Rajasthan

हाईवे के किनारे चाय बेचता था ये लड़का… आज रियल एस्टेट का गेम–चेंजर! इसकी सक्सेस स्टोरी में छुपा बड़ा राज

देवेंद्र सेन/कोटा. पाटन रोड- कोटा से लालसोट को जोड़ने वाला बड़ा मेगा हाईवे. हर दिन हजारों वाहन तेजी से गुजरते हैं, पर उसी हाईवे के एक कोने पर एक छोटी-सी चाय की दुकान सालों तक अपने होने का सबूत देती रही. वही दुकान थी जहाँ एक साधारण-सा युवक अपने बड़े सपने उबाल रहा था- गौरव तिवारी. गौरव किसी अमीर परिवार से नहीं था. उसके पिता गौ सेवक थे- गायों की सेवा करके घर चलाने वाले. सरकारी नौकरी नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को सबसे कीमती विरासत दी- ईमानदारी, मेहनत और लोगों की मदद करने की सीख. बारहवीं तक पढ़ाई के बाद गौरव ने चाय की दुकान संभाल ली. सुबह पाँच बजे चूल्हा जलता, दाल चीनी की खुशबू हवा में घुल जाती और उसी खुशबू के साथ उसके सपने भी उठते थे.

लोग कहते- गौरव की चाय में कुछ खास है. पर वे नहीं जानते थे कि उस चाय में सिर्फ स्वाद नहीं, उसकी जिद, संघर्ष और भविष्य की नींव भी घुली है. मोड़ तब आया जब कुछ ब्रोकर आए दिन उसकी चाय के थाम पर बैठकर जमीन की डीलों की बातें करने लगे- प्लॉटिंग, रजिस्ट्री, फार्महाउस, प्रोजेक्ट. गौरव चुप रहता, पर हर शब्द उसके दिल में जगह बना रहा था. एक दिन उसके मन में चिंगारी उठी- अगर ये कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं? वह किसान का बेटा था. ज़मीन से रिश्ते और भाषा दोनों समझता था. पैसे कम थे, पर हिम्मत बड़ी थी. उसने थोड़ा बचत जोड़ा, कुछ किसानों ने भरोसा किया, और बालाजी की कृपा से छोटा सा लोन मिला. इसी टोकन राशि से उसने पहला प्लॉट काटा. फिर पहला फार्महाउस प्लान बेचा. फिर दूसरा. फिर तीसरा. लोग हैरान थे- फार्महाउस तो अमीरों का खेल, ये लड़का कैसे? लेकिन गौरव की सबसे बड़ी पूँजी थी- ईमानदारी. जैसे उसकी चाय में एक अलग स्वाद था, वैसे ही उसके काम में भी भरोसे का स्वाद था.

चेतन्या ग्रुप की शुरुआत
गौरव ने जब पहला प्रोजेक्ट पूरा करवाया तो लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ा. किसान भी उससे आसानी से जुड़ने लगे क्योंकि वह उनकी भाषा, उनकी जमीन और उनकी जरूरत को समझता था. KDA अप्रूव्ड प्लॉटिंग, UIT अप्रूव्ड प्लानिंग, विकसित कॉलोनी- सीसी रोड, नालियाँ, मंदिर और साफ सुथरा लेआउट देखकर लोग कहते- गौरव तिवारी से मिल लो, वो घर दिलवा देगा. धीरे धीरे चेतन्या ग्रुप का नाम कोटा और आसपास फैलने लगा. लोग यह देखकर और प्रभावित हुए कि बिना बड़े ऑफिस, बिना बड़े स्टाफ और बिना चमक दमक के भी कोई सिर्फ भरोसे से काम कर सकता है. यही भरोसा उसकी पहचान बनने लगा और यही पहचान उसकी सबसे बड़ी पूँजी साबित हुई.

चाय की दुकान से लेकर हजारों परिवारों का साथगौरव आज भी अपनी चाय की दुकान नहीं भूला है. वह कहता है- जैसे चाय में पानी, चीनी और पत्ती का सही मिश्रण चाहिए, वैसे ही जमीन, ईमानदारी और लोगों की जरूरतों का सही मिलान चाहिए. उसने न सिर्फ घर बनाए, बल्कि कई परिवारों की नींव भी मजबूत की. मोहन जी के चार बच्चों की पढ़ाई में मदद कर उन्हें संभाला. उसकी सोच साफ है- हर व्यक्ति को एक घर मिलना चाहिए, चाहे वह चाय बनाता हो या फार्महाउस. आज चेतन्या ग्रुप पाँच से ज्यादा सफल योजनाएँ पूरी कर चुका है और सैकड़ों परिवार अपने घर का सपना पूरा कर चुके हैं. गौरव का सफर अभी भी जारी है और एक कप चाय से शुरू हुआ यह रास्ता अब हजारों लोगों की जीवन कहानी बन चुका है.

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