Sirohi News: सुलग्नसागर बने दिगम्बर जैन मुनि करुणा सागर, दो जैन संतों ने शुरू की संयम तप और साधना की नई यात्रा

सिरोही: जैन धर्म के साधुओं की कठोर साधना के लिए प्रसिद्ध सिरोही जिले के वर्धमान तीर्थक्षेत्र, सियावा में दिगंबर जैन समुदाय ने विशेष दीक्षा समारोह का आयोजन किया. इस अवसर पर दो नवदीक्षित जैन मुनियों ने संयम और साधना की राह पर पहला कदम रखा. बालयोगी आचार्य सुरदेव सागर के सानिध्य में सुलग्न सागर महाराज ने मुनि दीक्षा ली और बाल ब्रह्मचारिणी पिंकी दीदी ने क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण की. समारोह में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कर इस अध्यात्मिक आयोजन को अपना साक्षी बनाया.
नवदीक्षित मुनियों को मिले नए नामइस दीक्षा समारोह में नवदीक्षित मुनि को “करुणासागर” और क्षुल्लिका माता को “कर्मठश्री माताजी” नाम दिया गया. इस अवसर पर आचार्य ने आर्यिका केवल्यश्री माताजी को गणिनी पद से सम्मानित किया. यह दीक्षा प्रक्रिया जैन धर्म के सिद्धांतों और मान्यताओं के प्रति समुदाय की आस्था को और प्रगाढ़ करती है.
समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने शिक्षा और मार्गदर्शनजैन समाज के लोगों का मानना है कि नवदीक्षित मुनि और साध्वियों की साधना समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगी. यह दीक्षा आयोजन श्रमण धर्म के विकास, सहयोग, साधना, और एकता का प्रतीक है. जैन समुदाय के अनुसार, दीक्षा लेने वालों के ज्ञान और समाज को दिए गए मार्गदर्शन से जैन समाज को आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण प्रेरणा मिलती है.
दिगंबर मुनियों की कठोर साधना परंपरा दिगंबर मुनियों के वस्त्र न पहनने की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है. कठिन साधना के भाग के रूप में ये साधु बिना वस्त्र के रहते हैं, भले ही ठंड कितनी भी हो, वे किसी भी तरह के गर्म कपड़ों का उपयोग नहीं करते. यह कठोर साधना उनके आत्म-बल और संयम की प्रतीक मानी जाती है.
FIRST PUBLISHED : October 27, 2024, 18:08 IST