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Last Updated:December 08, 2025, 11:06 IST
Sikar Ekadash Shivling: सीकर में स्थापित एकादश शिवलिंगों का इतिहास बेहद रोचक है. माना जाता है कि इन 11 शिवलिंगों की स्थापना सीकर के राजा द्वारा एक दिव्य संकेत मिलने के बाद की गई थी. यह स्थान अपनी आध्यात्मिक शक्ति, प्राचीन संरचना और राजघराने से जुड़े किस्सों के कारण आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों दोनों को आकर्षित करता है.
सीकर. राजस्थान के सीकर शहर में स्थित आमने-सामने मंदिर, जिसे स्थानीय लोग देवरानी-जेठानी मंदिर भी कहते हैं, यह अपनी अद्भुत धार्मिक मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां भगवान गोपीनाथ जी की नियमित पूजा-अर्चना होती है, लेकिन इस मंदिर की सबसे विशेष पहचान इसके भीतर स्थित एकादश (11) शिवलिंग हैं. आमतौर पर एक मंदिर में एक ही शिवलिंग होता है, परंतु यहां एक ही कक्ष में 11 शिवलिंगों की स्थापना इस स्थल को खास बनाती है. यह मंदिर चांदपोल गेट, सीकर के पास स्थित है और वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
प्राचीन कथाओं के अनुसार, गोविंद देव जी 11 महादेव के शिवलिंग एक साथ लेकर आए थे, जिन्हें शिला के रूप में लाया गया था. कहा जाता है कि सीकर के राजा ने अपने महल के लिए बंगाल से एक विशेष शिला मंगवाई थी, साथ ही बंगाल से ही कारीगर भी आए थे. जब मजदूर उस शिला को तोड़ने लगे, तो वे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े. तब विद्वानों ने सलाह दी कि यह शिला दिव्य है और इससे भगवान की मूर्तियां बननी चाहिए. तब उसी शिला से 11 शिवलिंग बनाए गए और देवरानी-जेठानी गोविंद देव मंदिर में स्थापित किए गए.
अनुष्ठान और धार्मिक महत्वइस मंदिर में पिछले 150 से 200 वर्षों से विशेष अनुष्ठान लगातार किए जा रहे हैं. मान्यता है कि यहां किए गए अनुष्ठान कभी निष्फल नहीं होते. जन्मपत्री के मांगलिक दोष, विशेषकर कालसर्प दोष, यहां विधिवत पूजन से दूर किए जाते हैं. शांति, साधना और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर वातावरण भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से मनोकामना लेकर यहां आता है, भगवान शंकर उसकी प्रार्थना अवश्य स्वीकार करते हैं. निरंतर चलने वाले अनुष्ठानों ने इस मंदिर को सिद्ध पीठ का दर्जा दिलाया है.
धार्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण केंद्रदेवरानी-जेठानी मंदिर की संरचना भी अपने-आप में अनोखी है. एक ही कक्ष में 11 शिवलिंग स्थापित हैं, जो अत्यंत दुर्लभ दृश्य प्रस्तुत करते हैं. मंदिर में प्रवेश के लिए दो मार्ग बने हुए हैं, जो इसे और भी विशेष बनाते हैं. शिवलिंगों के सामने नंदी और त्रिशूल की उपस्थिति शैव परंपरा की पूर्णता दर्शाती है. शांत वातावरण, दीप-धूप की सुगंध और मंत्रों की गूंज यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को आध्यात्मिक अनुभव से भर देती है. यही कारण है कि यह मंदिर सीकर की धार्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion, career, politica…और पढ़ें
Location :
Sikar,Rajasthan
First Published :
December 08, 2025, 11:00 IST
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सीकर में कहां हैं 11 शिवलिंग? राजा से जुड़ी रोचक कहानी पहली बार आई सामने!



