प्रदूषण में योग: हाई AQI पर सुरक्षित वर्कआउट और प्राणायाम टिप्स

Yoga During Pollution: प्रदूषण बढ़ने के कारण आजकल साफ हवा में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है. हवा में मौजूद धुआं, धूल और हानिकारक कण सीधे फेफड़ों पर असर डालते हैं. ऐसे में जब हम वर्कआउट करते हैं, तो हम ज्यादा तेजी से सांस लेते हैं, जिससे ये प्रदूषक तत्व शरीर में और भी ज्यादा घुस जाते हैं. इसका असर सांस की दिक्कत, दमा बढ़ने, फेफड़ों की कमजोरी और दिल की बीमारियों तक पहुंच सकता है. इसलिए जब AQI खराब हो, तब एक्सरसाइज करते समय खास सावधानी जरूरी है. यहां जानें कि ऐसी स्थिति में कौन-से प्राणायाम मदद करते हैं और वर्कआउट करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
हाई एयर पॉल्यूशन में वर्कआउट करते समय अपनाएं ये 10 टिप्स(10 tips while working out in high air pollution)-
AQI जरूर चेक करें-ऐप या वेबसाइट के जरिए रोजाना एयर क्वालिटी देखें. हाई पॉल्यूशन के दिनों में बाहर वर्कआउट न करें.
अपनी वर्कआउट टाइमिंग बदलें-सुबह जल्दी या देर शाम प्रदूषण अपेक्षाकृत कम होता है. दोपहर में वर्कआउट से बचें.
इंडोर वर्कआउट चुनें-योग, पिलाटीज, डांस, स्ट्रेचिंग या वेट ट्रेनिंग बेहतर विकल्प हैं.
घर में एयर प्यूरीफायर लगाएं-होम वर्कआउट करने वालों के लिए यह जरूरी है कि वे घर पर एयर प्यूरीफायर लगवाएं. ताकि हवा में मौजूद हानिकारक कण फिल्टर हो सकें.
सही मास्क पहनें-जरूरी हो तो बाहर जाते समय N95 या पॉल्यूशन मास्क का उपयोग करें.
साफ और ग्रीन एरिया चुनें-अगर बाहर वर्कआउट करना ही हो तो ऐसी जगह ढूंडें जहां ग्रीनरी वाले स्थान हो और हवा थोड़ी स्वच्छ होती है.
हाइड्रेटेड रहें-खुद को हाइड्रेट रखें. ज्यादातर पानी पीने से शरीर टॉक्सिन बाहर निकालता है और प्रदूषण का असर कम होता है.
शरीर की बात सुनें-अगर खांसी, सीने में भारीपन, व्हीज़िंग या थकान लगे तो तुरंत वर्कआउट रोक दें.
इंडोर एयर-क्लीनिंग पौधे लगाएं-पीस लिली, स्पाइडर प्लांट, रबर प्लांट घर की हवा को काफी हद तक शुद्ध करते हैं.
लो-इंटेंसिटी एक्सरसाइज करें-वॉकिंग, हल्की स्ट्रेचिंग या जेंटल एरोबिक्स हाई AQI में ज्यादा सुरक्षित हैं.
प्रदूषण के दौरान करें ये प्राणायाम(Do this pranayama during pollution)-
अनुलोम–विलोम प्राणायाम- यह सांस को गहराई से फेफड़ों तक पहुंचाता है और नाक मार्ग को साफ करने में मदद करता है. प्रदूषण के कारण होने वाली जकड़न और सांस की कमी में राहत देता है.
कपालभाति प्राणायाम- फेफड़ों को मजबूत बनाता है और शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है. इससे सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है.
भ्रामरी प्राणायाम- नर्व्स को शांत करता है, तनाव कम करता है और फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रेशर को घटाता है. प्रदूषण के दिनों में यह बेहद असरदार माना जाता है.
नाड़ी शोधन प्राणायाम- शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह संतुलित करता है और सांस से जुड़ी समस्याओं में सुधार करता है.
उद्गीथ प्राणायाम- ‘ओम’ के उच्चारण के साथ किया जाने वाला यह प्राणायाम तनाव और सांस की रुकावट में राहत देता है.
जहां तक हो सके प्रदूषण के दिनों में आउटडोर एक्सरसाइज से बचें. अगर बाहर जाना जरूरी हो तो समय सही चुनें, मास्क पहनें और कम तीव्रता वाले वर्कआउट करें. योग और प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाकर आपको बेहतर तरीके से सांस लेने में मदद कर सकते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



