‘कबाड़ से बने’ मिसाइल के सामने पानी भरता है अमेरिका का टॉमहॉक, रूस के ठिकाने उड़ा रहा यूक्रेन का नया राक्षस

रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक सैन्य रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है. जहां अमेरिका और पश्चिमी देश दशकों से हाई-टेक्नोलॉजी, महंगे और ‘एक-दो बार इस्तेमाल के हथियार’ बनाने की नीति पर चलते रहे, वहीं यूक्रेन ने साबित कर दिया कि भविष्य की जंग सस्ते, सरल लेकिन बड़े पैमाने पर बनाए जा सकने वाले हथियारों से जीती जाएगी. युद्ध के इसी बदलते तरीके में यूक्रेन का नया ‘जंकयार्ड क्रूज़ मिसाइल’ FP-5 Flamingo दुनिया की सैन्य ताकतों के लिए सबसे बड़ा सरप्राइज बनकर उभरा है.
यह मिसाइल न केवल रूस के ठिकानों को चीर रहा है, बल्कि अमेरिकी रक्षा रणनीति में भी तूफान मचा दिया है क्योंकि इसकी कीमत अमेरिकी टॉमहॉक (Tomahawk) की तुलना में मात्र 20% है, जबकि मारक क्षमता कई मामलों में उससे दो गुना अधिक है.यह वही हथियार है जिसकी अमेरिका को वर्षों से जरूरत थी – सस्ता, घातक और बड़े पैमाने पर बनने वाला.
फ्लेमिंगो: यूक्रेन की मिसाइल फैक्ट्री से निकला सुपरवेपन’यूक्रेन की डिफेंस टेक कंपनी Fire Point द्वारा विकसित FP-5 Flamingo एक लो-कोस्ट, हाई-इफेक्ट मिसाइल है जिसे यूक्रेन ने रूस के खिलाफ कई अभियानों में तैनात किया है. सबसे पहला ऑपरेशन ही इसकी ताकत का सबूत था, जिसमें तीन फ्लेमिंगो मिसाइलों ने एक रूसी नौसैनिक बेस पर हमला कर छह होवरक्राफ्ट नष्ट कर दिए और जमीन पर 30 फीट से ज्यादा गहरे गड्ढे छोड़ दिए. कई हमलों में यह मिसाइल रूसी ऑयल रिफाइनरियों में भी भयंकर आग लगा चुकी है.
फ्लेमिंगो क्यों है अनोखा? ‘जंकयार्ड मिसाइल’ का कॉन्सेप्टFlamingo को दुनिया की पहली ‘जंकयार्ड क्रूज़ मिसाइल’ भी कहा जा रहा है. कारण है इसकी निर्माण तकनीक और लागत बचत के अनोखे तरीके:1. बाहरी इंजन – जो चाहे लगा दो: मिसाइल के पीछे इंजन बाहरी रूप से लगा है. यानी कोई भी हल्का, पुराना, सेकंडहैंड जेट इंजन इसमें फिट किया जा सकता है. जो मॉडल सार्वजनिक रूप से दिखाया गया था उसमें सेकंडहैंड AL-25 इंजन लगाया गया था, जो पुराने Czech L-39 ट्रेनर जेट से निकाला गया था.
2. री-साइक्लिंग वाला वॉरहेड: टॉमहॉक की तरह अत्याधुनिक वॉरहेड बनाने की बजाय Flamingo में FAB-1000 सोवियत एयर-बम लगाया जाता है. इस 1000 किलो के बम की वजह से विस्फोटक क्षमताTomahawk से लगभग दोगुनी हो जाती है. यूक्रेन के पास ऐसे बम हजारों की संख्या में हैं और अब यह मिसाइल वही बम हवा से दुश्मन तक पहुंचाती है.
3. कार्बन फाइबर एक-पीस बॉडी: मिसाइल का शरीर कार्बन फाइबर की एक ही टुकड़ी से स्पिन-फॉर्म तकनीक द्वारा बनाया जाता है… जिससे लागत, वजन और उत्पादकता तीनों बेहतर होती हैं.
फ्लेमिंगो की रेंज और शक्ति से अमेरिका भी दंग है. फ्लेमिंगो की ताकत टॉमहॉक से कहीं आगे खड़ी नजर आती है. यहां देखें दोनों क्रूज मिसाइलों की खासियत…
Flamingo की तुलना – Tomahawk के साथ
पैरामीटरTomahawkFP-5 Flamingoरेंज1,000 मील2,000 मीलवॉरहेड1,000 पाउंड2,300 पाउंडकीमत$2.1 मिलियनलगभग पांच गुना सस्तीनिर्माण गतिदर्जनों प्रति वर्ष1 प्रतिदिन → 7 प्रतिदिन तक बढ़ने का लक्ष्य
अमेरिका की किसी भी क्रूज़ मिसाइल लाइन की उत्पादन क्षमता आज Flamingo से कम है. यह तथ्य पेंटागन के रणनीतिकारों को परेशान भी करता है और प्रेरित भी.
गाइडेंस सिस्टम – सस्ता, पर घातकFire Point ने FP-5 के गाइडेंस सिस्टम का पूरा विवरण साझा नहीं किया, लेकिन कंपनी की अन्य FP-1 मिसाइलों के आधार पर यह बेहद आशंका है कि Flamingo में होगा: जाम-रेज़िस्टेंट सैटेलाइट नेविगेशन, इनेर्शियल गाइडेंस और कैमरा आधारित ऑप्टिकल टारगेटिंग. निर्माता का दावा है कि इसकी सटीकता 50 फीट के भीतर रहती है. जब आपके पास 1-टन वॉरहेड हो, तो 50 फीट का फर्क युद्ध के मैदान में मायने नहीं रखता.
अमेरिका की दुविधा – महंगी मिसाइलें, कम संख्याTomahawk की कीमत लगभग $2.1 मिलियन है, और अमेरिका साल में बहुत कम मात्रा में इन्हें तैयार करता और बेचता है. जैसे: 2024 में यमन पर 135 Tomahawk, 2017–18 में सीरिया पर लगभग 120, 2011 में लीबिया पर 150 से भी कम, इसके विपरीत रूस 200+ मिसाइलें हर महीने बना रहा है और एक रात में 700 ड्रोन दाग देता है. यानी अमेरिका की “हाई-टेक लेकिन कम मात्रा” वाली सैन्य नीति अब पुरानी पड़ती जा रही है.
युद्ध का भविष्य: Affordable Mass WeaponsPentagon ने अब नई नीति अपनाई है – ‘Affordable Mass’ यानी हजारों की संख्या में बनने वाले सस्ते लेकिन प्रभावशाली हथियार. इस दिशा में अमेरिकी कंपनियां पीछे रह गई हैं. इसलिए Lockheed Martin जैसी दिग्गज कंपनियों को अब बड़े पैमाने पर अपने निर्माण मॉडल बदलने पड़ रहे हैं क्योंकि भविष्य के युद्ध में वही देश टिकेगा जिसके पास अधिक मिसाइलें, अधिक ड्रोन और अधिक सस्ते हथियार होंगे. Flamingo उसी भविष्य की मिसाल है.



