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NRI Special : विदेश में खूब नाम कमाया राजस्थान के अलवर जिले के इस व्यक्ति ने,पढ़िए इंटरेस्टिंग सक्सेस स्टोरी | This person from Alwar district of Rajasthan earned a lot of name

8 दिसंबर 1962 को जन्म
उन्होंने बताया, उनका जन्म राजस्थान ( Rajasthan) के अलवर ( Alwar )जिले में एक छोटे से गांव जाट बहरोड के सामान्य परिवार में था। वे अपने माता पिता की तीसरी संतान हैं। उनकी माता का नाम भगवानीदेवी और पिता का नाम रामचंद्र तक्षक है। रामा से बड़ी एक बहन है, जिनका नाम इन्द्रावती है। इनकी बड़ी बहन के बाद एक बड़े भाई भी थे, लेकिन वे एक वर्ष की आयु में ही बीमारी के कारण चल बसे थे। उनसे छोटे दो भाई जयप्रकाश और विनोद हैं। इनके बाद दो छोटी बहनें उर्मिला और कमलेश हैं।
अपने माता पिता की तीसरी संतान
रामा ने बताया, प्रारंभिक शिक्षा गांव में पंडित जी की पाठशाला में हुई। पंडित जी पड़ोस के गांव मुण्डनवाड़ा कला के निवासी थे। वे सफेद चंदन का टीका जरूर लगाते थे, नाटे कद के बहुत बुजुर्ग थे। दो रुपया प्रतिमाह में पंडित जी के प्राइवेट स्कूल में पढ़ने आया करते थे। पंडित जी की पाठशाला गांव की धर्मशाला में चलती थी। सर्दी के दिनों में धर्मशाला की छत पर, बरसात के दिनों में धर्मशाला के पास बनी छतरी में और गर्मियों में पेड़ के नीचे पढ़ते थे। शादी विवाह के दिनों में जब धर्मशाला में बारात आ कर ठहरती, तब पंडित जी अपनी पाठशाला की छुट्टी कर देते थे।
दसवीं तक बहरोड़ में पढ़ाई की
तक्षक ने बताया, दसवीं कक्षा तक तो स्वयं के गाँव जाट बहरोड़ में ही पढ़ाई की। हायर सैकण्डरी बीजवाड़ चौहान स्कूल से की। यह स्कूल जाट बहरोड़ गाँव से लगभग दस ग्यारह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उन दिनों रेतीले कच्चे रास्ते थे। इन रेतीले रास्तों पर साइकिल चलाना सम्भव न था। गाँव से आठ दस छात्र थे। सब पैदल ही यह दूरी पूरी करते थे। वे कहते हैं,”इस पैदल जाने का भी अपना आनंद था। गर्मियों के सुबह साढ़े सात बजे स्कूल समय था। समय पर पहुंचने के लिए सुबह बहुत जल्दी होती थी।”
सुबह पाँच बजे उठना नियम
उन्होंने बताया, जब वो हायर सैकण्डरी में थे तब उनकी माँ बहुत अस्वस्थ थी। यह अस्वस्थता लगभग दो बरस चली। बड़ी बहन इन्द्रावती का विवाह हो चुका था। इस कारण माँ के भारी कामों में हाथ बँटाने के लिए सुबह पाँच बजे उठना एक नियम सा बन गया था। उन्हें सुबह उठते ही बरही बाल्टी से कुँए से पानी निकालना पड़ता। कुँए से घर लौटते समय कन्धे में बरही होती और दोनों हाथों में पानी से भरी दो बाल्टियां। पानी भरी इन की बाल्टियों को रसोई में रखते ही उन्हें दही बिलौना होता था। वे कहते हैं ,तब कुछ मिनट दही बिलौते ही माँ टोकती “बेटा अब अपने पीने के लिए अध बिलोया दही भी बिलोवणी से निकाल।” सांझ की बासी रोटी और अधबिलोया दही सुबह का नाश्ता सामान्य बात थी । नाश्ते के बाद खूँटी से टंगे झोले को कंधे में लटका कर दस ग्यारह किलोमीटर पैदल चलकर साढ़े सात बजे स्कूल पहुंचना होता था।
