सिनेमा के हर बदलते दौर को देखने वाला फिल्ममेकर, पहली फिल्म हुई Flop फिर रचा इतिहास, TV को लेकर बदला लोगों का नजरिया

Last Updated:November 05, 2025, 06:01 IST
एक ऐसा फिल्ममेकर जिसने हर दौर का बदलता सिनेमा देखा. टीवी पर सुपरहिट शो लाए और हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक फिल्में दीं. हिंदी सिनेमा के उस दिग्गज फिल्ममेकर का असली नाम आज भी बहुत कम लोग जानते हैं. 
नई दिल्ली. वो फिल्ममेकर, जिसने न सिर्फ सिनेमा के हर बदलते दौर को करीब से देखा, बल्कि उसे नई दिशा भी दी. शुरुआत में उनकी पहली फिल्म फ्लॉप हुई, लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में नहीं था. उन्होंने ऐसी कहानियां रचीं, जो समाज का आईना बन गईं. बोल्ड विषयों और मानवीय भावनाओं पर आधारित फिल्मों से लेकर टेलीविजन पर धार्मिक और सामाजिक धारावाहिकों तक… उन्होंने दर्शकों की सोच बदल दी. टीवी को ‘घर-घर का मंदिर’ बनाने वाले इस निर्देशक ने मनोरंजन को एक नई गरिमा दी. वो सिर्फ फिल्ममेकर नहीं, बल्कि कहानी कहने की एक परंपरा थे. बात हो रही है बलदेव राज चोपड़ा था, जिन्हें लोग बी. आर चोपड़ा के नाम से जानते हैं. जिन्होंने ‘महाभारत’, ‘नया दौर’ और ‘वक़्त’ जैसी कालजयी कृतियों से भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपना नाम अमर कर दिया. . फोटो साभार-रेडिट

बलदेव राज (बी.आर.) चोपड़ा भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के महान निर्माता और निर्देशक थे. उन्होंने अपने पूरे करियर में दास्तान, तवायफ और बागबान जैसी कई शानदार फिल्में बनाईं. उनका टीवी शो ‘महाभारत’ आज भी लोगों के जहन में जिंदा है. भले ही आज बीआर चोपड़ा हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अपनी फिल्मों और टीवी शो के जरिए आज भी वो हम सबके दिलों में जिंदा हैं. . फोटो साभार-रेडिट

बलदेव राज चोपड़ा ने मूक फिल्मों का दौर देखा, पहली बोलने वाली फिल्म देखी, ब्लैक एंड व्हाइट पर्दे को कलर में बदलते देखा. हिंदी सिनेमा के इस दिग्गज फिल्ममेकर ने एक से बढ़कर एक फिल्में दीं. साल 1946 के आस-पास बीआर चोपड़ा ने आईएस जौहर की कहानी ‘चांदनी चौक’ पर एक फिल्म शुरू की लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट पूरी हुई, शूटिंग भी शुरू हुई लेकिन 1947 में आजादी का समय आ गया और बंटवारे के समय दंगे भड़के तो इन्हें अपनी फिल्म बंद करनी पड़ी. . फोटो साभार-रेडिट

उसी समय वो दिल्ली आ गए और कुछ समय यहां रहने के बाद मुंबई पहुंच गए. यहां आने के बाद साल 1949 में फिल्म करवट आई जो फ्लॉप साबित हुई. इनके निर्देशन में पहली फिल्म अफसाना (1951) आई जिसमें अशोक कुमार लीड एक्टर थे. ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई.

1955 में उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस ‘बीआर फिल्म्स’ स्थापित किया, जिसके तहत उन्होंने दिलीप कुमार और वैजयंती माला की फिल्म ‘नया दौर’ बनाई. इसके बाद उन्होंने गुमराह, कानून, साधना, पति-पत्नी और वो, हमराज, निकाह, कर्म, एक ही रास्ता और बाबुल जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी. फोटो साभार-रेडिट

बीआर चोपड़ा को घर-घर में पहचान 1988 में उनके टीवी शो ‘महाभारत’ से मिली. उस समय जब टीवी हर घर में नहीं था, पूरा गांव एक घर में इकट्ठा होकर इस महाकाव्य को देखने आता था.

लेकिन इससे पहले उन्होंने टीवी सीरियल ‘चुन्नी’ बनाया, जो दूरदर्शन पर 38 साल पहले 1987 में प्रसारित हुआ था. यह वह दौर था, जब टीवी पर गिने-चुने कार्यक्रम ही आते थे. तब पंजाब के दो दोस्तों की इस कहानी ने हर किसी को खूब रुलाया था. इस कहानी में बचपन की दोस्ती है, प्यार है, अलगाव है और उससे आगे बढ़कर धर्म के नाम की दीवार भी है.

बीआर चोपड़ा की आखिरी फिल्म ‘भूतनाथ’ थी. बीआर चोपड़ा का योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था. उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई दिशा और गंभीर विषयों पर आधारित कहानियों से समृद्ध किया. उनकी आखिरी फिल्म भूतनाथ थी. 1998 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान, दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया. फाइल फोटो

बीआर चोपड़ा का निधन 5 नवंबर 2008 को हुआ था, लेकिन उनके बनाए हुए सिनेमा और टीवी शो आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं. ‘महाभारत’ के निर्माता के रूप में उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा. उनकी फिल्मों और टेलीविजन कृतियों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को भी दर्शकों तक पहुंचाया. फोटो साभार-@IMDb
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November 05, 2025, 06:01 IST
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