| Rajasthan Police decoy operation |

जयपुर. राजस्थान पुलिस मुख्यालय की ओर से चलाए गए एक बड़े और सुनियोजित डिकॉय ऑपरेशन ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है. इस ऑपरेशन में बजरी माफिया के साथ मिलीभगत रखने वाले थानाधिकारियों की परत-दर-परत पोल खुली है. लगातार मिल रही शिकायतों और खुफिया इनपुट के बाद डीजीपी राजीव शर्मा के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें कुल 11 थाना प्रभारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई. इस कार्रवाई को पुलिस मुख्यालय की अब तक की सबसे सख्त और सीधी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है. इसमें न केवल निलंबन बल्कि लाइन हाजिर जैसी कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई है.
पुलिस मुख्यालय की इस कार्रवाई के बाद पूरे राज्य के पुलिस महकमे में जवाबदेही और निगरानी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. खास बात यह है कि इस ऑपरेशन ने केवल थानाधिकारियों तक ही सवाल सीमित नहीं रखे, बल्कि कई जिलों के एसपी की मॉनिटरिंग और कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और भी बड़े स्तर पर विस्तार ले सकती है.
डिकॉय ऑपरेशन में उजागर हुई मिलीभगत
राजस्थान पुलिस मुख्यालय को लंबे समय से बजरी माफिया और कुछ थानों के बीच सांठगांठ की शिकायतें मिल रही थीं. इन्हीं शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए डिकॉय ऑपरेशन की रणनीति बनाई गई. इस ऑपरेशन में पुलिस के ही विशेष दस्तों ने आम नागरिक बनकर बजरी के अवैध कारोबार से जुड़े संपर्क साधे, जिसमें कई थानाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई. जांच में सामने आया कि कुछ थानेदार अवैध बजरी परिवहन और खनन पर आंखें मूंदे हुए थे, जबकि कुछ मामलों में सीधे संरक्षण देने के आरोप भी सामने आए.
इन थानाधिकारियों पर हुई सख्त कार्रवाई
डिकॉय ऑपरेशन के बाद पुलिस मुख्यालय ने तत्काल प्रभाव से 11 थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की. शिवदासपुरा, पीपलू, बरौनी, पीसांगन और धौलपुर कोतवाली के एसएचओ को निलंबित कर दिया गया. वहीं गुलाबपुरा, कुन्हाड़ी, नांता, लालसोट, गंगरार और लूणी के एसएचओ को लाइन हाजिर किया गया है. इसके अलावा विशेष रूप से बरौनी थाना प्रभारी बृजेंद्र सिंह और पीपलू थाना प्रभारी रघुवीर सिंह को बजरी माफिया से सीधी मिलीभगत के आरोप में निलंबित किया गया है. इस कार्रवाई को एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अवैध खनन और माफिया से सांठगांठ किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
एसपी की मॉनिटरिंग पर भी उठे सवालइस पूरे घटनाक्रम के बाद कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं. जानकारों का कहना है कि यदि थानास्तर पर लंबे समय तक ऐसी गतिविधियां चलती रहीं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल थानाधिकारियों तक सीमित नहीं हो सकती. पुलिस मुख्यालय स्तर पर अब यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग और नियंत्रण व्यवस्था कितनी प्रभावी थी.
पुलिस महकमे में मचा हड़कंपइस कार्रवाई की खबर फैलते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. कई थानों में आंतरिक समीक्षा शुरू कर दी गई है और थानाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बजरी माफिया या किसी भी अवैध गतिविधि से जुड़ी शिकायत सामने आने पर तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. डीजीपी राजीव शर्मा के निर्देशों के बाद की गई इस कार्रवाई को पुलिस सुधार और सख्त अनुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.