उन्होंने सगाई तोड़ दी
रामा तक्षक ने बताया कि वे 1978 में गाँव से महाविद्यालय की पढ़ाई के लिए अलवर शहर गए। उस समय एक कनस्तर और बोरी में लिपटी बिछावन साथ थी। बी.ए. द्वितीय वर्ष की पढ़ाई के समय अवलर शहर में रहते हुए, रामा तक्षक की अनुपस्थिति में गाँव में सगाई कर दी गई, जो उन्होंने समाज के विरोध का दंश झेल कर तोड़ दी।
घर की ओर पैर न बढ़े
तक्षक ने बताया, पिता चाहते थे कि बी एड करो और कहीं क्लर्क बन जाओ। टाइपिंग सीख लो। वे एक दिन टाइप सीखने भी गया। महीने भर की फीस भी दे आए,लेकिन फिर कभी लौट कर टाइप सीखने न गए। यह सब सब उन्हें गले नहीं उतरता था। इस बीच प्रतियोगी परीक्षाएँ देते रहे। तब 30 नवंबर 1984 सिविल सेवा मुख्य परीक्षा इतिहास का पेपर था। इन्दिरा गाँधी की हत्या के कारण यह परीक्षा रद्द हुई। यह परीक्षा 1985 के आरंभ में हुई। इस लिखित परीक्षा में तो सफलता मिल गई, लेकिन साक्षात्कार में फेल परिणाम सुन कर घर की ओर पैर न बढ़े थे। असफलता से मन भारी और पीड़ा से भरा था। घर पहुँचने से पहले कई बार सोचा जीवनलीला खत्म कर लूँ।
बेरोजगारी काल झेला
वे बताते हैं , तब माँ सप्ताह में चार व्रत करती थीं। यह सोच की बेटे को नौकरी मिल जाये तो गृहस्थी चल पड़े। बेटी के ब्याह में लिया कर्ज उतरे। उन्होंने लम्बे समय तक बेरोजगारी काल झेला। उन्हें नीम के पत्तों सी कड़वाहट भरी आर्थिक तंगी पग पग पर सालती थी।
प्रेम विवाह के कारण घर छूटा
उन्होंने बताया, विदेशी महिला से प्रेम विवाह के बाद एक और झंझट हो गया। परिवार को प्रेम विवाह की जानकारी मिली तो एक कड़ा संदेश मिला कि “अब घर मत आना।” प्रेमिका के साथ रेल से दिल्ली से गोरखपुर वाया सोनोली काठमांडू पहुंचा। काठमांडू शहर से थोड़ा दूर बौद्धा में मकान किराये पर लिया। भूख का उपाय था रोजगार। काठमाण्डू के एक रेस्टोरेंट में काम किया। उसके बाद अपनी पत्नी के साथ खजुराहो में इटालियन रेस्टोरेंट की शुरूआत की। यह कड़ी मेहनत चल निकली। उसके बाद आगामी बरसों में खजुराहो में ही दूसरा रेस्टोरेंट, कालन्गूट गोवा में तीसरा, जयपुर में चौथा और ताज रोड आगरा में पांचवाँ रेस्टोरेंट खोला।
भारत से कपड़ों का आयात
रामा तक्षक ने बताया, सन 1996 में मीरा नायर के निदेशन में ‘कामसूत्र’ फिल्म के पहले भाग को खजुराहो में ही फिल्माया गया। इस दौरान फिल्म यूनिट के साथ काम करने यानि कड़ी मेहनत देखने और सीखने का अवसर मिला। तब 9/11 की घटना ने विदेशी पर्यटन व्यवसाय की चूलें हिला दी थी। इस कारण सपत्नीक नीदरलैंड में स्थाई रूप से रहने लगा। मैं भारत से कपड़ों का आयात करता हूं। यूरोप में कपड़ों के व्यवसाय को स्थापित करने के लिए आप यूरोप के विभिन्न शहरों – एमस्टरडम, डूजलडोर्फ, फ्रेंकफर्ट, कोपनहेगन, पेरिस, मिलान, लंदन व बर्मिंघम में फैशन मेलों में प्रतिवर्ष भाग लेता हूं। मैं अब तक लगभग तीस देशों की यात्रा कर चुका हूं।
