जालोर में ठंड हुई तेज, तापमान 10° से नीचे, कृषि विशेषज्ञ बोले…गेहूं और सरसों के लिए ‘बेहद फायदेमंद’ मौसम

Last Updated:December 12, 2025, 17:39 IST
जालोर में पिछले चार दिनों से चल रही तेज ठंडी उत्तरी हवा ने मौसम को पूरी तरह सर्द बना दिया है. रात का तापमान लगातार 10 डिग्री से नीचे पहुंच रहा है, जिससे ओस की चमक और हल्की धुंध सुबह का नजारा बदल रही है. दिन में हल्की गर्माहट लौटती है, लेकिन रात ढलते ही ठंड फिर हावी हो जाती है. कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार यह मौसम रबी फसलों के लिए बेहद अनुकूल है, क्योंकि सर्दी पौधों की वृद्धि, दानों के भराव और उत्पादन क्षमता को मजबूत करती है.
जालोर जिले में पिछले चार दिनों से चल रही ठंडी उत्तरी हवा ने मौसम का मिज़ाज पूरी तरह बदल दिया है. रात का तापमान लगातार 10 डिग्री से नीचे पहुंच रहा है, जिससे सुबह के समय खेतों में ओस की चमकती बूंदें साफ दिखाई देती हैं और हल्की धुंध वातावरण में ठंडक बढ़ा रही है. हवा की गति सामान्य से कम रहने के कारण रात का पारा और नीचे लुढ़क गया है. किसानों के अनुसार इस तरह की ठंड फसलों के लिए लाभदायक है.

दिन में तेज धूप निकलने और दोपहर तक हवा शांत रहने से तापमान में करीब 3.1 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन रात ढलते ही उत्तरी हवा दोबारा सक्रिय हो गई और ठंड में फिर इजाफा महसूस हुआ. कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार दिन का तापमान 30.9 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. इससे पहले 17 नवंबर को पारा 7.4 डिग्री तक पहुंच गया था, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कुछ दिनों तक मौसम में नरमी रही. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी दिन में हल्की गर्माहट और रात में तेज ठंड का यही क्रम जारी रहने की संभावना है.

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि इस समय का मौसम रबी सीजन के लिए बेहद अनुकूल बना हुआ है. लगातार पड़ रही सर्दी गेहूं, रायड़ा और सरसों जैसी फसलों की वृद्धि को मजबूत करती है और पौधों की जड़ों को बेहतर विकास का मौका मिलता है. उन्होंने कहा कि शुष्क व ठंडा वातावरण न केवल फसलों की ग्रोथ बढ़ाता है, बल्कि दानों के भराव और उत्पादन क्षमता में भी सुधार लाता है. किसानों के लिए यह मौसम खेती की दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
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रातभर की ठंड और ओस की बूंदों ने खेतों में प्राकृतिक नमी बढ़ा दी है, जिससे फसलों की जड़ों को अतिरिक्त पोषण मिल रहा है. किसान भी मानते हैं कि ऐसे मौसम में फसलें तेजी से हरी होती हैं और उनकी बनावट मजबूत होती है. ओस का पानी धीरे-धीरे मिट्टी में समाकर पौधों के लिए लाभकारी नमी बनाए रखता है, जिससे सिंचाई की जरूरत भी कम पड़ती है. स्थानीय किसानों के अनुसार इस तरह की नमी फसलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और खेतों में नई कोंपलों की बढ़वार भी तेज होती है.

डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि अभी आसमान में हल्के बादल हैं, जिनसे फसलों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा. लेकिन अगर बादल ज्यादा बढ़ गए, तो कीट और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि अगर तापमान करीब 5 डिग्री तक गिर जाए और हवा भी रुक जाए, तो पाला पड़ने की स्थिति बनती है, जिससे फसलें जल सकती हैं और पत्तियां फट जाती हैं. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि ऐसी ठंड में फसलों को बचाने के लिए समय पर हल्की सिंचाई करना बहुत फायदेमंद रहता है.
First Published :
December 12, 2025, 17:39 IST
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जालोर में ठंडी उत्तरी हवा से बढ़ी सर्दी, फसलों के लिए अनुकूल मौसम



