Bhujangasana benefits: तिर्यक भुजंगासन के फायदे

Last Updated:January 01, 2026, 23:39 IST
Bhujangasana Benefits: भुजंगासन के एक रूप का नाम ही तिर्यक भुजंगासन है. इसके अभ्यास से कब्ज की समस्या कम होती है, और लीवर-किडनी सक्रिय रहते हैं. सरल और प्रभावी आसन के रोजाना अभ्यास से सेहत बेहतर होती है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने के साथ-साथ पेट के आंतरिक अंगों को सक्रिय करता है.
आज के समय में व्यस्त दिनचर्या और गड़बड़ खानपान से शरीर जल्दी रोगों की चपेट में आ जाता है. ऐसे में तिर्यक भुजंगासन का नियमित अभ्यास शरीर को कई लाभ पहुंचाता है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है, पीठ दर्द दूर करता है तथा पाचन तंत्र को सुधारता है.
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार भुजंगासन के एक रूप का नाम ही तिर्यक भुजंगासन है. इसके अभ्यास से कब्ज की समस्या कम होती है, और लीवर-किडनी सक्रिय रहते हैं. सरल और प्रभावी आसन के रोजाना अभ्यास से सेहत बेहतर होती है.
तिर्यक भुजंगासन में ट्विस्टिंग की मुद्रा जोड़ी जाती है. ‘तिर्यक’ का अर्थ तिरछा या घुमावदार होता है, जबकि ‘भुजंगासन’ कोबरा पोज के नाम से जाना जाता है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने के साथ-साथ पेट के आंतरिक अंगों को सक्रिय करता है.
तिर्यक भुजंगासन करने की विधि आसान है. इसके लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेट जाएं. दोनों पैरों को सीधा रखें और एड़ियों को आपस में मिला लें. हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें. सांस भरते हुए ऊपरी शरीर को ऊपर उठाएं, जैसे भुजंगासन में करते हैं. अब सिर और धड़ को दाईं ओर घुमाएं और बाएं पैर की एड़ी को देखने की कोशिश करें. कुछ सेकंड रुकें, फिर सामान्य स्थिति में आएं. इसी प्रक्रिया को बाईं ओर दोहराएं. यह एक चक्र पूरा होता है. शुरुआत में 3-5 चक्र करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं.
इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली होती है, जिससे पीठ दर्द और पोस्चर संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है. यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, क्योंकि ट्विस्टिंग से आंतों पर दबाव पड़ता है और कब्ज जैसी समस्या दूर होती है. पेट के अंग जैसे लीवर, किडनी और आंतें सक्रिय होकर बेहतर कार्य करती हैं. फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, सांस की प्रक्रिया सुचारू होती है, और छाती चौड़ी होती है.
महिलाओं के लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद है, क्योंकि यह पीरियड्स संबंधी अनियमितताओं और स्त्री रोगों में राहत देता है. नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखता है और तनाव कम करता है. कंधे, बाहें और जांघें लचीली बनती हैं, साथ ही कमर की चर्बी घटाने में भी मदद मिलती है. यह आसन कुंडलिनी जागरण और शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है.
योग विशेषज्ञों के अनुसार, तिर्यक भुजंगासन को दैनिक रूटीन में शामिल करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत होते हैं. हालांकि, कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं. गर्भवती महिलाएं, कमर या गर्दन में गंभीर चोट वाले व्यक्ति, और हर्निया या अल्सर के मरीज इस आसन से बचें. हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग भी सलाह लेकर तिर्यक भुजंगासन करें. आसन हमेशा खाली पेट और योग विशेषज्ञ की देखरेख में करें.
About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor
शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
First Published :
January 01, 2026, 23:39 IST
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रीढ़ की हड्डी को लचीला, पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है ये योगासन
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