टॉरपीडो, एंटी-शिप मिसाइल, स्टील्थ टेक्नोलॉजी… INS वाघशीर कितना खतरनाक? क्यों कहलाता है ‘साइलेंट किलर’

नई दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को भारतीय नौसेना की जिस आईएनएस वाघशीर पनडुब्बी में यात्रा की, उसकी ताकत बेमिसाल है. यह स्वदेशी पनडुब्बी भारतीय नौसेना की व्यावसायिक उत्कृष्टता, युद्ध की तैयारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक शानदार उदाहरण है. पी75 स्कॉर्पीन परियोजना की छठी और अंतिम पनडुब्बी, आईएनएस वाघशीर को इस साल जनवरी में नौसेना में शामिल किया गया था. नौसेना अधिकारियों के मुताबिक यह दुनिया की सबसे शांत और बहु-उद्देशीय डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में से एक है.
आईएनएस वाघशीर को कई तरह के मिशन को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें सतह पर मौजूद दुश्मन से लड़ाई, पनडुब्बी-रोधी अभियान, खुफिया जानकारी जुटाना, क्षेत्र की निगरानी और विशेष अभियान शामिल हैं. यह ‘वायर-गाइडेड टॉरपीडो’, एंटी-शिप मिसाइलों और एडवांस सोनार सिस्टम्स से लैस है. यह पनडुब्बी मॉड्यूलर निर्माण तकनीक पर आधारित है, जिससे भविष्य में इसे एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक जैसी टेक्नोलॉजी से इंटीग्रेट करने की सहूलियत मिलती है.
आईएनएस वाघशीर की खास विशेषताएं:
स्टील्थ टेक्नोलॉजीवाघशीर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार, सोनार और निगरानी सिस्टम से आसानी से बच सके.
डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीनयह डीजल-इलेक्ट्रिक सिस्टम पर आधारित है, जिससे यह बेहद शांत (Silent Killer) तरीके से ऑपरेशन कर सकती है.
लंबे समय तक पानी के भीतर रहने की क्षमतायह पनडुब्बी कई दिनों तक बिना सतह पर आए पानी के नीचे रह सकती है.
घातक हथियार प्रणालीइसमें आधुनिक टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइल दागने की क्षमता है, जिससे यह दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को तबाह कर सकती है.
अत्याधुनिक सोनार और सेंसरवाघशीर में लगे सेंसर सिस्टम दुश्मन की हलचल को बहुत दूर से पकड़ सकते हैं.
‘मेक इन इंडिया’ का मजबूत उदाहरणइसका निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में फ्रांस की नेवल ग्रुप की तकनीकी मदद से किया गया है.
भारतीय महासागर में बढ़ी निगरानी क्षमताहिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर रखने में यह अहम भूमिका निभाएगी.
नाम का अर्थ और प्रतीक‘वाघशीर’ का अर्थ है बाघ का सिर, जो इसकी आक्रामकता और घातक क्षमता को दर्शाता है.
पनडुब्बी पर सवार होकर यात्रा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपतिराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना की अग्रिम पंक्ति की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर सवार होकर यात्रा की. मुर्मू पनडुब्बी पर सवार होकर यात्रा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति हैं. इससे पहले फरवरी 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भारतीय नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस सिंधु रक्षक से समुद्री यात्रा की थी. अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे से कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी पर राष्ट्रपति के सवार होने के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी उनके साथ मौजूद थे.
मुर्मू ने नौसेना की वर्दी पहनकर पनडुब्बी में प्रवेश करने से पहले नौसेना कर्मियों को हाथ हिलाकर अभिवादन किया. राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कारवार नौसेना अड्डे पर भारतीय नौसेना की स्वदेशी कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर में सवार हुईं.”
कारवार नौसेना अड्डे को विकसित करने पर जोरभारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए कारवार नौसेना अड्डे को विकसित कर रही है. राष्ट्रपति मुर्मू ने इस साल के अक्टूबर में अंबाला स्थित भारतीय वायुसेना स्टेशन से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी.
इसी के साथ वह भारतीय वायुसेना के दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बनीं. इससे पहले, उन्होंने अप्रैल 2023 में असम के तेजपुर से सुखोई 30 एमकेआई में उड़ान भरी थी.


