किसानों के लिए बड़ी राहत! 3.61 करोड़ रुपये से यहां लगेगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, सिंचाई हो जाएगी आसान

Last Updated:January 09, 2026, 09:48 IST
Nagaur News: नागौर जिले के कुचेरा नगरपालिका क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए अब भूजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. केंद्र सरकार की अपशिष्ट जल प्रबंधन योजना के तहत 3.61 करोड़ रुपये की लागत से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा. इसमें नहाने, धोने और अन्य घरेलू कार्यों में उपयोग होने वाला अपशिष्ट जल उपचारित होकर सिंचाई और फैक्ट्रियों में पुनः उपयोग होगा. भूजल पुनर्भरण से जमीन का जलस्तर सुधरेगा और कुएँ व ट्यूबवेल में पानी की कमी कम होगी. यह परियोजना किसानों और स्थानीय लोगों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगी.
नागौर जिले के कुचेरा नगरपालिका क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है. अब यहां के किसानों को सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की अपशिष्ट जल प्रबंधन कार्य योजना के तहत कुचेरा में आधुनिक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा. इसके माध्यम से नहाने, धोने और अन्य घरेलू कार्यों में उपयोग होने वाले अपशिष्ट जल का उपचार कर सिंचाई में उपयोग किया जाएगा. इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा. यह योजना भूजल स्तर सुधारने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी.

कुचेरा नगरपालिका क्षेत्र में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 3.61 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी की गई है. खास बात यह है कि पूरे राजस्थान में इस योजना के लिए केवल 7 शहरों का चयन हुआ है, जिसमें कुचेरा भी शामिल है. इस योजना से भयंकर जल संकट से जूझ रहे नागौर के कोटेलाव और बरमंडी क्षेत्र को सबसे अधिक फायदा होगा. किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा, जिससे भूजल पर निर्भरता कम होगी और खेती में सुधार आएगा. यह परियोजना जल संरक्षण और सतत विकास में भी अहम योगदान देगी.

आपको बता दें कि अपशिष्ट जल प्रबंधन कार्य योजना का मुख्य उद्देश्य 90 से कम एलपीसीडी वाले कस्बों में जल संकट को दूर करना है. योजना के तहत कुचेरा में गंदा पानी उपचारित होकर सिंचाई और अन्य कार्यों में उपयोग किया जाएगा, जिससे पानी का पुन: उपयोग संभव होगा और गंदगी से निजात मिलेगी. कुचेरा पालिकाध्यक्ष तेजपाल मिर्धा ने बताया कि कोटेलाव और बरमंडी क्षेत्र में गंदा पानी बह रहा है, जिसे सरकार के सहयोग से साफ कर उपयोग में लाया जाएगा. इससे किसानों और स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा और जल संरक्षण में मदद होगी.
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उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार गंदे पानी को साफ कर किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. इस पानी का फैक्ट्रियों और अन्य प्रक्रियाओं में भी पुनः उपयोग होगा. भूजल पुनर्भरण के तहत जमीन के जलस्तर को सुधारने में मदद मिलेगी. योजना के तहत कुएं और ट्यूबवेल में पानी खत्म होने की स्थिति में भी जलस्तर बढ़ाने के लिए यह पानी छोड़ा जाएगा. इससे स्थानीय किसानों और क्षेत्रवासियों को पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

आपको बता दें कि पूरे प्रदेश में केवल सात शहरों को इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने बजट आवंटित किया है, जिसमें कुचेरा पालिका भी शामिल है. कस्बे में पानी की सप्लाई कम होने और गंदगी एकत्रित होने की समस्या पर अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा ने डीएलबी के चीफ इंजीनियर अरुण व्यास से संपर्क कर स्थिति बताई. मिर्धा लगातार इस परियोजना पर नजर रखे रहे और उच्चाधिकारियों से नियमित रूप से मांग करते रहे. कुचेरा में दो बार टीम ने आकर सर्वे किया और सकारात्मक रिपोर्ट दी, जिससे योजना पर काम आगे बढ़ा.

पालिकाध्यक्ष तेजपाल मिर्धा ने बताया कि जल्द ही रुडिस्को वर्किंग एजेंसी अगले एक महीने में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम शुरू कर देगी. इसके साथ ही कुचेरा में बारिश के दौरान एकत्रित होने वाले गंदे पानी से राहत मिलेगी. पालिका क्षेत्र में यह प्रणाली पानी को साफ करके बचाएगी और पुनः उपचारित कर सिंचाई, फैक्ट्रियों और अन्य उपयोगों में काम लिया जाएगा. योजना के तहत भूजल पुनर्भरण भी होगा, जिससे जमीन के जलस्तर में सुधार होगा और कुएं व ट्यूबवेल में पानी की कमी भी कम होगी. इससे किसानों और आम जनता दोनों को लाभ मिलेगा.
First Published :
January 09, 2026, 09:48 IST
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किसानों के लिए बड़ी राहत, 3.61 करोड़ से यहां लगेगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम



