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हैदराबाद में पहला ट्राउट फार्म, रंगा रेड्डी में नई तकनीक से मछली पालन

Last Updated:January 06, 2026, 16:25 IST

तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले में देश का पहला कमर्शियल ट्राउट फार्म शुरू हुआ है, जहां दक्षिण भारत की गर्मी में भी हिमालय जैसी ठंडी मछली पाली जा रही है. इस फार्म में री-सर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) का इस्तेमाल किया गया है, जो पानी को साफ और ठंडा रखता है. यह प्रोजेक्ट युवाओं को आधुनिक मछली पालन और ऑटोमेशन की ट्रेनिंग भी देगा. केंद्र सरकार के निवेश और नई तकनीक की मदद से अब सालाना 14 लाख ट्राउट बीज तैयार किए जा रहे हैं, जिससे रोजगार और निर्यात के अवसर बढ़ेंगे.

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हैदराबाद. अब तक माना जाता था कि रेनबो ट्राउट जैसी कीमती मछली सिर्फ हिमालय की ठंडी वादियों और बर्फ जैसे पानी में ही पनप सकती है. लेकिन अब तकनीक ने इस धारणा को बदल दिया है. तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले में देश का पहला कमर्शियल ट्राउट फार्म शुरू हुआ है, जहां दक्षिण भारत की तपती गर्मी में भी पहाड़ों वाली मछली तैयार की जा रही है. मछली पालन या फिश फॉर्मिंग वह प्रक्रिया है जिसमें इंसान कृत्रिम रूप से मछली को पालतू और उगाता है, ताकि उसे खाने, व्यापार या आर्थिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सके, इसे अंग्रेज़ी में Aquaculture भी कहते हैं.

इस फार्म में री-सर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) का इस्तेमाल किया गया है. यह तकनीक पानी को बार-बार साफ करती है और उसका तापमान मछली के अनुकूल ठंडा बनाए रखती है. मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया. इसे स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर लिमिटेड नाम की कंपनी ने विकसित किया है. यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि मछली पालन अब केवल मौसम या भूगोल पर निर्भर नहीं है. सही इंजीनियरिंग और तकनीक के जरिए कहीं भी उच्च गुणवत्ता की मछली पाली जा सकती है. यह सेंटर सिर्फ मछली पैदा नहीं करेगा, बल्कि युवाओं को आधुनिक मछली पालन और ऑटोमेशन की ट्रेनिंग भी देगा.

मत्स्य पालन में बड़ा बदलावजानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने मछली पालन के क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 2015 से अब तक लगभग 38,572 करोड़ रुपये का निवेश किया है. पहले ट्राउट सिर्फ उत्तराखंड, हिमाचल और कश्मीर जैसे राज्यों तक सीमित थी, लेकिन अब नई हैचरी और तकनीक की मदद से सालाना 14 लाख ट्राउट बीज तैयार किए जा रहे हैं. इस पहल से न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि विदेशी बाजारों में निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे. यह भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को पारंपरिक खेती से हटाकर हाई-टेक व्यवसाय की ओर ले जाने वाला कदम है. अब हैदराबाद में भी इस मछली का पालन तेजी से होगा और यह आसानी से उपलब्ध होगी.

About the AuthorMonali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

Location :

Hyderabad,Telangana

First Published :

January 06, 2026, 16:25 IST

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हैदराबाद में पहला ट्राउट फार्म, रंगा रेड्डी में नई तकनीक से होगी मछली पालन

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