर स्कूल जाती थी. पानी के लिए यह संघर्ष उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था.
घर के काम, पानी लाने की जिम्मेदारी और पढ़ाई इन तीनों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन दोनों बहनों ने कभी हार नहीं मानी. सुविधाओं के अभाव के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया, उनका मानना था कि शिक्षा ही उन्हें बेहतर भविष्य की ओर ले जाएगी. पढ़ाई पूरी करने के बाद संगीता बगड़िया ने द्वितीय श्रेणी शिक्षक की परीक्षा उत्तीर्ण की और शिक्षक के रूप में सेवाएं देना शुरू किया. इसके बाद उन्होंने स्कूल व्याख्याता की परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास की. मेहनत, लगन और निरंतर प्रयासों के चलते उन्हें पदोन्नति मिली और वे प्रिंसिपल के पद तक पहुंची. वर्तमान में वे राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, सिकराय में प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत हैं. खास बात यह है कि प्रिंसिपल होने के साथ-साथ वे आज भी स्वयं कक्षाओं में पढ़ाने का कार्य करती हैं और सैकड़ों बालिकाओं को शिक्षा प्रदान कर रही हैं.
बहन श्वेता बगड़िया ने भी डॉक्टर बनने का सपना साकार किया
वहीं छोटी बहन श्वेता बगड़िया ने भी कठिन हालातों में पढ़ाई जारी रखी और डॉक्टर बनने का सपना साकार किया. उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान बनाई. वर्तमान में वे जयपुर में कार्यरत हैं और महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही हैं. संगीता बगड़िया का ससुराल सिकराय कस्बे के बसवाल परिवार में है. उनके पति सुशील बसवाल भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और शहीद रामकेश मीणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिकराय में लेक्चरर के पद पर कार्यरत हैं.
शिक्षा से जुड़े परिवार होने के कारण संगीता को अपने कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने का सकारात्मक वातावरण भी मिला. आज भी संगीता बगड़िया अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभा रही हैं, स्कूल में प्रिंसिपल के कार्यों के साथ-साथ वे बालिकाओं को पढ़ाती हैं और घर की जिम्मेदारियां भी स्वयं संभालती हैं. उनका जीवन यह संदेश देता है कि बेटियां किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं रहती. कहते हैं कि जब बेटियां शिक्षित होती हैं, तो पूरा समाज आगे बढ़ता है.
संगीता और श्वेता बगड़िया जैसी बेटियां यह साबित करती हैं कि संसाधनों की कमी और संघर्षपूर्ण जीवन भी सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकता. उनकी यह कहानी गांव की बेटियों ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है और “शिक्षित बेटियां, सुनहरा राजस्थान” के सपने को साकार करती है.



