Unique tradition: नारियल, आतिशबाज़ी और दौड़ते बैल, पाली की ये अनोखी परंपरा है दीपावली के बाद का रोमांच भरा त्योहार

Last Updated:October 22, 2025, 20:08 IST
राजस्थान के पाली जिले के कनूजा गांव में दीपावली के दूसरे दिन ‘बैल भड़काने’ की वर्षों पुरानी परंपरा को इस वर्ष भी उत्साहपूर्वक निभाया गया। गोवर्धन पूजा के बाद बेसहारा बैलों के सींगों पर नारियल की पोटली बांधकर उन्हें आतिशबाजी के साथ छोड़ा गया. बैलों के पीछे युवाओं की टोलियां दौड़ती नजर आईं, जो उनके सींगों से नारियल निकालने का प्रयास करती हैं. यह परंपरा गांव में रोमांच, साहस और एकता का प्रतीक मानी जाती है, जिसे लगभग 60 वर्षों से निभाया जा रहा है. पूरे गांव में उत्सव और सांस्कृतिक विरासत का जश्न देखने को मिला.
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पाली. शहर की चकाचौंद में हर व्यक्ति अपने परिवार के साथ पुरानी परपंराओं को भूलता जा रहा है, तो वहीं बात करे राजस्थान के उन गांवों की जहां पर आज भी पुरानी परपंराओं को जीवित रखा गया है. बात अगर पाली जिले के नजदीक आने वाले रायपुर मारवाड़ के कनूजा गांव में एक ऐसी परपंरा को निभाया गया जो दीपावली के दूसरे दिन निभाई जाती है. इसमें बैल भडकान की वर्षो पुरानी एक परपंरा जिसकों इस बार भी निभाया गया. आमतोर पर गोवर्धन पूजा की जाती है यहां पर गोवर्धन पूजा के बाद ग्रामीणों द्वारा बेसहारा बेलों के सींगों पर नारियल की पोटली बांधकर उनको परपंरा के तहत आतिशबाजी के साथ छोड़ा जाता है. जिसके बाद बैल दौड़ने लगे तो युवाओं की टोलिया उनके पीछे दौड पड़ी. रायपुर मारवाड़ उपखंड के कनूजा गांव में दीपावली के दूसरे दिन ‘बैल भड़काने’ की वर्षों पुरानी परंपरा निभाई गई. गोवर्धन पूजा के बाद ग्रामीणों ने बेसहारा बैलों के सींगों पर नारियल की पोटली बांधी. परंपरा के तहत आतिशबाजी के साथ बैलों को छोड़ा गया. बैल दौड़ने लगे तो युवाओं की टोलियां उनके पीछे दौड़ पड़ी. युवक बैलों के सींगों से नारियल की पोटली निकालने का प्रयास करते दिखे.
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
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First Published :
October 22, 2025, 20:08 IST
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पाली कनूजा गांव में दीपावली पर बैल भड़काने की 60 साल पुरानी परंपरा