छात्र जीवन से लेखन में सक्रिय
उन्होंने बताया, छात्र जीवन से लेखन में सक्रिय रहा हूं। मेरे आलेख भारत की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। मैंने सन 1983 में, छात्र जीवन में ही तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन, दिल्ली में भी भाग लिया था। मुझे भारत की विभिन्न भाषाओं के साथ-साथ, इटालियन और डच भाषा का भी अच्छा ज्ञान है। इटालियन और डच भाषा से हिंदी में अनुवाद का काम भी करता हूं। इन भाषाओं के हिंदी अनुवाद विश्वरंग व अन्य पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
प्रवासी भारतीय रचनाकारों को इस मंच से जोड़ा
रामा तक्षक ने बताया, मैं साझा संसार, नीदरलैंड साहित्यिक व सांस्कृतिक मंच का संस्थापक व अध्यक्ष हूं । मैं भारतीय ज्ञानपीठ, विश्व रंग और वनमाली सृजन पीठ के साथ मिलकर ‘साहित्य का विश्व रंग’ ऑनलाइन आयोजन करता रहा हूं। विगत वर्षों में, इस आयोजन के माध्यम से आपने लगभग पांच सौ प्रवासी भारतीय रचनाकारों को इस मंच से जोड़ा है। इस आयोजन के अलावा ‘प्रवास मेरा नया जन्म’ और ‘संस्कृत की वैश्विक विरासत’ शीर्षक से भी ऑनलाइन आयोजन करता हूं।
विश्वविद्यालय में वक्तव्य
उन्होंने बताया, मैंने उज़्बेकिस्तान देश के ताशकंद स्टेट विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ‘केन्द्रीय व दक्षिण एशिया : अंतर सांस्कृतिक संचार का चौराहा’ विषय पर वक्तव्य दिया था। इसके अलावा नीदरलैंड्स से प्रकाशित साहित्य का विश्व रंग’ पत्रिका का संपादक हूं। साथ ही मेरी ओर से ‘नीदरलैंड्स की चयनित रचनाएं’ संपादित पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। भारतीय पत्र (1583 1588) की ओर से कोचिन से इटालियन भाषा में, लिखे गए पत्र की पुस्तक ‘Lettre Indiane’ का हिंदी में अनुवाद व ‘रंगीली चुनरिया’ उपन्यास प्रकाशनाधीन हैं।
दर्जनों सम्मान मिल चुके
रामा तक्षक ने बताया , मेरी पुस्तक ‘जब मां कुछ कहती मैं चुप रह सुनता’ की कविता शीर्षक ‘जब मां कुछ कहती मैं चुप रह सुनता’ राजीव गांधी विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही है। मुझे अब तक प्रवासी साहित्यकार सम्मान, विश्व रंग सम्मान, अन्तर्राष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मान सहित दर्जनों सम्मान मिल चुके हैं। मैं राजस्थान हिंदी साहित्य अकादमी, उदयपुर राजस्थान, नागरी लिपि परिषद, 19, गांधी स्मारक निधि, राजघाट, नई दिल्ली का सदस्य हूं।
राठ रंग महोत्सव
मैंने राजस्थान अलवर के नीमराणा में विगत वर्ष 11 अगस्त 2023 को राठ रंग महोत्सव का आयोजन में किया था। इस आयोजन में साझा संसार की ओर से श्री रामानंद राठी को राठ रंठ सम्मान दिया गया था। साथ ही ग्यारह हजार रुपये का चैक भी दिया गया । इसके अलावा दिसंबर 2023 में मेरे उपन्यास ‘हीर हम्मो’ को राजस्थान साहित्य अकादमी की ओर से प्रभा खेतान पुरस्कार मिला है।
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